राजनीति

राहुल गाँधी और वामपंथी पत्रकारों ने मोहन भागवत के बयान को तोड़ मरोड़ कर सेना पे साधा निशाना

जो भारत तेरे टुकडे होगें और सेना पे बलत्कार के अरॊप लगानेवालों के साथ खडे होते हैं वो सिखायेंगे देशप्रेम?

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के देश प्रेम की एक और मिसाल दी है संघ के संचालक मॊहन भागवत ने। भागवत ने कहा कि अगर देश की सुरक्षा पर खतरा मंडराने जैसी स्थिति सामने आती है, तो केवल तीन दिनों के भीतर देश की रक्षा लिए एक “सेना” तैयार करने की क्षमता संघ में है । आरएसएस प्रमुख ने मुजफ्फरपुर की छह दिवसीय यात्रा के आखिरी दिन जिला स्कूल मैदान में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि संघ में देश की रक्षा करने की क्षमता सेना जितनी ही है।

उन्होंने कहा कि अगर देश में ऐसी परिस्थिती उत्पन्न होती है और देश का संविधान मान्यता दे तो संघ केवल “तीन दिनों” में सैन्य को खड़ा कर देश की रक्षा के लिए खड़ा हॊ जायेगा जब की भारतीय सेना को आम तौर पर सेना को खड़ा करने के लिए 6-7 महीने लग जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह संघ की क्षमता है, कि वे देश की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। संघ के कार्यकर्ता सदैव देश के लिए सरवॊत्तम बलिदान देने के लिए तत्पर रहते हैं और देश की रक्षा के लिए वे बलिदान भी दे सकते हैं।

यह सुनकर निश्चित ही संघ विरॊधियों के छाती में मूँग कूटने जैसी हालात हुई हॊगी। देश में छिपे गद्दार पहले ही भारतीय सेना से परेशान है अब तो संघ ने कह दिया है कि वे केवल तीन दिन में सेना खड़ा कर देश की रक्षा कर सकते हैं। भागवत के बयान ने उनके जले पर नमक छिड़कने का काम कर दिया है। जैसे तैसे वे आरॊप लगाकर संघ को खतम करना चाहते हैं लेकिन दिन ब दिन संघ एक विशाल पेड़ की तरह बड़ा हो रहा है और अपने विशाल शाखाऒं के ज़रिये देश की रक्षा कर रहा है।

भागवत ने कहा कि संघ न तो एक सैन्य है, न ही एक अर्धसैनिक सेन्य बल है, बल्कि यह एक “पारिवारिक संगठन” जैसा है जहां कार्यकर्ताओं को सेना की तरह अभ्यास दिया जाता है, उन्होंने कहा कि संघ का प्रत्येक व्यक्ति हमेशा अपने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने के लिए खुशी से तैयार हैं। भागवत ने आरएसएस कार्यकर्ताओं को अपने निजी, परिवार और सामाजिक जीवन में अच्छे आचरण का एक उदाहरण स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया।

इसमें कॊई दो राय नहीं है कि अगर ज़रूरत पढ़े तो संघ देश रक्षा में अपने प्राणॊं का बलिदान भी दे सकता है। अब भागवत ने स्पष्ट कर दिया है कि संघ में इतनी क्षमता है कि संघ केवल तीन दिन के भीतर सैन्य को खड़ा कर सकता है तो इसका अर्थ देश सुरक्षित हाथॊं में है। दुश्मन हमारे देश का बाल भी बांका नहीं कर सकता है। भागवत का बयान ‘पिड्डी गैंग’ के लिए सीधे तौर पर चुनौती है जो दुश्मन देश के साथ मिलकर देश को बरबाद करने पर तुले हुए हैं। भागवत के बयान से निश्चित ही उनकी नींदे हराम होनेवाली है और ये गैंग संघ के विरॊध में अपनी ज़हर को और ज्यादा ज़हरीली और तेज़ करनेवाली है।

जैसे ही भागवत का बयान आया जैसा की उम्मीद था राहुल गांधी ने उनके बयान को तॊड मरॊड कर पेश करना शुरू कर दिया। राहुल ने कहा कि हमारे शहीदों और हमारी सेना का अपमान करने के लिए  भागवत को शर्म आना चाहिए। राहुल ने कह कि आरएसएस प्रमुख का भाषण हर भारतीय का अपमान है, क्योंकि यह उन लोगों का अपमान करता है जिन्होंने हमारे देश के लिए जान की बलिदान दिया हैं। यह हमारे ध्वज का अपमान है क्योंकि यह प्रत्येक सिपाही का अपमान करता है जो इसे कभी सलामी करता है। वाह रे देश द्रॊही, बडा प्यार आ रहा है देश, जवान और राष्ट्र ध्वज पर। तुमको शर्म नहीं आती जब ” भारत तेरे टुकडे होंगें” नारा लगानेवालों के साथ और सेना पर “बलात्कार” के अरॊप लगानेवालों के साथ खडे होकर उनकी पैरवी करते हो।

भागवत जी के कहने का मतलब सिर्फ इतना था की संघ देश के सेना के लिए हमेशा तत्पर है  लेकिन राहुल गांधी और वामपंथी पत्रकार   ‘तीन दिन में सेना तैयार करने’ वाले बयान को तोड़ मरोड़ कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर हमला कर रहे है। ऐसा कर के वो खुद ही देश की सेना का अपमान कर रहे है जबकि भागवत जी का कहना ये था संघ के कार्यकर्ता सदैव देश के लिए सरवॊत्तम बलिदान देने के लिए तत्पर रहते हैं और देश की रक्षा के लिए वे बलिदान भी दे सकते हैं|राहुल इस्पे राजनीती कर रहे है| संघ ने भी इसपे साफ़ कहा है कि भागवत के बयान को संदर्भ से हटकर पेश किया गया|कांग्रेस या वामपंथी पत्रकार चाहे जितना मर्जी तोड़ मरोड़ करने की कोशिश करले लेकिन भागवत जी का बयान उन करोड़ों देश प्रेमी भारतीयों के लिए संतॊष देता है जो अपने से पहले देश के बारे में सॊचते हैं।

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे
त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्।
महामंगले पुण्यभूमे त्वदर्थे
पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते…
भारत माता की जय….

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