सैन्य सुरक्षा

1971 के युद्ध में ‘रॉ’ का मास्टरस्ट्रोक पाकिस्तान को घुटनों पर लाकर खड़ा कर दिया।

 

भारत पाकिस्तान की दुश्मनी दुनिया के सबसे कड़वे अनुभवों में से एक है।दोनों देशों ने पिछले 70 सालों में 3 बड़े युद्ध और अनगिनत छोटे बड़े कई  प्रकार के युद्ध लड़े है,इन सभी प्रत्यक्ष युद्धों के इलावा एक अदृश्य युद्ध जो पूरे वर्ष 24 घण्टो चल रहा है।

ये खुफिया जंग एक खामोश,कड़वी लेकिन असरकारक लड़ाई है दोनों देशों के लिए।भारत की प्रमुख जासूसी एजेंसी “रॉ” दुनिया की सबसे अधिक पेशेवर और खतरनाक एजेंसियों में शुमार है तथा पाकिस्तान की “ISI” को भी कुख्यात जासूसी एजेंसी होने का गौरव प्राप्त है।

पाकिस्तान में ISI एक समांतर सरकार के रूप में काम कर रही है या यूँ कहूँ की ये एजेंसी गुप्त रूप से पुरे पाकिस्तान को अपने कण्ट्रोल में चला रही है तो अतिश्योक्ति नही होगी।

ऐसे कई उदाहरण है जहां भारतीय रॉ ने पाकिस्तानी ISI को पटकनी दी है।आइये आपको  ऐसा ही एक किस्सा सुनाता हूँ।भारतीय रॉ एजेंट हाशम कुरैशी श्रीनगर में सीमा सुरक्षा बल के साथ काम कर रहे थे।

पाक अधिकृत कश्मीर(POK) में आतंकवादियो के संगठन ने कश्मीर फतह के लिए एक संगठन बनाया जिसे अल-फतह नाम दिया।इस  संगठन के 36 लोगो को कश्मीर पुलिस ने खुफिया एजेंसियों की  मदद से गिरफ्तार किया था।

रॉ एजेंट हाशम कुरैशी ने और जानकारी लेने के लिए इस संगठन में घुसपैठ करने का फैसला किया।उन्हें पाक अधिकृत कश्मीर(POK) के हिस्सों की गहन जानकारी थी।उन्हें वहाँ  भेजा गया पर वहां जाकर वो ISI के साथ मिलकर उनके आपरेशन चलाने लगा या  यूँ  कहूँ की भारत से गद्दारी करने लगा।कुरैशी को एक पूर्व पाकिस्तानी पायलट ने प्लेन चलाना सिखाया और विमान हाईजैक करने की ट्रेनिंग भी दी।जब ISI ने अपने काले मंसूबो को पूरा करने के लिए  उन्हें भारत वापिस भेजा तब सीमा के सुरक्षा बल(BSF) ने कुरैशी को पकड़ लिया और जांच के लिए कैंप में भेज दिया।यहां तक तो सब फ़िल्मी कहानी जैसा लग रहा होगा  क्यूँ ??

उसकी योजना थी की एक भारतीय विमान को हाईजैक किया जाए जिसे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र राजीव गांधी उड़ा रहे हो।इस चौकाने वाली खबर का खुलासा सीमा के सुरक्षा बल और रॉ के प्रमुखों के सामने हुयी थी।खुफिया राउर पर भारत ने पाकिस्तान को उसी के  खेल में शिकस्त देने की तैयारी कर ली थी।

क्या था भारत का मास्टर प्लान??

रॉ और सीमा के सुरक्षा बल ने कुरैशी को भारती अधिकारियो की  सज़ा से बचाने के वादे पर उसे एक गुप्त मिशन को पूरा करने के लिए राजी कर लिया था।भारत की गुप्त योजना थी कि कुरैशी स्वयं श्रीनगर से लाहौर तक का इंडियन एयरलाइन्स का  विमान उडाएगा और फ्लाइट पर लोगो का अपहरण करेगा तथा जेल में बंद अल-फतह संगठन के 36 सदस्यों की रिहाई की मांग करेगा।

एक फोकर फ्रेंडशिप एयरक्राफ्ट ” गंगा” जो की इंडियन एयरलाइन्स से सेवा निवृत्त हो चुका था उस विमान को इस ऑपरेशन में शामिल किया गया था।इस विमान में योजना  के अनुसार एक नकली पिस्टल और नकली ग्रेनेड को पहुंचा दिया गया था।सही  समय पर आपरेशन  को शुरू किया गया और घोषणा की गयी की विमान का अपहरण हो गया है।

भारतीय रेडियो आकाशवाणी ने इस अपहरण की खबर का प्रसारण किया  लाहौर में पाकिस्तानी अथॉरिटी ने इस विमान को उतरने की इजाजत दे दी उन लोगो को बताया गया कि इस विमान का अपहरण पाक अधिकृत कश्मीर(POK) की राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा ने  किया है।जल्द ही ये खबर आग की तरह फैल गयी उस दौर में  भी जब इन्टरनेट और 24 घण्टे के समाचार चैनल नहीं  थे। इस खबर को इस तरह से प्रसारित किया गया कि की पूरी दुनिया तक  संदेश जाए की पाकिस्तान सरकार ने ये अपहरण करवाया है।योजना अनुसार विमान से 36 सदस्यों को छोड़ने की माँग की गयी पर भकर्त ने ये माँग ठुकरा दी।कुरैशी को राजनैतिक शरण पाकसितां दी और उसे एक स्वतंत्रता सेनानी की तरह पाकिस्तान में अपनाया गया व सम्मान दिया गया।तदुपरान्त कुरैशी को जुल्फिकार भुट्टो से मिलवाया गया ।उस विमान के यात्रियों को भारत भेजा गया और पाकिस्तान ने विमान जला  दिया।

सवाल उठता है कि भारत ने ऐसा  किया क्यों?

भारत ने पाकिस्तान की सभी उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया।इस घटना के बाद पूरी दुनिया को संदेश दिया गया की पाकिस्तान खुले तौर पर आतंकवाद को पोषित और उसका  समर्थन कर रहा है।पाकिस्तान बतौर ये बात अच्छी तरह से जानता था कि कुरैशी भारत के एजेंट है। पाकिस्तान पूर्वी पाकिस्तानी ( बांग्लादेश) इलाको में संसाधनों की पूर्ति के लिए नागरिक उड़ानों का प्रयोग कर रहा था।

पाकिस्तान से बांग्लादेश तक पहुचने का सबसे सरल मार्ग था भारतीय वायु सीमा का प्रयोग वरना उसे 3 गुना लम्बा हवाई मार्ग पूरा करके ही बांग्लादेश पहुंचा जा सकता था।भारत द्वारा लगाए हवाई प्रतिबन्ध  से पाकिस्तान की कमर टूट रही थी क्योंकि सेना तक रसद पहुंचना धीमा हो गया था और अंततः पाकिस्तान को बांग्लादेश वाले हिस्से को छोड़ना पड़ा।भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ द्वारा 1971 के युद्ध में ये एक मास्टर स्ट्रोक था जिसने दुश्मन को झुकने पर मजबूर कर दिया था।


Vishal Sharma

Tags

Related Articles