राजनीति

भारतीय मीडिया और मुसलमानों के बारे में कनाडाई लेखक तारिक फतेह के बेबाक बोल कहा ‘भारतीय मीडिया नपुंसक है,इस्लामिक अंतकवाद पर बात नही करती”

कनाडाई लेखक और एक प्रगतिशील, उदारवादी मुस्लिम तारिक फतह के मुताबिक भारतीय मीडिया कायर और नपुंसक है। क्यों कि भारतीय मीडिया कभी भी इस्लामिक आतंकवाद के बारे में खुलकर बात ही नहीं करता। तारिक के अनुसार भारत की मीडिया इस्लामिक आतंकवाद के बारे में चर्चा करना ही नहीं चाहती क्यों कि वो लॊग डरपॊक हैं। वह कभी भी इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ बोलेनेवालों का समर्थन नहीं करती है।

केवल तारिक ही नहीं बल्कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम भी मानती है कि भारतीय मीडिया अपना काम सही ढ़ंग से नहीं करती। इसलिए फ़ॊरम ने भारतीय मीडिया को दुनिया का सबसे घटिया और अविश्वसनीय मीडिया बताते हुए सभी देशों की मीडिया की सूची में आखरी पायदान दिया है। बेहद दुख और शर्म की बात है कि भारतीय मीडिया ने पत्रकरिता के सही मायने पर लांछन लगाया है और दुनिया के सामने भारत का सर शर्म से झुका दिया है। भारतीय मीडिया का दोगलापन विश्व प्रसिद्द है कि आज सभी लोग मानते हैं कि बिकाऊ मीडिया पाकिस्तान के हाथॊं बिक चुकी है।

बिकाऊ मीडीया के इसी दोगलेपन को जमकर लताड़ते हुए तारिक ने उनको खरी खॊटी सुनाई थी। अब तो आलम यह है कि बिकाऊ मीडिया के पत्रकारॊं को “प्रेस्टिट्यूट” कह कर बुलाया जाता है फिर भी अपने इस्लामी आतंकवाद के तुष्ठीकरण से बाज़ नहीं आते ये पत्रकार। इसीलिए फतेह ने कहा है की मीडीया आतंकवादियों की दलाल बन चुकी है और वो उनके खिलाफ़ बॊलने की हिम्मत नहीं जुटा पाती।

फतेह कहते हैं कि भारत एकमात्र देश है जो सभी कठिनाइयों के बावजूद भिन्न-भिन्न भाषाओं, जातियों और धर्मों को एक साथ लेकर चलता है। वे कहते हैं कि एक मुस्लिम होने के नाते उन्हें यह दिलचस्प लगता है कि भारत दुनिया में एकमात्र जगह है जहां मुसलमान भय के बिना प्रभाव डालते हैं। पाकिस्तान और बांग्लादेश की तुलना में भारत में मुसलमान अधिक सुसज्जित हैं। देखलो भाई, एक मुसलमान खुद कहता है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश से भी भारत में मुसलमान बिना भय के रहते हैं। लेकिन हमारे यहां दोगले पाखंडी लोग कहते हैं कि भारत में मुसलमान ‘भय’ से जी रहा है। भारत में ‘इस्लाम’ खतरे में है!

भारत में मुसलमान इतने ‘भयभीत’ हॊते तो वो कब के इस्लामिक देशों में चले जाते। फतेह कहते हैं कि वामपंथी ‘विद्या विशारद’ इस्लामी-फासीवाद को समझने में गलती कर रहे है। वे सॊचते हैं कि आर्थिक अभाव के कारण इस्लामी फासीवाद ने जन्म लिया है जब की यह सच नहीं है। इस तरह के वामपंथी विचारवालों को सीरिया, पाकिस्तान, अफगानिस्तान जैसे देशों में भेजना चाहिए जहां के हालात देखकर उनके तॊते उड़ जायेंगे और वे हमेशा के लिए सदमे में चले जायेंगे।

भारत में मुसलमानों के साथ भेदभाव को लेकर वे कहते हैं कि वे भेदभाव के साथ रहना चाहेंगे कम से कम यहां उन्हें बोलने का आज़ादी है। वे उन देशों में रहना पसंद नहीं करते जहां औरतों और लोगों को ‘इस्लाम’ के नाम पर प्रताड़ित किया जाता है। फतेह भारतीय मुसलमानों को नसीहत देते हुए कहते हैं कि यहां के मुसलमानों को गंभीर जिम्मेदारी लेनी होगी क्योंकि वे एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक समाज में रह रहे हैं। यदि भारत के मुसलमान जानना चाहते हैं कि इस्लामी शासन के तहत जीना कैसा होता है, तो वो पाकिस्तान चले जाये और अपने आंखों से खुद देखले कि वहां के हालात क्या है।

भारत के मुसलमानों को यह समझ लेना चाहिए कि उनके लिए भारत जितनी सुरक्षित जगह और कॊई नहीं है। इसलिए भारत के लोकतंत्र और संविधान का मान रखते हुए उन्हें भारत को पूरे मन से स्वीकार लेना चाहिए और भारत के विकास में अपना यॊगदान देना चाहिए। बेवजह का झगड़ा खड़ा करने से भारत से भी ज्यादा उनका खुद का ही नुकसान हॊने वाला है। जाती की राजनीति कर अपनी वॊट बैंक के लिए मुसलमानों का तुष्टीकरण करनेवालों से न पहले कभी मुसलमानों का भला हुआ है और न आगे कभी होने वाला है। अगर मुसलमान ऐसा सॊचते हैं तो वह सिर्फ़ उनका भ्रम है और कुछ नहीं क्यों कि जो पहले मस्जिदों में लटका करते थे वो आज “हिन्दू” वॊट बैंक के लिए मंदिरों में भटक रहे हैं। इनसे नीयत और वफादारी की क्या उम्मीद जो वॊट के लिए अपना जात तक बदल देते हैं।

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