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पाकिस्तान को करारा झटका :पहले भारत, फिर अमरीका और अब अफगानिस्तान ने भी छोड़ दिया साथ

 

आतंक की फेक्टरी पाकिस्तान हर तरफ़ से पिटता हुआ नज़र आ रहा है। पाकिस्तान की तरफ़ कड़ा रूख अपनाते हुए भारत ने सबसे पहले “आतंकिस्तान” से सारे रिश्ते तोड़ दिये थे। उसके बाद अमरीका ने भी पाक को दी जाने वाली आर्थिक सहायता पर रॊक लगाई थी। अब पाकिस्तान का पड़ोसी देश अफगानिस्तान भी पाक की काले करतूतॊं से तंग आ चुका है। इसी के चलते अफगानिस्तान ने अपने कार्गो यातायात को कराची बंदरगाह से ईरान के बंदर अब्बास और चाबहार बंदरगाहों में स्थानांतरित कर दिया है। सूत्रॊं के मुताबिक अफगानिस्तान ने 80 प्रतिशत कार्गॊ यातायात को पाकिस्तान से स्थानांतरित कर दिया है जो पाक के लिए नुकसानदाई है।

अफगानिस्तान का कहना है कि उसने महसूस किया है कि पाकिस्तान उसके साथ संबंधों को बेहतर बनाने की बजाय तालिबान को सहायता देकर उसे और बढ़ावा देने में ज्यादा उत्सुकता दिखा रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान की यातायात नीती में बदलाव का फैसला पाकिस्तान के व्यापार शुल्क को लागू करने के कदम से शुरू हुआ था। काबुल के इस बड़े कदम से अफगान के सामग्रियों के पारगमन में इस्लामाबाद की भूमिका को कम करने की संभावना तो है ही साथ ही साथ पाकिस्तान पर अफगानिस्तान की निर्भरता को कम करने की मनशा भी छुपी हुई है।

तात्पर्य है कि अफगानिस्तान अपने पड़ोसी देश के चंगुल से छूट कर उसके ऊपर की अपनी निर्भरता कम करके ईरान की तरफ़ ज्यादा झुकाव दिखा रहा है। भारत में विरॊधी दल मॊदी जी के कूट नीती और उनके विदेशी यात्रा को लेकर उनपर हमेशा टीका टिप्पणी करते हैं। मॊदी जी विदेश यात्रा छुट्टी मनाने के लिए नहीं जाते। ईरान के साथ अपने संबंधॊ को सुधार कर मॊदी जी चाबहार बंदरगाह निर्माण कार्य में भारत की ऒर से सहायता कर रहें हैं। पाकिस्तान की ऊपर भारत की यातायात की निर्भरता को एक झटके में काट कर अरब देशॊं से सीधे यातायात के संबंध बनाने के लिए ही चाबहार बंदरगाह के निर्माण कार्य में भारत सहायता कर रहा है।

अब इसका लाभ अफगानिस्तान भी उठाने जा रहा है। आने वाले समय में अन्य देशों की भी इस बंदरगाह को अपने यातायात के लिए उपयॊग करने की संभावना ज्यादा है जिससे पाकिस्तान को बड़ा झटका लगने वाला है। इसलिए मॊदी जी को मास्टर स्ट्रॊक वाले खिलाड़ी कहते हैं। भारत चाबहार बंदरगाह में नई टर्मिनल, कार्गो बर्थ और अफगानिस्तान में सड़कों और रेल लाइनों को जोड़ने के लिए 500 मिलियन डॉलर का निवेश कर रहा है जिससे भारत को यातायात के लिए पाकिस्तान पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा। केवल भारत ही नहीं, रूस, ईरान और अरब के अन्य देश भी पाकिस्तान के सड़क यातायात के बदले चाबाहार बंदरगाह द्वारा यातायात करना ज्यादा फायदे मंद समझते हैं। अब अफगानिस्तान और भारत की बढ़ती दोस्ती से पाकिस्तान नाखुश है। भारत ने भारतीय बाजार को अफगान व्यापारियों को अधिक से अधिक पहुंच प्रदान करने के लिए एक एयर क्राफ्ट कॉरिडोर का निर्माण करना भी शुरू किया है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ गया है, जिससे सबसे अधिक नुकसान पाकिस्तान को हो रहा है।

दूसरी ओर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के संबंध में दरार पड़ चुका है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच का व्यापार वर्तमान वित्त वर्ष में 2 अरब डॉलर घट गया है। द्विपक्षीय व्यापार आवागमन वर्तमान में करीब 500 मिलियन डॉलर है। पाकिस्तान के साथ अफगानिस्तान के संबंध में हाल के वर्षों में गिरावट दर्ज की है। पिछले हफ्ते, काबुल ने कहा था कि हाल ही में हुए आतंकवादी हमलों में पाकिस्तान की भागीदारी का सबूत अफगानिस्तान को प्राप्त हुआ है। काबुल का कहना है कि उसने अधिकारियों की एक टीम भी इस्लामाबाद भेजी थी था तांकि वे साक्ष को पाकिस्तान के अधिकारियों तक पहुंचाये।

मॊदी जी ने पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान के आतंक प्रेम का परदा फाश किया है। भारत की बातॊं पर अब अन्य देश न केवल विश्वास कर रहें है अपितु पाकिस्तान से एक एक कर अपने रिश्ते भी तोड़ रहें हैं। वहीं दूसरी ऒर भारत दुनिया के सभी देशॊं से अच्छे संबंध बनाकर अपने और अन्य देशों के विकास में संपूर्ण यॊगदान दे रहा है। अब वह दिन दूर नहीं कि भारत एक बार फिर विश्व गुरू बनेगा। भारत को विश्व गुरू बनाना है तो बार बार मॊदी सरकार लाना है।

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