राजनीति

एनडीटीवी जो कभी मोदी जी के खिलाफ झूठा प्रचार प्रसार करता था आज उनके सामने ही खुद को बचाने की भीख मांग रहा है

वक़्त का खेल भी अजीब है....

15 साल पहले, भारत में एक चैनल था जो अपना अधिकाँश समय (24/7) तब तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का अपमान करने में बताता था। उन्होंने अपने राजनीतिक मालिकों की हिदायतों पर मोदी जी के खिलाफ झूठे प्रचार प्रसार करके ही अपनी किस्मत को चमकाया है। लेकिन वक्त का खेल भी अजीब है,कहते है न आज तेरा वक़्त है कल को मेरा भी आएगा|आज ये चैनल इतना लाचार होगया है की अब वै नरेंद्र मोदी जी से अपने आप को बचाने की भीख मांग रहा है।

आप समझ ही गये होंगे हम किस की बात कर रहे है| बिलकुल आपकी अपेक्षा के अनुसार ये है एनडीटीवी| और कल एनडीटीवी समूह के चेयरमैन जेम्स प्रणय रॉय ने एक ऐसा काम किया है जिससे आपको बहुत हैरानी होगी| प्रणय रॉय ने कल प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है जिसमे वे मोदी जी के आगे गिड़गिड़ा रहे है कि काले धन को सफ़ेद करने के जो उन पर मामले है उन सभी मामलों की जांच से एनडीटीवी को निजात दिला दी जाए। पत्र में, उन्होंने डॉ। सुब्रमण्यम स्वामी पर एनडीटीवी की काले धन को सफ़ेद करने की संदिग्ध गतिविधियों को उजागर करने के लिए दोषी ठहराया है और पीएमओ से अनुरोध किया है कि वे ईडी और आयकर विभाग द्वारा हो रही जांच को रोक दें।

पत्र में, जेम्स रॉय ने एनडीटीवी की प्रतिष्ठा को भारत की प्रतिष्ठा के बराबर बताया है और परोक्ष रूप से प्रधान मंत्री को धमकी दी गई है कि अगर भारत एनडीटीवी के खिलाफ जांच जारी रहेगी तो भारत को  इसका नतीजा भुगतना पड़ेगा।

डॉ। स्वामी ने एनडीटीवी के साथ संदिग्ध लेनदेन के लिए अमेरिकी संगठनों जीई और एनबीसी पर आरोप लगाया था। उन्होंने आयकर और प्रवर्तन निदेशालय से संबंधित दस्तावेज भी जमा कराए थे जिनके आधार पर विभाग जांच कर रहा था। ऐसा कहा जाता है कि आईटी और ईडी एक बड़ी मात्रा में सबूत इकट्ठा करने में सक्षम हुए जिनसे ये ज्ञात होता है की एनडीटीवी विदेशी कंपनियों के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल था जो फेमा (विदेशी मुद्रा और रखरखाव अधिनियम) के तहत गंभीर उल्लंघन था। नियमों का उल्लंघन करने के लिए एनडीटीवी पर 2030 करोड़ रूपए का जुर्माना लगाया गया था। एनडीटीवी के मालिकों जेम्स प्रणय रॉय और उनकी पत्नी पर कुछ साल पहले एनडीटीवी शेयरों को अपने व्यक्तिगत खातों में लिप्त करने के लिए उन पर मामला दायर किया गया था। विदेश में फर्जी कंपनियों के बेनामी लेनदेन में उनकी भागीदारी भी डॉ। स्वामी द्वारा सामने लायी गयी थी, जिसके लिए बेनामी संपत्ति अधिनियम 2016 के तहत उन पर मामला दर्ज किया गया था।

अब, जैसा कि एनडीटीवी के खिलाफ जांच गंभीर हो रही है और प्रणय रॉय गिरफ्तारी के करीब पहुंच रहा  हैं, उन्होंने माफी मांगने के लिए प्रधान मंत्री को लिखने का एक असाधारण प्रयास किया है। बेतुका ये है, की जिस तरह से उन्होंने अपने तर्क का दावा करते हुए कहा कि आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय, डॉ। स्वामी के दबाव में काम कर रहे हैं और वे इसे बदला लेने के कार्य के रूप में कर रहे हैं।

उन्होंने ये भी दावा किया है कि जीई और एनबीसी के सीईओ निर्दोष हैं और एनडीटीवी के प्रति उनके सभी निवेश वास्तविक और पारदर्शी हैं। उन्होंने अपने साथ बातचीत के आधार पर जीई और एनबीसी को प्रमाणन दिया की, “वे ईमानदार और बहुत अच्छे लोग हैं।” इसलिए … क्या हमें सिर्फ इसलिए इन लोगों पर विश्वास होना चाहिए कि ये लोग अच्छे हैं क्योंकि जेम्स रॉय उनके संपर्कमें रहे है और जानते है की वै कैसे है??? उन्होंने आरोप लगाया है आयकर और ईडी डॉ। स्वामी के आदेशों पर मुख्य कार्यकारी अधिकारियों पर गलत आरोप लगा रहे है।

जेम्स रॉय प्रधान मंत्री को धमकी देने की इस हद तक चले गए हैं कि एनडीटीवी या एनबीसी के खिलाफ कोई कार्रवाई भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को रोक सकती है| उन्होंने दावा किया है कि अगर एनडीटीवी की प्रतिष्ठा क्षतिग्रस्त होती है, तो भारत को भुगतान करना होगा!

प्रधान मंत्री को धमकी देने और आईकर और प्रवर्तन निदेशालय जैसे प्रतिष्ठित संस्था को डॉ। स्वामी के एजेंट कहने से पहले, जेम्स रॉय को यह याद रखना चाहिए कि मामला सबूतों पर आधारित था और न्यायालय ने मामले को सुनने के लिए स्वीकार किया क्योंकि यह विश्वसनीय था और इसलिए नही की  डॉ। स्वामी ने कहा। जब मामला समनुदेशित होता है, तो प्रधान मंत्री या किसी अन्य सरकारी अधिकारी को ऐसे पत्र लिखने से अदालत के नियमों का मूल उल्लंघन और सरकार द्वारा आईटी और ईडी पर दबाव डालने की ये बेताब कोशिश है और एक अपराध भी।

एनडीटीवी और उसके लोग जिन्होंने मोदी के खिलाफ झूठी ख़बरों का प्रचार प्रसार किया अब ये चाहते है की मोदी उनके खिलाफ इस मुक़दमे को खारिज करदे| प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मामले की जांच को प्रभावित करने की कोशिश के लिए जेम्स रॉय के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। रॉय इस वक़्त एक छोटे बच्चे की तरह रोते हुए और उसकी तरह बर्ताव करते हुए प्रधान मंत्री को डॉ। स्वामी के बारे में शिकायत कर रहे है। अगर रॉय ने कोई गलत काम नहीं किया है तो अदालतों में अपने ऊपर लगे आरोपों के बारे में जवाब दे,किस बात का डर उनको सता रहा है|

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