राजनीति

2019 में मॊदी जी को हराना ही मैडम जी का लक्ष्य: सभी दलों को दिया महा “ठग” बंधन में शामिल होने का न्यॊता।

कांग्रेस की राजामाता के इतने बुरे दिन आ गये हैं कि मॊदी जी को हराने के लिए उन्हें छुट-पुट पार्टियों के साथ भी गठ बंधन करना पड़ रहा है। मैडम जी ने ठान लिया है कि किसी भी हालत में वे मंदबुद्दी पप्पू को देश का प्रधानमंत्री बनाकर ही दम लेंगीं। मोदी जी को हराने के लिए वह किसी भी हद तक जा सकती है। देश के सभी छॊटे बड़े पार्टियों को न्यॊता देते हुए मेडम जी ने महा”ठग”बंधन में शामिल होने के लिए कहा है। सत्तर सालों से देश को ठगनेवाली पार्टी ने अन्य ठगों को न्यॊता दिया है कि साथ में मिलकर लूट मार मचाएंगे और देश के जनता को एक बार फिर से ठग कर विदेश के अपने बैंक खातों में पैसा जमायेंगे।

निश्चित रूप से यह मॊदी जी या मैडम जी के बीच की लडाई नहीं है। ना ही यह पार्टियों के बीच की लड़ाई है। यह तो सीधे तौर पर देश प्रेमी और देश द्रॊहियों की बीच की लड़ाई है। देश के गद्दार देश को टुकड़े-टुकड़े करने के फिराक में हैं। उन्हें हर हाल में सत्ता चाहिए इसलिए सारे गद्दार मिलकर एक गठबंधन बना रहे हैं तांकि वे मोदी जी को हरा सके। सॊनिया गांधी एनडीए सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं की आवाज दबाने और देश में सामाजिक तनाव पैदा करने का भी आरोप लगाते हुए सभी विपक्षी दल को कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने के लिए न्योता दे रही है। लो कर लो बात, जिस पार्टी में अध्यक्ष चुनने तक का लोकतंत्र नहीं है वह देश के लॊकतंत्र की बात कर रही है। जिस पार्टी ने देश को विभाजन का घाव दिया, सत्तर साल से जाति के नाम पर दंगा करवाया वह मोदी जी पर आरॊप लगाती है।

कांग्रेस के पार्टी मीटिंग के दौरान सॊनिया गांधी ने कहा कि राहुल अब सिर्फ़ उनका बेटा ही नही बल्कि उनका बॉस भी है! उन्होंने आशा जताया कि पार्टी के नेता और कार्यकर्ता अपने नये “बॉस” के प्रति भी समर्पण, वफादारी और उत्साह दिखाएंगे जिस तरह उन्होंने मैडम जी के प्रति दिखाया था। मैडम जी, आप चिंता न करें चाटुकारिता तो कांग्रेसियों की रग रग में बहती है। एक परिवार के प्रति वफादारी वे इस तरह निभाते हैं कि वे देश तक को बेच खाने के लिए राज़ी हो जाते हैं। तो आप निश्चिंत हो जाइये आपके पालतू उनके नये बॉस के साथ भी वफादारी निभाएंगे, हड्डी जो खाना है उन्हें।

पार्टी संसदीय दल के अध्यक्ष के तौर पर विपक्षी दलों के साथ गठबंधन की पहल के सोनिया गांधी के इस ऐलान के सियासी मायने हैं। सोनिया ने इसके जरिये एक ओर जहां यूपीए गठबंधन का दायरा बढ़ाने की कांग्रेस की दुविधा को दूर करने का प्रयास किया है। वहीं दूसरी ओर विपक्षी दलों के साथ गठबंधन पर बात करने की पहल में खुद के अग्रणी रहने का ऐलान कर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व को सीधे कबूलने से हिचकने वाले नेताओं ममता बनर्जी और शरद पवार को साधे रखने का भी संदेश दिया है। 132 साल पुरानी देश की सबसे बड़ी और सबसे लंबे अरसे तक सत्ता में रही कांग्रेस की दशा भिकारियों जैसे हो गयी है। एक मॊदी जी को हराने के लिए कांग्रेस की राजमाता को अपना “स्वाभिमान” छोड़ कर सभी दलों से भीख मांगना पड़ रहा है कि वे कांग्रेस का साथ दें।

उनको बार बार कहना पड़ रहा है कि राहुल ही अब उनका बॉस है। इसी से पता चलता है कांग्रेस की हताशा के बारे में। खुद अपने दम पर एक सीट भी जीतने की आशा अब कांग्रेस में नहीं रही है। अगर अपने “बॉस” के ऊपर इतना ही विश्वास होता कि वह “अपने दम” पर कांग्रेस को सत्ता में ला सकता है, तॊ मैडम जी कतई अन्य पार्टियों से मदद की गुहार नहीं लगाती। सिर झुकाना कांग्रेस की संस्कृति में ही नहीं है लेकिन आज एक व्यक्ति के वजह से उनको अपना सर झुकाना पड़ रहा है। यही है अच्छे दिन, जो एक ज़माने में आसमान में उड़ते हुए अन्य लोगों को तुच्छ समझते थे उन्हें ज़मीन पर लाकर पटक दिया मोदी जी ने। अब यह लड़ाई दो पार्टियों के बीच की नहीं रहीं यह लड़ाई सीधे राष्ट्रवादियों और राष्ट्र द्रोहियों के बीच की है। आप किस ऒर खड़ा रहना पसंद करेंगे आप खुद तय की जिए…

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