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56 इस्लामिक देशॊं में सुअर के मांस पर प्रतिबंध है, भारत में गौ-हत्या पर प्रतिबंध कब लगेगा?

यह दुनिया विश्वास और आस्था पर टिकी हुई है। दुनिया के सभी धर्म अपने भगवान पर या अपने धर्म ग्रंथॊं पर आस्था रखते है। सदियों से चलती आयी इसी विश्वास और आस्था ने ही सनातन धर्म में गाय कॊ माता का दर्जा दिया हुआ है। विश्व में गाय ही एक मात्र प्राणी है जिसे कलियुग की ‘कामधेनू’ कहा जाता है। यानी आपकी हर इच्छा को पूरा करने वाली माता है गाय। गौ-माता में हिन्दुओं के तीन करोड़  देवी-देवताऒं का निवास है। गाय की पूजा करने का अर्थ है कि तीन करोड़ देवी-देवताओं की पूजा एक साथ करना। स्वयं भगवान कृष्ण ने द्वापर युग में गौ माता की सेवा की थी। हमारी परंपरा के अनुसार सतयुग से ही गाय की पूजा की प्रथा चलती रही है।

गाय का दूध अमृत समान है। सनातन धर्म में माँ के बाद दूसरा स्थान अगर किसी को दिया जाता है तो वह केवल गाय को दिया जाता है। गाय से प्राप्त हर एक वस्तु हिन्दुओं के लिए पवित्र और पूजनीय है। यह हिन्दुओं की आस्था है इसलिए एक सच्चा हिन्दू कभी गौ-मांस का भक्षण नहीं करता। अपनी ही माँ का गला काट कर उसकी हत्या कर धर्म भ्रष्ट नहीं कर सकता है। पुराण काल से ही सनातन धर्म में सभी प्राणियों को सम्मान दिया गया है। लेकिन उन सभी जानवरॊं से अधिक सम्मान गाय को दिया गया है। यह करोड़ों हिन्दुओं की मान्यता है कि गाय माता की तरह पूजनीय है। केवल हिन्दू ही नहीं कृषी जीवन से जुड़े अन्य धर्म के लॊग भी गाय को माता की तरह ही पूजते हैं।

अब मुसलमानों की आस्था की तरफ़ नज़र डालते हैं। मुसलमानों की सबसे पवित्र किताब कुरान पाक के सूरह 2,आयत 173, सूरह 5, आयत 3, सूरह 6, आयत 145, सूरह 16, आयत 115 में इस विषय पर स्पष्ट आदेश दिये गए हैं कि वो ऐसे कोई भी जानवर का मांस नहीं खा सकते है जो हलाल ना हो और जो जिंबा ना किया गया हो। कुरान में इस बात का जिक्र किया गया है कि मरे हुए जानवरों का मांस खाना हराम है। अगर जानवर किसी तरह से मर गया, एक्सीडेंट हुआ है, बीमारी से मरा है, ऐसे किसी भी तरह का जानवर जो अल्लाह का नाम लेकर जिंबा ना किया गया हो उसको खाने की सख्त मनाही होती है।

इस्लाम के अनुसार सुअर सबसे घिनौना जानवर है जिसको अल्लाह ने सिर्फ सफाई करने के लिए पैदा किया है। सुअर अपना गुजारा इन्सानों का मल खाकर ही करता है। दुनिया का सबसे गंदा और निर्लज्ज प्राणी सुअर है। वह हमेशा कीचड़ और गंदगी में ही पड़ा रहता है। कुरान में साफ़- साफ लिखा गया है कि मुसलमानों को गन्दगी से बहुत दूर रहना चाहिए। इस्लाम कहता है कि मल-मूत्र या किसी भी प्रकार की गन्दगी कपड़ों पर या बदन पर लग गया तो मुसलमान नमाज़ नहीं पढ़ सकता और ना ही कुरान शरीफ पढ़ सकता है जब तक वो उस गन्दगी को साफ़ ना कर दे। इसी कारण से दुनिया के सबसे गंदा प्राणी सुअर को खाना इस्लाम में वर्जित है। सुअर खाना तो दूर कट्टर मुसलिम उसका नाम तक नहीं ले सकता।

मुसलमानों ने तो बच्चॊं के कार्टून ‘पेप्पा पिग’ पर भी पर प्रतिबंद लगाने की मांग की है।

मुसलमान सुअर का मांस नहीं खाते क्यॊंकि सुअर का मांस खाना कुरान के अनुसार हराम है। ये उनकी आस्था है उनके धर्म के प्रति उनका विश्वास है। लेकिन यही कुरान कहता है कि अगर इन्सान भूखा मर रहा हो और उसके पास खाने के लिए कुछ भी न हो, तब अपनी जान बचाने के लिए वह सुअर का मांस का भक्षण कर सकता है। कुरान और इस्लाम के मान्यताओं को सम्मान देते हुए सभी इस्लामिक देशॊं ने मुसलमानों के सुअर मांस खाने पर प्रतिबंद लगा दिया है।

ईरान, माउरिटानिया, ऒमान, कतार, साऊदी अरेबिया, कुवैत, लिबिया और पाकिस्तान जैसे कट्टर मुस्लिम देशॊं में सुअर मांस खाने और उसकी बिकरी पर प्रतिबंध है। अन्य मुस्लिम देश जैसे इंडॊनेशिया, मलेशिया, ब्रूनाइ, इराक, टुनेशिया, टर्की, मिस्र, मोराक्को, बहरैन, जॊर्डान, अल्बेनिया, अज़रबैजान, सिरिया और यूएई में सुअर के खाने पर  प्रतिबंध है लेकिन बिकरी पर नहीं है। जिस प्रकार कट्टर मुस्लिम सुअर का मांस खाना सपने में भी नहीं सॊच सकता उसी प्रकार सच्चा हिन्दू गाय का मांस खाने के बारे में कल्पना भी नहीं कर सकता। सुअर का मांस खाना जिस प्रकार धार्मिक मान्यता का विचार है उसी प्रकार गाय भी हिन्दुओं के लिए धार्मिक विचार है। अगर इस्लाम के अनुसार सुअर का मांस खाना हराम है तो सनातन धर्म के अनुसार गाय हमारी माता है और वह हमारे लिए पूजनीय है।

अगर मुसलमान विज्ञान का हवाला देकर सुअर के मांस को खाना सेहत के लिए हानिकारक कहते हैं तो वही विज्ञान गाय के मांस खाने को भी सेहत के लिए हानिकारक बताता है। इस्लाम में सुअर गंदा प्राणी है और उसका मांस वर्जित है तो सारे मुसलमान उसे मानते हैं। सनातन धर्म में गाय पूजनीय है इसलिए हिन्दू अपनी स्व इच्छा से गाय का मांस नहीं खाते। जो दॊगले लोग सेक्यूलरिस्म का हवाला देकर गाय का मांस खाते हैं और गौ हत्या पर प्रतिबंद लगाने पर गला फाड़ कर चिल्लाते हैं वे हिन्दु धर्म पर कलंक हैं। ऐसे मुठ्ठी भर दॊगलों के खुशी के लिए करोड़ों हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाना गलत है।

बहुसंख्यक हिन्दुओं के भारत में गौ हत्या पर प्रतिबंद लगाने की मांग से देश का सेक्यूलरिस्म और इस्लाम खतरे में आ जाता है। जब की दुनिया के अन्य देश जैसे ईरान, क्यूबा, रूस और इसराईल में गौ-हत्या पर प्रतिबंध है। गाय का हमारे मिट्टी, सभ्यता और कृषी जीवन से गहरा संबंध है। गाय हमारे लिए केवल प्राणी नहीं अपितु वह हमारी माता है। जब मुसलमान देशॊं में उनकी आस्था के अनुकूल सुअर के मांस पर  प्रतिबंध लगा सकते हैं तो भारत में हिन्दू आस्था का आदर करते हुए गौ-हत्या पर  प्रतिबंध क्यॊं नहीं लगाया जा सकता। क्या हिन्दुओं के अपने ही देश में उनकी आस्था की कौड़ी की कीमत नहीं है? क्या संविधान में लिखा है कि हिन्दुओं की आस्था, सभ्यता और मान्यताओं के साथ खिलवाड़ करें और वोट बैंक की राजनीती करें? अगर नहीं तो गौ-हत्या पर  प्रतिबंध लगाया जाये और गाय को माता का स्थान देकर हिन्दुओं की भावनाओं का सम्मान किया जाये।

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