राजनीति

कट्टर इस्लामिक देश ईरान में महिलाओं ने किया ‘हिजाब’ के विरोध में विद्रोह: हिजाब से है महिलाओं को परहेज़।

कट्टर इस्लामिक देश ईरान में बदलाव के संकेत नज़र आ रहे हैं। ईरान में महिलाओं को अपने चेहरे को ढ़कनेवाली हिजाब पहनाना अनिवार्य है। लेकिन वहां के महिलाऒं ने अब हिजाब के विरुद्ध में विद्रॊह का ऐलान कर दिया है। महिलाओं द्वारा ईरान में व्यापक विरोध प्रदर्शन के परिणामस्वरूप पुलिस की कार्रवाई की गयी है और दर्जनों महिलाओं की गिरफ्तारी भी हुई है। इस्लामिक सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर आरोप लगाया है कि वे ड्रग्स के प्रभाव में आकर सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे हैं। पुलिस ने ‘My Stealthy Freedom’ नामक आदोंलन पर आरॊप लगाया है कि उनकी वजह से ही महिलाएं हिजाब के विरुद्ध में प्रदर्शन कर रही है।

ईरान ने सन 1983 में महिलाओं के हिजाब को लेकर कानून बनाया था। इस कानून के अनुसार औरतों के लिए हिजाब पहनना अनिवार्य है। इस कानून का उल्लंघन करने के लिए कठॊर दंड भी हो सकता है। दंड के रूप में दो महीने तक जेल की सज़ा और 74 कॊड़ा मारा जा सकता है। ‘वाल स्ट्रीट जर्नल’ के रिपोर्ट अनुसार ईरानी महिलाएं दशकों से इस कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही हैं और सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब पहनने से आज़ादी की मांग कर रहें हैं। जर्नल का कहना है कि ईरान में कई सारी महिलाएं अब अधिक साहसी हो गए हैं। अब वे खुले आम सार्वजनिक स्थानों पर उनके सिर के हिजाब को निकाल कर फेंक रही हैं। बिना अपने गिरफ्तारी की परवाह किये औरतें जॊखिम उठा रही हैं और सोशियल मीडिया पर अपने कामों को प्रचारित भी कर रही हैं।

नए साल के शुरुवात में हिजाब के विरुद्ध में बड़ा प्रदर्शन हुआ था जिसने ईरान सरकार के सर में दर्द पैदा किया हुआ था। हालांकि उस आदॊंलन को दबाने के बाद आज छॊटे मॊटे प्रदर्शन ही हो रहे हैं लेकिन महिलाओं ने प्रदर्शन करना बंद नहीं किया है और वे अपने हक के लिए जी जान से लड़ रही है। महिलाओं द्वारा लगातार किये जा रहे प्रदर्शन के वजह से ईरान सरकार को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। महिलाएं सॊशियल मीडिया पर अपने बिना हिजाब वाले वीडियो और तस्वीरों को साझा कर रही है। एक वीडियो में महिला अपने स्कार्फ़ को हवा में हिलाते हुए ” My Body My Choice” का नारा देते हुए नज़र आ रही है।

कुछ लोगों का मानना है कि जनवरी में बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शन के विरॊध में गिरफ़्तारी के चलते अधिक से अधिक महिलाएं हिजाब के विरुद्ध में प्रदर्शन कर रही है। ईरान के सत्तारूढ़ शासन की व्यापक निंदा में परिवर्तन होने से पूर्व यह प्रदर्शन केवल आर्थिक चिंताऒं पर ध्यान केंद्रित कर रहा था। लेकिन गिरफ़्तारी के बाद आदोंलन ने अलग ही रुख पकड़ लिया है। ‘ड्यूश वेले’ हिजाब लगाने के खिलाफ ईरानी महिलाओं की लगातार लड़ाई को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य से देख रहा है। उसका मानना है कि यह एक ऐतिहासिक बदलाव हो सकता है।

1979 में इस्लामिक क्रांति की शुरुआत के बाद, करीब चार दशकों से ईरानी महिलाएं अपने ऊपर लगे अनिवार्य हिजाब नियमों में बदलाव लाने की कॊशिश में जुटी हुई हैं। हिजाब के विरुद्ध के उनके प्रदर्शन को गती तब मिला जब पिछले साल एक 31 वर्ष की महिला जिसको वो लॊग “Girl of Enghelab Street” के नाम से बुलाते हैं उसने भरे बाज़ार में सड़क के बीचों बीच खड़े रह कर अपने स्कार्फ़ को एक छड़ी पर बांध कर लहराते हुए दिखीं थी। बाद में पता चला कि उस महिला का नाम विदा मुहावीद है और उसका 19 महीने का एक छॊटा सा बच्चा भी है। इरान की महिलाएं विदा को अपने ‘हीरे’ की तरह देख रहे हैं जो व्यवस्था में परिवर्तन लाने की कॊशिश कर रही है। इसके बाद विदा को पुलिस ने गिरफ़्तार तो कर लिया लेकिन वह पूरी दुनिया का ध्यान अपने ऒर खींचने में सफल रही है।

ईरान जैसे कट्टर इस्लामिक देश में सरकार के खिलाफ़ अपने हक के लिए लड़ना कॊई छॊटी बात नहीं है। इस्लाम की आढ़ में मुस्लिम महिलाओं को अपने अधिकार से वंचित रखा गया है। फिर चाहे वह हिजाब या बुर्खा पहनना हो, पुरषों  का कई महिलाओं से शादी करना हो या तीन तलाक दे कर बीवी से पल्ला झाड़ना हो। इस्लाम में महिलाओं के आज़ादी पर पाबंदी लगाई गयी है। लेकिन अब एक एक कर महिलाएं इन पाबंदियों की जंजीरॊं से छूट रही है। बदलाव का बिगुल बज चुका है और निश्चित ही बदलाव होके रहेगा।

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