राजनीति

मोदी सरकार का मास्टर स्ट्रोक : ब्रेन ड्रेन को रोक कर ब्रेन गेन कर रहे हैं भारत के लिए इस प्रोजेक्ट की शुरुआत कर के !!

मोदी सरकार भारत के छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी लेके आई है|आज तक भारत में जितने भी छात्रवृत्ति कार्यक्रम चल रहे थे मोदी सरकार उन सब से सर्वेष्ठ कार्यक्रम लेके आई है|अब छात्रों को उनके खुद के देश में ही इस सहूलत को उपलब्ध करवाया जाएगा|उन्हें बहार के देशों की और रुख नही करना पड़ेगा| विदेशों में अनुसंधान छात्रवृत्ति लेने से रोकने के लिए मोदी सर्कार ने इस अहम कदम को उठाया है| मोदी सरकार मंत्रिमंडल ने आईआईटी, आईआईएसईआर और एनआईटी जैसे उच्च शिक्षा संस्थानों के छात्रों के लिए पीएम रिसर्च फेलोशिप (पीएमआरएफ) को मंजूरी दे दी है, जो आज तक का  देश का सबसे भव्य भुगतान छात्रवृत्ति कार्यक्रम है|

ये सिर्फ कहने में ही भव्य नही है| पीएमआरएफ के तहत सरकार ने मासिक छात्रवृत्ति में 70,000 रुपये से 80,000 रुपये और अनुसंधान के लिए चयन विद्वानों को 2 लाख रुपये वार्षिक का अनुदान भी शामिल हैं। केंद्र सरकार ने इन चैनित विद्वानों को तीन साल में खर्च करने के लिए 1,650 करोड़ रुपये आवंटित करने को मंजूरी दे दी है।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, “यह योजना देश के प्रतिभाशाली तत्वों को आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अत्याधुनिक रूप से अनुसंधान करने के लिए एक बेहद अच अवसर प्रदान करेगी।”

इस योजना के तहत अनुसंधान एक तरफ हमारे राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को संबोधित करेंगे और दूसरी और देश के प्रमुख शैक्षिक संस्थानों में गुणवत्ता संकाय की कमी को दूर करेगी और प्रतिभा पलायन का खात्मा करेगा और छात्रों को उन्ही के देश में रहने और पड़ने की और आकर्षित करेगा|

यह योजना 2018-19 शैक्षणिक सत्र से शुरू की जाएगी।उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम पात्रता 8.5 के संचयी ग्रेड बिंदु औसत (सीजीपीए) होगी। मंत्री ने कहा कि

इस योजना के तहत, आईआईएससी, आईआईटी, एनआईटी, आईआईएसईआर, आईआईआईटी में बी.टेक या एकीकृत एम.टेक या एमएससी के अंतिम वर्ष वाले छात्र या जिनकी पूरी हो चुकी है उन्हें आईआईटी और आईआईएससी में पीएचडी कार्यक्रमों में सीधे प्रवेश की पेशकश की जाएगी।

छात्र, जो पात्रता मानदंडों को पूरा करेगा और नामित किया जाएगा, को पहले दो वर्षों में 70,000 रुपये प्रति माह, तीसरे वर्ष में 75,000 रुपये प्रति माह और चौथे और पांचवें वर्ष के दौरान 80,000 रुपये प्रति महीने की पेशकश की जाएगी।

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और सेमिनारों पर शोध पत्र प्रस्तुत करने के लिए, विदेशी यात्रा के खर्चों को कवर करने के लिए पांच साल की अवधि में दो लाख रुपये के शोध अनुदान भी छात्रों को प्रदान किए जाएंगे।

इस योजना के तहत 1,000 वार्षिक छात्रवृत्तियों के अलावा, सरकार आईआईटी और आईआईएससी में अनुसंधान सुविधाओं को उन्नत करने की भी योजना बना रही है। यह मोदी सरकार का मास्टर स्ट्रोक है क्यूँ की बहुत से छात्र आईआईटी में पीएचडी से इसलिए पैर पीछे करते थे क्योंकि मासिक वेतनमान 25000 से भी कम था| साथ ही शोध के लिए अनुदान प्रदान करने से अनुसंधान परिणाम की गुणवत्ता में सुधार भी करेगा|

 

Tags

Related Articles