राजनीति

क्या साइबेरिया के पॊर-बाजिन को भगवान कृष्ण ने बनाया था? क्या पॊर- बाजिन का संबंध महाभारत से है?

क्या दूर दराज़ देश साइबेरिया में स्थित पोर बाजिन ही कृष्ण की द्वारका है? इसका साक्ष्य स्पष्ट रूप से अब तक नहीं मिला है लेकिन जानकार मानते हैं कि महाभारत में उल्लेख द्वारका शायद साइबेरिया में पाई गयी पोर बाज़ैन हो सकता है। संस्कृत के अनुसार साइबेरिया का अर्थ है सुंदर भूमी। संस्कृत के ‘सुपुरम’ शब्द से साइबेरिया का उत्पन्न हुआ है। पुराणॊं के अनुसार ऋग वेद की रचना आर्कटिक में किया गया था। साइबेरिया के लोग आज भी वैदिक अयूर देवताओं की पूजा करते हैं। जानकार मानते हैं कि आज की बाईकल इंद्र की अमरावती थी, और बाईकल सरॊवर वैकानसा तीर्थ कहा जाता था।

उरल पर्वतावली में स्थित नरॊदन्य पर्वत को नारद पर्वत कहा जाता था जहां अब उयगर लोग रहते हैं। रूस में पाई गयी आरकैम नामक पुरानी संरचना वैदिक मंडल के अनुसार ही बनाया गया है। माना जाता है कि मृत्यु के देवता यम ने आरकैम में एक मंदिर बनवाया था। कहते हैं कि उयगर लोग भगवान राम के काल से ही थे। भारत के पुराणॊं में प्रास्तावित सात नदियां रूस में भी पायी जाती हैं। भगवान कृष्ण के पुत्र प्रद्युमन ने इस भूमी पर आधिपत्य स्थापित किया था। पुराणॊं के अनुसार हिमालय के उत्तर के भूभाग को ‘उत्तर कुरु’ नाम से जाना जाता था। यह सर्व वेद्य है कि सनातन धर्म पूरे भूमंडल में फैला हुआ था। समूचे जंबूद्वीप में ही सनातन धर्म की स्थापना हुई थी।

हम सब जानते हैं कि जरासंध के निरंतर आक्रमण से बचने के लिए कृष्ण ने द्वारका नगरी की स्थापना की थी। आज हम गुजरात के समीप समुद्र में डूबी हुई नगरी को द्वारका मान रहे हैं। लेकिन हॊ सकता है कि श्री कृष्ण ने अपनी जनता को सुरक्षित रखने के लिए कहीं दूर जाकर एक नगर की स्थापना की हो जहां तक जरासंध नहीं पहुंच पाये। साइबेरिया में रूस के पुरातत्व संस्था द्वारा खॊजी गयी यह पॊर-बाजिन एन केन प्रकारेण द्वारका जैसी ही है। चारॊं ऒर पानी से घिरे हुए इस किले का निर्माण मिट्टी और पत्थरॊं से किया गया है।

विभिन्न प्रकार के प्राचीन भारतीय स्रोतों के अनुसार, श्री कृष्णा के पुत्र प्रद्युमन ने वर्तमान भारत के उत्तर में यदुकुल साम्राज्य का विस्तार किया था। कुछ इतिहासकारॊं का मानना है कि आज का किर्गिस्तान एक एशियाई गणराज्य था जिसका उल्लेख महाभारत में हुआ है। भीष्म पितामह ने अपने भाई विचित्रवीर्य के विवाह के लिए इस साम्राज्य की कन्यायें अंबा, अंबिका और अंबालिका का अपहरण किया था। आश्चर्य की बात है कि आज भी यहां वर द्वारा शादी करने के लिए दुल्हनों को अपहरण करने की यही प्रथा किर्गिस्तान में प्रचलित है!

अनुमान है कि पुरुवंश के प्रथम राजा के काल में उत्तर कुरु और कुरु एक ही साम्राज्य का हिस्सा हुआ करते थे। इस उपलक्ष्य से प्रस्तुत साइबेरिया मॆं स्थित पोर-बाजिन उस काल में कृष्ण द्वारा बनाई गयी द्वारका हो सकती है। पोर-बाजिन का किला दस मीटर लंबा है, और 3.5 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। साइबेरिया के मंगॊलिया के सीमा पर स्थित यह किला तेर-खोल नामक सुरम्य झील के बीचों बीच बनाया गया है। पुरातत्वविदों ने किले की दीवारों के अंदर 27 आवासीय और नौकरों के आवास के कमरों की खोज की है। किले के मध्य भाग में दो इमारतों के अवशेष पाए गए हैं, जो अग्नि में जल कर नष्ट हुए हैं।

आज तक इस किले से जुड़े हुए रहस्य से पर्दा नहीं हटाया गया है। झील के बीचों बीच दस मीटर ऊचीं दीवार के अंदर एक भूल भुलैया जैसे शहर का निर्माण किसने और किस लिए किया है इस बात का पता नहीं चला है। इसके अंदर कौन रहता था, प्राचीन काल में हजारॊं टन मिट्टी और ईंटॊ द्वारा इतने भव्य और सुंदर किले का निर्माण किस प्रकार किया गया था इसका उत्तर किसी के पास नहीं है। बाईकल में किये गये उतखनन में संस्कृत के शिलालिपी मिली है। आज भी उत्तर कुरु यानी साइबेरिया में साक, बुर्यत और यकुट नामक समुदाय है जो भारत के साक, भरत और यादव समुदाय के वंशज माने जाते हैं। अनुमान है कि यही यादव कालांतर में हीब्रू, फोनीशियन और यहूदी बन गए ।

यह तो निश्चित है कि सनातन धर्म ही सभी धर्मों की जननी है और पुराण के जंबूद्वीप में सनातन धर्म का उगम हुआ था। प्राचीन भारत या आर्यावर्त पूरे जंबूद्वीप में फैला हुआ था। और संपूर्ण जंबूद्वीप में ही चतुर्वेद, उपनिषद, रामायण और महाभारत की रचना की गयी थी। पुराण में उल्लेख आर्यावर्त और आज के भारत में अंतर है। आज भारत सिमट कर एक छॊटा सा भूभाग बन गया है, लेकिन पुराण काल में निश्चित ही वह समूचे जंबूद्वीप में फैला हुआ था। समय के पहिये को घुमाकर वस्तु निष्ठता से सत्य की खॊज करेंगे तो सत्य का पता चल जायेगा।

Source
Ramani's blogRamani's blog
Tags

Related Articles