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एक सैनिक की पत्नी की और से महबूबा मुफ़्ती से जवाब मांगता हुआ दर्द भरा पत्र!!!!

 

मैडम मुफ़्ती

मैं सशस्त्र बलों के एक परिवार की चौथे पीढ़ी की सदस्य हूं जिसका विवाह भी एक चौथी पीढ़ी के सशस्त्र बलों के परिवार में हुआ है और इसलिए, इससे पहले कि मैं अपना पत्र शुरू करूं , मैं आपके ध्यान में लाना चाहूंगी कि आज मैं जो कुछ भी कह रही हूँ वो गहरी सोच और गहरी पीड़ा से परिपूरन होते हुए व्यक्त कर रही हूँ कि कैसे हमारे बहादुर पुरुषों और महिलाओं का आपके राज्य में नागरिक प्रशासन द्वारा तिरस्कार किया जा रहा है।

एक भारतीय नागरिक की तरह नही बल्कि एक सैनिक की पत्नी के रूप में आज आपको मैं पत्र लिख रही हूँ|मैं जानना चाहती हूँ की कि अनगिनत बार देश ने हमारे सैनिकों से अपनी प्रभावशीलता और मानवता के संबंध में साक्ष्य की मांग की है, लगातार सैनिकों को घाटी में निराशा, तनाव और अवाम की जिल्लत सहनी पड़ रही है|तो घाटी में एक राजनीतिज्ञ और वर्तमान मुख्यमंत्री के रूप में आपका क्या योगदान है ये सुनिश्चित करने में की सेना का वैली में अच्छे से ध्यान रखा जाए,उनके लिए हर सहूलत मुहया करवाई जाए जिससे उनका भी हौंसला दुगुना हो|

आपने उस अवाम को समझाने के लिए या सिर्फ सलाह देने के लिए ही क्या कदम उठाए हैं जिन्होंने कोई कसर नही छोड़ी शहीद उम्र फयाज्ज़ की तुलना एक खूनी आतंकवादी बुरहान वानी के साथ करने में? क्या ये उस इंसान का तिरस्कार नही है जिसने मातृभूमि के लिए परम बलिदान किया है?

मैं आपको और जम्मू-कश्मीर की सरकार को विस्तार से पूछना चाहूंगी की  राज्य पुलिस ने कितनी एफआईआर दायर की थी जब 2017 के शुरुआती महीनों में ऑपरेशन क्लीन अप की शुरुआत  उल्लिखित घाटी में शांति लाने के लिए की गयी थी?

क्या यह तब सुविधाजनक था की सशस्त्र बलों को अपना काम करने की अनुमति दी जाए क्यूँ की कि आपका नाजुक राजनीतिक कैरियर तब उसपे टिका था? या क्या अब एक पूरी रेजिमेंट पर मुकदमा चलाना आसान है क्योंकि आप पथार्बाज़ों का दिल जीतना चाहती है|

मैं आज आपसे उन सभी महिलाओं के बिनाह पे उत्तर ढूंढ रही हूँ जो अपने प्रियजन से और घाटी में उतार चड़ाव की  घटनाओं से बहुत दूर बैठी है की क्या उनके अपने ग्रेनेड और पत्थर दोनों से सुरक्षित हैं, तो की ओर से? और जब वे निरंतर आपकी और देख रही है तो  मुझे पता होना चाहिए कि क्या आप उनकी देख रहे हैं? क्योंकि, जाहिर है, 27 जनवरी के बाद से घटनाओं इस और इशारा कर रही है की  राज्य सरकार वर्दी में हमारे पुरुषों और महिलाओं जो देश और जम्मू कश्मीर की सेवा कर रहे है उनके समर्थन को तैयार नही है| कुछ महीने पहले मेजर गोगोई थे, आज मेजर आदित्य है , कल को हमारे पति या भाइयों में से कोई भी हो सकता है। हम फिर क्या करेंगे?

मैडम क्या कभी आपके मन में ये बात खटकी की  मेजर गोगोई, के खिलाफ जब केस किया गया वो चुनाव की ड्यूटी दे रहे थे और कश्मीरी लोगों के मतदान के अधिकार का बचाव कर रहे थे?वे हिंसा को  भड़काने से रोक रहे थे तांकि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के संचालन के रास्ते में कोई न आ सके| मेजर आदित्य जिनको, एफआईआर में एक “कातिल” करार दिया जा रहा है वै, एक ऐसे अधिकारी है जो अपने कार्यकाल में जैश-ए-मुहम्मद के चार आतंकवादियों को मार कर अपनी क्षमता साबित कर चुके है|

आपके राज्य के पत्रकारो और राजनेता इन्हें बलात्कारी और हत्यारे बुलाने के लिए हमेशा कूद पड़ते है, लेकिन फिर आप इन “हत्यारे” की और मुहं उठाये क्यूँ चले आते है जब झेलम में पानी उमड़ पड़ता है  और आंतक का साया मंडरा रहा होता है ? क्या आप कृपया मुझे समझाएं कि सियाचिन में हमारे “तर्कहीन” पुरुष क्या कर रहे हैं, जहां प्रकृति भी नही है?

हमारे सैनिक स्वयं की चिंता के बिना राष्ट्र की सेवा करते हैं|हमारे सैनिकों के लिए गर्व की बात है की वे भारत की गरिमा की सेवा और उसकी रक्षा करने के लिए तत्पर है लेकिन आप भारतीय सेना के एक अधिकारी के खिलाफ मुकदमा चलाकर किस तरह का उदाहरण स्थापित कर रहे हैं, जिन्होंने अपने सैनिकों के जीवन को बचाने के लिए ही कार्य किया है? पुलिस ने कैसे उन पत्थरबाजों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की है जिसके कारण सरकारी संपत्ति और कर्मियों को भारी नुकसान पहुंचा है?

क्या आपको लगता है कि आप जेसीओ की पत्नी को जवाबदेह हैं, जिनके सर पार वार किया गया है और जिन्हें लगभग जला ही दिया गया था? क्या एक पत्थरबाज और हिंसा उकसानेवाले युवा घटी के लिए ज्यादा जरूरी है उन सैनिक से जो कि घाटी में रोज़मर्रा के जीवन की रक्षा और सशक्त बनाने  की कोशिश करता है भले ही स्वयं खतरे में आ जाए? मैं यह जानना चाहूंगा कि क्या रचनात्मक सामाजिक उत्थान के लिए आपका योगदान क्या है है? यह वही भारतीय सेना है, मैडम, जिसने एक मुठभेड़ के अंत में एक आतंकवादी को निकाला और खुद पर वार होने के बावजूद उन्हें अस्पताल लेके गयी। क्या आप ये भूल गयी है|

सैनिकों की निस्वार्थ सेवा और राष्ट्र के लिए अद्वितीय प्रतिबद्धता के बारे में क्या है जो आपके प्रशासन को  डराता है| मैं आपको याद दिलाना चाहती हूं कि यह सशस्त्र सेनाओं की निरंतर उपस्थिति और कार्रवाई का परिणाम है जो पर्यटन घाटी में वापसी करने में कामयाब रहा है,  जो आपकी अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा है|

मैं आपको बताना चाहती हूँ मैडम की इसके लिए बेहद हिम्मत की जरूरत है जो हम महिलाए हर रोज करती है ये जानने के लिए की हमारे पति कैसे है इसी डर से ही की कहीं किसी दिन वो फ़ोन न आ जाए.. इसलिए, मुझे आपसे जानना है की कि आप उन महिलाओं और उनके प्रियजनों से क्या कहना चाहेंगी की आपकी कार्रवाई की वजह से ऐसा हुआ है|

मैं वास्तव में राज्य के प्रशासन से जानना चाहती हूँ कि आप 70,000 से अधिक उन सैनिकों जिन्होंने ऑपरेशन राहत को सफल बनाया है उनको क्या जताना चाहती है की उनका प्रयास,उनकी कड़ी मेहनत इन 2000 पत्थरबाजों को लुभाने के तुम्हारे प्रयास के सामने कुछ नही है जिन पथार्बाजों का ये भरोसा नही की कल को फिर वे किसी पुलिसकर्मी को मार कर के मस्जिद के बाहर फैंक दे क्यूंकि वे जानते है की सरकार उनके जानलेवा मंशा को समझता है पर इन सैनिकों की मंशा को नही समझता जो दिन रात देश की सेवा में तत्पर है|

इन लोगों की भी सीमाओं से परे एक जीवन है, उनके पास परिवार और स्वयं की आकांक्षाएं हैं। और मैं आपसे ये जवाब चाहती हूँ की आप कैसे सोच सकती हैं की वो आपकी रक्षा करे जब आप उसे उसके खुद की और उसके साथियों की रक्षा के लिए कदम उठाने नही देते है|

आप केंद्रीय गृह मंत्रालय को लिखने की जरूरत महसूस करती है अगर एक आतंकवादी पर तिहाड़ जेल में यातनाएं की जाती है, लेकिन क्या आपने एक हार्दिक पत्र कप्तान सौरव कालिया के पिता को लिखना जरूरी समझा है जिस पर यातनाएं दीं गईं और जिसको मारा गया था पर फिर भी वै आखिरी सांस तक देश के प्रति वफादार रहते हुए लड़ता रहा?

मैडम, आपको अपनी अंतरात्मा को जगाने की जरूरत है और मैं आशा करती हूँ की अगली बार जब आप पर्याप्त सुरक्षित एक राजनीतिक रैली पर बाहर उद्यम करने के लिए जायेंगी तो उन सैनिकों का धन्यवाद करेंगी जिनकी वजह से आप सुरक्षित हो न की उस पर बरसना और चड़ना शुरू कर देंगी| यह वास्तव में शर्मनाक ‘है कि आप एक पैशाचिक भीड़ के लिए एक अधिकारी पर मुकदमा चलाने का चयन कर रही है। अब आपको हमें जवाब देना होगा|

मुझे आशा है कि आप जल्द ही इस बात को समझेगी ।

 

जय हिंद

मालवीका एस लांबा

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