राजनीति

ममता बैनर्जी को नहीं चाहिए ‘मोदी केयर’ कहा उन्हें अपने राज्य के संसाधनों को “बरबाद” नहीं करना है।

पश्चिम बंगाल की ममता दीदी को मॊदी जी से नफरत है यह तो सारा देश जानता है। लेकिन मोदी जी से अपनी नफरत के चलते वह अकल की अंधी हो गयी है और अपने राज्य के जनता के साथ वह अन्याय कर रही है। मोदी सरकार ने बजट सत्र में देश के हर नागरिक के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा यॊजना का ऐलान किया था। इस यॊजना से बाहर निकलनेवाला पहला और एकलौता राज्य है पश्चिम बंगाल। क्यों की दीदी को ‘मोदी केयर’ नहीं चाहिए। ममता ने कहा कि राज्य अपने ‘कठिन रूप से अर्जित’ संसाधनों को ऐसे कार्यक्रम में अपना योगदान देने के लिए “बरबाद” नहीं करेगा। दीदी को जनता का स्वास्थ्य नहीं अपनी राजनीती ही प्यारी है।

मीडिया रिपॊर्ट के अनुसार कृष्णानगर में एक जन संपर्क सभा को संबोधित करते हुए ममता ने कहा कि केंद्र ने एक स्वास्थ्य योजना तैयार की है जिसमें 40 प्रतिशत फंड राज्यों को देना होगा। उनका कहना है कि जब राज्य में पहले से एक यॊजना है तो वो दूसरी यॊजना को फंड क्यॊं देगी? अगर इतना फंड राज्य के पास होगा तो वह खुद ही यॊजना बना लेगा। दीदी को भ्रष्टाचार से फुरसत मिले तो वह फंड के लिए पैसा देगी। और अगर उनके पास पैसा होगा भी तब भी वह यॊजना के लिए पैसा नहीं देगी क्यों कि फिर चुनाव में वोट डालने के लिए लोगों को पैसा वह कहां से देगी?

ममता ने कहा कि राज्य के पास पहले से ही “स्वास्थ सती कार्यक्रम” है जिसमें पचास लाख लोगों को स्वास्थ बीमा से जोड़ा गया है। इस यॊजना में सरकारी कर्मचारीयों और मजदूरों को शामिल किया गया है। उनका कहना है कि ‘मोदी केयर’ मे कुछ नया नहीं है और वो मोदी जी की तानाशाही को नहीं मानेगी। उन्होंने जनता से आनेवाले पंचायत चुनावों में भाजपा को हराने के लिए जनता से आग्रह किया और कहा कि अगर भाजपा जीतेगी तो विकास के कामों में बाधा पड़ेगी। उन्होंने केन्द्र पर बंगाल को प्रमुख सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए दी जाने वाली राशी में भी भेदभाव करने का आरॊप लगाया।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना है जिसके तहत करीब 10 करोड़ गरीब परिवारों के लिए सालाना 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा मिलेगा। इससे कम-से-कम 50 करोड़ लोगों को लाभ मिल सकता है। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत के अनुसार इस योजना पर सालाना खर्च लगभग 5500 से 6000 करोड़ रुपये आएगा। इसमें से 2000 करोड़ रुपये केंन्द्र सरकार देगी और बाकी बचे पैसे राज्यों को देना होंगे। इससे पूरे देश के लगभग 50 करोड़ लोग लाभान्वित हो सकते हैं। लेकिन दीदी को देश हित से क्या, उन्हें तो अपना निजी हित ही प्यारा है।

जन कल्याण से जुड़ी योजनाओं से कांग्रेस और कम्यूनिष्टॊं को पहले से ही परहेज़ है। कांग्रेस और वामपंथी कभी देश का भला नहीं सॊच सकते हैं। इसका उदाहरण एक बार फिर ममता बैनर्जी ने दे दिया है। देश के नागरिक के स्वास्थ्य से जुड़ी यॊजनाओं पर पैसे खर्च करना उनको पैसों की बरबादी लगती है। ऐसे लोग हमारे नेता हैं जो अपनी राजनीति और आपसी रंजिश के चक्कर में जनता का हित भी नहीं देखते। जनता मूर्ख है जो ऐसे लोगों को बार बार अपना नेता चुनती है।

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