संस्कृति

‘हिन्दू हृदय साम्राट’ बाळा साहेब जिन्होंने कभी अपने धर्म के साथ समझौता नहीं किया उनके जनम दिवस पर हमारी और से शत शत नमन !!!

बाळा साहेब.. हिन्दुत्व का शेर…. जिसने कभी अपने धर्म के साथ समझौता नहीं किया। जो बेबाक होकर अपने हिन्दुत्व के प्रति असीम प्रेम का प्रदर्शन करते थे। तथाकथित दॊगले हिन्दुओं से अलग, निडर हॊकर अपना दृष्टिकोण रखते थे। आज अगर आप ज़िंदा होते तो इन नपुंसक हिन्दुओं पर तंज कसते और उनकी कायरता पर व्यग्र होते। आप ने हमेशा ही कहा था की हिन्दुओं को जागृत होना होगा। हिन्दुओं को अपने मात्र धर्म को बचाने के लिए एक जुट हॊकर लड़ना होगा। इस्लाम आतंकवाद का मुहुँ तोड़ जवाब हॊगा हिन्दू आतंकवद।

आपने हमेशा ही कहा कि हिन्दुओं में एकता लाना होगा। जो मुसल्मान इस देश के कानून को नहीं मानता वह गद्दार है। हिन्दुओं को अपनी रक्षा करनी होगी। इस्लामी आतंकवाद को घुट्ने टेकने के लिए मजबूर करना होगा। आपने कहा था की अतंकवाद एक केंसर की तरह है और उसका इलाज करना ही होगा। वो आप ही थे जिन्हॊने “हिन्दुओं के लिए हिन्दुस्तान” की माँग की थी। आप के जैसा बेबाक इन्सान न आया है और ना आयेगा..

बाळा साहेब देखिए आज क्या हो गया है? हिन्दुत्व और हिन्दू हित के बारे में बॊलनेवालों को कॊमुवादी बताया जा रहा है। गद्दरॊं की पैरवी करने खुद हिन्दु उठ खड़े होते हैं। दोगले हिन्दू अपने ही देवी देवताओं का अपमान कर रहें है और बाकी हिन्दू नपुंसक की तरह देख रहें हैं। कहाँ आप हिन्दू आतंकवाद की बात कर रहे थे ये डरपॊक हिन्दू शस्त्र उठाना तो दूर अन्याय के खिलाफ़ अवाज़ तक नहीं उठाते, आवाज़ तो छोड़िये कम से कम आपके जैसे कलम तो उठा देते। लेकिन नहीं उन्हें तो कोमुवादी नहीं बनना है। वे तो ‘सेक्यूलरिस्म’ का चोला ओढ़ कर सोयेंगे।

जिन बांग्लादेशियों को आप देश से बाहर निकालने की बात कर रहे थे उन्हें आज साजो सजावट के साथ देश में बसने दिया जा रहा है। बम फोड़ने के लिए अपने मुल्ले क्या कम थे की बांग्लादेश से भी उन्हें लाकर देश में घर बना कर दिया जाएगा। आप वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने बेघर कश्मीरी पंडितों के बच्चों के लिए इंजिनियरिंग कॉलेज में आरक्षण दिलवाया था और नसीहत दी थी की कश्मीरी पंडित जिहादियों से अपनी रक्षा के लिए शस्त्र का उपयॊग सीखें। हमारा सनातन धर्म भी तो वही कहता है की धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र उठाओ। लेकिन हम डरपॊक हैं। हम भगवद गीता की नहीं मानेंगे हम तो मक्कार, दगाबाज, दोगुले जात्यातीत कुत्तों की बात मानेंगे।

हम इतने डरपॊक हैं की पहले की तरह ही हम हमारे मंदिरॊं को टूटते हुए देखेंगे, हमारी औरतों की इज़्ज़त लुटते हुए देखेंगे, हम तो आपस में ही लड़ेंगे और मर जायेंगे। बंगाल, केरल को दूसरा पाकिस्तान बनाएंगे। इस्लाम और ईसाईयों के जिहाद को चुप चाप सहेंगे और प्रतीक्षा करेंगे की प्रभु राम और कृष्ण हमें बचाने आयेंगे। जब जिहादी हमारे दरवाज़े पर दस्तक देंगे तो हम हाथ पैर जोड़ेंगे और कुरान गाएगें। पहले भी तो कईयॊं ने यही किया था। जो आज कठमुल्ले बनकर घूम रहें हैं उनके पुरखों ने तलवार के डर से ही तो अपना धर्म बदला था।

हमारे लिए यह कॊई नयी बात नहीं हैं। जयचंद जैसे गद्दारों की हमारे यहाँ कमी नहीं है। साहेब, आज ऐसा दिन आया है की हिन्दू हत्यारों की बरसी-जयंती मनाई जा रही है।हमारे पूर्वजों की आत्मा आज कितना रो रही हॊगी यह देखके की उनकी अपनी संताने मुघलॊं की जयंती मना रही है। अपने मान -सम्मान के लिए जॊहर में कूद कर सती होनेवाली औरतों की इज़्ज़त उतारी जा रही है और इसका विरॊध करनेवालों को आतंकी बताया जा रहा है। दूसरॊं की बात छोड़िये आपका खुद का पुत्र कुपूत निकला मोदी विरॊध में आज वह इतना पागल हो गया हैं की हिन्दूओं की हत्यारन ममता डायन के दरबार पर माथा टेक कर फूल बरसाकर आया हैं। उम्मीद करते हैं की अगर आप होते तो शर्मिंदा होते।

बाळा साहेब कहाँ चले गये आप? शेर की दहाड़ नहीं है इसीलिए देश में गीदड़ और लोमड़ी खुले आम घूम रहें हैं। आज दुनिया मे जितने भी हिन्दू हैं उन्हें गर्व होना चाहिए अपने पूर्वजों पर की 800 मुघल, 200 साल अंग्रेज़ और 60 काँग्रेस और वामपंथियॊं की क्रूरता के बावजूद उन्होंने अपना धर्म नहीं बदला। अपने मात्र धर्म को बचाकर हमें अपने धर्म से जोड़े रखा। स्वयं को सौभाग्यशाली समझना चाहिए की हिन्दू होकर जन्में है और हिन्दू होकर ही मरेंगे। लेकिन दुर्भाग्य है हमारा की हम में से कुछ लोग हिन्दू होना ही अभिशाप मानते हैं। ऐसे हिन्दू कलंक हैं समाज पर और देश पर। आप होते तो बेझिजक अपनी बात रखते लेकिन हम डरपॊक हैं, कायर हैं हमारी इतनी हिम्मत ही नहीं है। अब हम क्या करे आप ही बताइए….

 

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