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कैलाश मानसरोवर के अद्भुत रहस्य, मानसरोवर से होते है साक्षात शिव के दर्शन

कैलाश पर्वत के पास ही 14950 फीट की उंचाई पर 2 झीलें भी है जिसमे से एक को कैलाश मानसरोवर झील और दूसरी को राक्षश ताल कहा जाता है| ये दोनों ही झील एक दुसरे के बिलकुल आस पास है और ये दोनों ही झील एक दुसरे से एक पतली सी ज़मीन  से अलग है|मानसरोवर दुनिया की सबसे ऊँची साफ़ पानी की झील है जो सूरज की तरह गोल है जबकि राक्षश ताल समुंदरी पानी की झील है जो की चाँद की तरह दिखती है|

एक दुसरे के इतने पास होने के बावजूद भी ये दोनों झील एक दुसरे से बेहद अलग है|मानसरोवर का पानी हमेशा ही शांत रहता है जबकि राक्षस ताल का पानी हमेशा ही हवा से हिलता हुआ नज़र आता है| ये दोनों झीलें ऐसी है मानो की अच्छाई और बुराई को दर्शाती है|ऐसा माना जाता है की मानसरोवर का निर्माण स्वयं ब्रह्मा ने किया था और रावण ने राक्षस ताल में ही तपस्या करके भगवन शिव को प्रसन किया था|

हिन्दू धरम के श्रद्धालु रात को मानसरोवर के पास रुकते है और सुबह की पहली किरण को कैलाश पर्वत पर पड़ते हुए देखते है और ऐसा माना जाता है की उस समय आप को साक्षात शिव भगवान् के दर्शन होते है और आप जो भी मनोकामना मांगते हो वो पूरी हो जाती है|मानसरोवर में रुके हुए कई श्रधालुओं ने  इस बात का अनुभव भी किया है की रात को दो चमकती हुई रोशनियाँ हवा में तैरती हुई नजर आती है |

ऐसा माना जाता है की ये रोशनियाँ वो ऋषि है जो कैलाश मानसरोवर को पूजते है|कैलाश पर्वत को मानसरोवर से ही देखा और पूजा भी जाता है क्यूँ की कैलाश पर्वत पर चड़ा तो नही जा सकता और ऐसा माना जाता है की जब भी इस पर चड़ने की कोई कोशिश करता है तो पहाड़ अपनी दिशा को बदल देता है और पहाड़ चड़ने वाला गलत्त दिशा में चलने लगता है और अगर कोई पहाड़ के नज़दीक पहुंचने लगता है तो माना जाता है की चमत्कार होना शुरू हो जाता है या तो मौसम खराब होने लगता है या उसकी तबीयत खराब होने लगती है और इनमे से बहुत से लोग तो कभी वापिस भी नही लौटे यहाँ तक की उसके पास जाने से भी शरीर पर परिवर्तन होने लगते है|

वैज्ञानिकों ने भी अपने शोध में एक बेहद हैरानी जनक बात पायी है की कैलाश पर्वत के आस पास समय बहुत तेज़ी से बड़ने लगता है,शरीर के बाल और नाखून भी बहुत तेज़ी से बड़ने लगते है|वहां की हवा में उम्र बहुत जल्दी बड़ने लगती है पर आज तक ऐसे क्यूँ होता है इस राज़ को कोई नही समझ पाया| उस जगह को बहुत ही रेडियोएक्टिव  माना जाता है|

ये भी माना जाता है की मानसरोवर के पास सुबह मानसरोवर के पानी के उछलने की आवाज़ भी आती है|लेकिन जब कोई भी देखता है तो उसे पानी में कुछ नज़र नही आता| सप्तऋषि हर रोज़ इसी मानसरोवर में नहाने के लिए आते है और यहीं से भगवन शिव की समृधि भी करते है|

कैलाश पर्वत को पृथ्वी का केंद्र और शिव का निवास स्थान भी कहा जाता है पर कैलाश मानसरोवर वो जगह है जहां से आप भगवान् शिव के और भी पास आ सकते है|

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