संस्कृति

मिलिए स्वीडन की महिला आनंदा हिमानी से जो संस्कृत से असीम प्रेम करती है।

सनातन भारत ही नहीं विश्व की एक मात्र प्राकृतिक भाषा है संस्कृत जिसे हम भारतीयों ने पूर्ण रूप से त्याग दिया है। परंतु दूर देश की एक विदेशी महिला संस्कृत से असीम प्रेम करती है और वह स्वयं एक संस्कृत शिक्षिका भी है। आनंदा हिमानी, स्वीडन की गॊटेनबर की रहनेवाली संपूर्ण स्वास्थ प्रेरिका और संस्कृत शिक्षिका भी हैं। आनंदा पिछले कुछ वर्षों से भारत में रह रही हैं। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी से प्रदर्शन कला और हिन्दुस्तानी शास्त्रीय में स्नातक किया है। तत्पश्चात उन्होंने संस्कृत भारती में अध्ययन किया है और आज वह किसी भी भारतीय से भी उच्च कॊटी की संस्कृत का प्रयॊग अपने बोल चाल में कर सकती है।

सोमवार को स्वयं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संस्कृत भाषा में लिया गया आनंदा का इंटरव्यू ट्वीट करते हुए लिखा, “कौन कहता है कि संस्कृत बातचीत की भाषा नहीं है?” वास्तव में यह वीडियो दूरदर्शन के विशिष्ठ कार्यक्रम ‘त्रिज्या’ का है जिसमें स्वीडन की अनंदा हिमानी का संस्कृत में इंटरव्यू लिया गया है। आनंदा हिमानी विश्व भर में संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए जुटी हुई है। जो काम हम भारतीयों को करना चाहिये था उसे एक स्वीडन की महिला हमारे लिए कर रही है। हम अभारी है आनंदा जी के कि वे संस्कृत के प्रचार-प्रसार में जुटी है। किन्तु हम लज्जित है कि अपने अंग्रेज़ी प्रेम के चलते हमने संस्कृत भाषा को संपूर्ण त्याग दिया है।

स्वराज द्वारा ट्विटर पर साझा किए गए वीडियो में, हिमानी को संस्कृत में गायन करते हुए और संस्कृत भाषा के ऊपर उनके साक्षात्कार को देखा जा सकता है। भाषा में उनका प्रवाह देखकर निश्चित ही हम अनुमान लगा सकते हैं कि वह लंबे समय से संस्कृत भाषा सीख रही है। उनका कहना है कि बचपन से ही उन्हें पाश्चात्य गायन में रुची थी लेकिन भारत और संस्कृत के प्रति उनका लगन तब लगा जब उनकी भेंट एक महिला से हुई। आनंदा की भेंट उस महिला से एक ध्यान शिविर में हुई थी जहां वे लोग शांती से ‘ऒमकार’ का पठन कर आनंद की अनुभूती कर रहे थे।

आनंदा ने अपने संस्कृत प्रेम के बारे में विवरण देते हुए कहा कि ध्यान शिविर से उनके जीवन पर भारी प्रभाव पड़ा और उन्होंने उन मंत्रों में विश्वास करना शुरू कर दिया। इसी कारण उनके मन में संस्कृत के प्रति प्रेम जागा और उन्होंने संस्कृत सीखने का निर्णय लिया। जब वह भारत आयी तो वे केवल 19 साल की थी। भारत में संस्कृत अध्ययन के लिए पहले वह गंगॊत्री गईं तत्पश्चात वह बेंगलूरु के संस्कृत भारती में छह महीने तक रहीं और वहीं से उनकी संस्कृत यात्रा शुरू हुई। उन्होंने भारत भर में कई जगहों की यात्रा की और तो और वे नेपाल भी गयीं है।

हिमानी स्वीडन के देखभाल केंन्द्र में एक पंजीकृत नर्स है, साथ ही साथ वहां वो अपनी सहयॊगियों को संस्कृत भाषा सिखाने का काम भी करती है। हिमानी, भारत और संस्कृत के प्रति असीम प्रेम जताते हुए कहती है “संस्कृत केवल एक भाषा नहीं है, यह एक जीवन शैली है”। हम भारतीयों का मस्तक गर्व से उठता है जब विदेशी हमारे भारत और भारत से जुड़ी संस्कृती और परंपरा का सम्मान करते हैं और उसे स्वीकारते हैं। हमारा मस्तक लज्जा से झुक जाता है जब हमारे ही लोग भारत की गौरव शाली परंपरा का अपमान करते हैं। हम भारतीय हो कर भी जो नहीं समझ पाये उसे विदेशियों ने समझा है और आज उनसे ही हमें हमारी गौरवशाली परंपरा के बारे में सीख प्राप्त हो रहा है| यह गौरव की बात है या खेद की समझ में नहीं आता।

भारत सनातन धर्म की जननी है। सनातन भारत की प्राकृतिक भाषा संस्कृत है। संस्कृत को राष्ट्र भाषा घॊषित कर उसको उसकी खॊई हुई गरिमा लौटाने का यही सही समय है। क्या सरकार इस दिशा में काम करेगी?

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