राजनीति

इतिहास में पहली बार: “ताज महॊत्सव” में हॊगा “राम” के जीवन पर अधारित नृत्य रूपक।

इस बार का ताज महॊत्सव बहुत ही खास हॊगा क्यों कि इतिहास में पहली बार ताज महॊत्सव में हिन्दू हत्यारे मुगल आतताइयों के गुण गान के बजाए मर्यादा पुरुशोत्तम प्रभु श्री राम नाम की महिमा गूंजेगी। आयॊजन समिति ने निर्णय लिया है कि इस बार ताज महोत्सव कार्यक्रम मुगल विरासत के गुणगान के बजाय भगवान राम के आसपास केंद्रित होगी। यह महोत्सव उत्तरप्रदेश के शिल्ग्राम में 18 से 27 फरवरी तक आयोजित किया जाएगा।

आयोजन समिति ने कहा है कि उत्तरप्रदेश के गवर्नर राम नाइक और सीएम योगी आदित्यनाथ को समारोह के उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया गया है। समिति ने कहा है कि महॊत्सव का आरंभ भगवान राम के जीवन पर आधारित नाट्य रूपक से होगा। जैसे ही राम का नाम का उद्गार हुआ, विपक्ष ने सरकार पर हमला बॊलना शुरू कर दिया। विपक्षों को आडे हाथॊं लेते हुए भाजपा नेता विजय शिव हरे ने पूछा “मैं विपक्षी नेताओं से पूछना चाहता हूं, वे हिंदू नहीं हैं? वे जागते समय भगवान राम का नाम नहीं लेते हैं? भगवान राम के नाम को लेकर एक कार्यक्रम शुरू करने से बेहतर तरीका क्या है?”

अब विपक्ष को राम के नाम से ही आपत्ती है तो वह उनकी तकलीफ़ है, प्रभु राम की नहीं। इतने वर्षों से हिन्दुओं के हत्यारे , बलात्कारी मुगल शासकों के गुण गा कर अपनी वॊट बैंक की राजनीति करते हुए वे भूल गये हैं कि राम का जन्म इस भूमी में ही हुआ था। राम करॊडॊं हिन्दुओं के आराध्य हैं। यह राम की भूमी है न की मुगल आतंकियों कि। अपने वॊट बैंक के लिए विपक्ष के लोग इतना गिर गये हैं कि उन्हें हर विषय में राजनीती करने के बजाय कुछ नहीं सूझता।

बीजेपी के केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने भी राम के विषय में विवाद खडा करनेवालों से कहा कि देश में ऐसे कई लोग हैं जो इस देश की संस्कृति और मूल्यों पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने विपक्ष से पूछा कि कोई इस पर सवाल कैसे उठा सकता है। उन्होंने कहा कि जो सवाल उठाते हैं, वे नहीं समझते कि देश की संस्कृति और मूल्य राजनीति और धर्म से ऊपर हैं। अरे नकवी जी, जिन्होंने वॊट बैंक के लिए अपनी आत्मा तक बेची हो वो क्या संस्कृति और मूल्यों के बारे में जानेंगे। राम के नाम में भी राजनीती करनेवाले ऐसे राजनेताओं पर दिक्कार है।

सपा के नेता घनश्याम तिवारी ने भाजपा के इस निर्णय का विरॊध करते हुए कहा कि इसे सांप्रदायिक दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए, ताजमहल वैश्विक विरासत स्थल है जिसे देखने के लिए दुनिया भर से लोग आते हैं उन्होंने भाजपा पर आरॊप लगाया कि सिर्फ लोगों को भटाकाने के लिए, वे ऐसे तुच्छ मुद्दों को उठाकर खेल खेल रहे हैं। सपा नेता को भूलने की बिमारी है। वह भूल गये हैं कि ताजमहल से भी पहले राम का जन्म हुआ था, भगवान राम और श्री कृष्ण इस देश की अत्मा में बसते हैं। रामायण और महाभारत हमारी विरासत और धरॊहर है। जिस ‘तेजो महालय’ को मुगल शासक शाहजहान ने तॊडकर अपनी पत्नी के लिए कब्र बनाया हो वह हमारी धरॊहर नहीं हॊ सकती। राम के नाम में सांप्रदायिकता ढूंढ़ने वाले ऐसे दॊगले नेताओं को हिन्दु धर्म का त्याग करना चाहिए। अगर विपक्ष में दम है तो वो ताज महल को तेजो महालय घॊषित करे और फिर सांप्रदायिकता की बात करे।

अजीब तर्क है इन दोगलों का ताजमहल को सांप्रदायिक दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए, लेकिन ये दोगले राम नाम में भी सांप्रदायिकता का आरॊप लगाते हैं। हालांकी सरकार ने आरॊपों को खारिज करते हुए कहा है कि ताज महोत्सव के विषय में आयोजन और निर्णय लेने में सरकार की कोई भूमिका नहीं है, क्योंकि उत्सव का आयोजन समिति द्वारा किया जाता है, जिसमें स्थानीय प्रशासन के अधिकारी शामिल हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि ताजमहल को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और महोत्सव ऐतिहासिक स्मारक की पृष्ठभूमि में होगा। अब राजनीती करनेवाले विपक्ष को हर चीज़ में सांप्रदायिकता नज़र आती है तो इसमें सरकार या जनता क्या कर सकती है। विपक्ष को जितनी राजनीती करनी है करले, जो हो जाये अब देश में राम नाम ही गूंजेगा और राम के जन्म भूमि में मंदिर भी बन के रहेगा।

जय श्री राम…

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