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हिन्दुओं के नाम एक महत्त्वपूर्ण पत्र

700 साल मुघल शाषण,200 साल अंग्रेजों का शाषण,70 साल कांग्रेस का शाशन पर फिर भी......

प्यारे हिन्दुओं

हिन्दुओं की स्थिति को देखते हुए मैं बहुत ही भावुक मन से आज ये पत्र लिख रही हूँ| हम हिन्दू हमेशा कहते हैं कि हमें एकजुट होकर रहने की आवश्यकता है, हमें अपने लोगों की सहायता करने की जरूरत है, हमें अपने देश को विश्व गुरु बनाना है? पर क्या वास्तव में हम जो कह रहे है उसका पालन कर रहे है| सनातन धर्म संस्कृति कहती है कि हम पूरी दुनिया को एक परिवार(वसुदैव कुटुंबकम) के रूप में देखते है पर जहां तक मैं देख रही हूँ ज्यादातर लोग एक दुसरे के साथ ही खड़े नहीं हो सकते और हम दुनिया को एकजुट करने की बात करते हैं।

हमारे लोगों के साथ समस्या यह है कि हम किसी व्यक्ति के हो रहे विकास को कभी भी सहन नहीं कर सकते|हम समझते है की दुश्मन हमारे देश के लिए एक खतरा है पर असलियत में दुश्मन नही है जो देश के लिए खतरा है बल्कि हम लोग खुद है| ये एक या दो बार नहीं साबित हुआ है बल्कि सदियों से ऐसा होता आ रहा है पर फिर भी हम इससे कोई सबक नहीं सीखते हैं|उदाहरण के लिए, ब्रिटिश, पुर्तगाली भारत व्यापार के लिए आए थे, वे यहां मेहमान के रूप में आए, लेकिन कुछ ही साल के भीतर वे यहाँ के मालिक बन कर बैठ गये और देश पर राज़ करने लगे|

इसका क्या कारण था,क्या भारतीय इतने समर्थ नही थे की वह स्वंय की रक्षा कर सके ? नहीं, ऐसा नही था बल्कि ऐसा इसलिए हुआ क्यूँकि कुछ लोगों ने अपने खुद के राजा और रानियों के साथ विश्वासघात किया था जो विदेशियों के अंतर्गत हमारे पतन का कारण बना|

मुघल, जिन्होंने 700 साल तक भारत पर शासन किया,  क्या वे इतने शक्तिशाली थे कि वे किसी की मदद के बिना भारत पर विजय पा सकते थे? अंग्रेजों का उदाहरण लें, उन्होंने कैसे विभाजन और शासन के सहारे भारत जीत लिया,इसलिए क्यूँ की उनकी समझ में आगया था की भारतीयों में कोई एकता नहीं है,एक दुसरे के लिए कोई सम्मान नहीं है और वे एक दूसरे के साथ खड़ा नहीं होते बल्कि वे एक दुसरे के खिलाफ खड़े होते हैं इसलिए उन्होंने इन सब कमज़ोरियों का जम कर फायदा उठाया|

अलेक्जेंडर जिसे दुनिया में बहुत महान माना जाता है वह भी भारत में प्रवेश करने में असमर्थ रहा|यह उसी समय के दौरान की बात है जब चाणक्य ने सभी भारतीय राजाओं और हिन्दुओं को एकजुट रहने की चेतावनी दी थी लेकिन तब भी जैसा की अनुमान था अधिकांश हिंदुओं ने उनकी बात को महत्व नहीं दिया| अम्बी कुमार एक ऐसा उदहारण है जिसने ये साबित किया की भारतीय कितने कमज़ोर है| अम्बी कुमार जो तक्षिला के राजकुमार थे उन्होंने अलेक्जेंडर के साथ एक संधि पर हस्ताक्षर किए और भारत के बाकी प्रांतों को धोखा दिया जिसने सिकंदर के लिए भारत के द्वार खोल दिए|

सबसे महान योद्धा पृथ्वीराज चौहान का उदाहरण लें,, वह अपराजय था, मोहम्मद घोरी उनसे कई बार जीतने में असफल रहे , लेकिन यह उनके दोस्त जयचंद का विश्वासघात था जिसके वजह से अंग्रेज पृथ्वीराज को हरा पाए|

रानी झांसी के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ था, ग्वालियर के राजा जहां वह ठहरी थी  उनके द्वारा उन्हें धोखा दिया गया जिसके चलते अंग्रेज रानी झांसी पर हमला करने में कामयाब हुए|

रानी चेन्नम्मा, किट्टूर कर्नाटक की महान योद्धा भी तब हारी जब उसके मंत्रियों द्वारा उसे धोखा दिया गया था|अंग्रेजों रानी रानी चेन्नम्मा से दो बार युद्ध हारने के बाद जीतने की उम्मीद खो चुके थे पर तीसरी बार में उसके  मंत्रियों ने युद्ध हथियारों को क्षतिग्रस्त कर दिया|युद्ध, मंत्रियों ने हथियारों को क्षति पहुंचाई जिसके बाद कित्तुर सेना ब्रिटिशों पर हमला करने में विफल रही।उनके गोला-बारूद और बमों को खत्म कर दिया गया था जो कितूर साम्राज्य के पतन का कारण बना| जब रानी ने बचने की कोशिश की तो मंत्रियों ने उस गुप्त मार्ग का खुलासा भी कर दिया जिसके बाद ब्रिटिश द्वारा उनको पकड़ लिया गया  था|

यहाँ तक की आज़ादी के बाद भी, हमारे लोगों ने ये विश्वासघात के अपने बेशर्म कृत्यों को जारी रखा| सुभाष चंद्र बोस, भारत के महान आज़ादी क्रांतिकारी को भी अपने ही लोगों द्वारा धोखा दिया गया था|भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद को पकड़ा गया क्योंकि हमारे अपने लोग उनकी लोकप्रियता बर्दाश्त नहीं कर सके और उनके रहस्यों को अंग्रेजों को बतादिया जिसकी वजह से हमें इन महान शक्तिशाली शख्शियतों को खोना पड़ा|

करीब 1000 साल बाद भी,  लगता है भारतीयों ने इससे कोई भी सबक नहीं सीखा है| आज भी हम खुद ही है जो हमारे अपने देश को नष्ट कर रहे हैं|हाल फिलहाल हो रही घटनाएं इसी और इशारा करती है| विशव हिन्दू परिषद् के प्रवीण तोगड़िया ने एक संवाददाता सम्मेलन किया जिसमे उन्होंने कहा की पुलिस और कुछ लोगों द्वारा उन्हें लक्षित किया जा रहा है,उसे दबाने की कोशिश हो रही है जिसके तुरंत बाद ही लोग इस पर बटना शुरू हो गये|एक दुसरे के खिलाफ हो गये,मोदी जी के दोष निकालने लगे|कुछ लोग तो इस हद तक पहुंच गये की वह प्रधान मंत्री मोदी को “हिंदू-विरोधी” बुलाने लगे|हां, हम जानते हैं कि प्रवीण तोगड़िया एक अच्छे इंसान है और उन्होंने हिंदुओं के लिए बड़े पैमाने पर काम किया है|लेकिन सवाल यह है, जब आपको अपने परिवार में एक दुसरे से कोई समस्या है, जब आपकी अपने भाइयों और बहनों के साथ लड़ाई होती है तो क्या आप सड़कों पर उतर आते है? या आप अपने घर के अंदर इस बात का हल करते हैं| हां, आपको इसे अपने घर में हल करने की आवश्यकता है,आप तभी सामने आयेंगे अगर आप अपने आप को दुनिया के सामने कमज़ोर उजागर करना चाहते हैं|

हमें याद रखना चाहिए, जिस क्षण हम अपने आप को कमजोर दिखाते है तो हमे नोचने के लिए,हमारा फायदा उठाने के लिए बहुत सारे गिद्ध तयार बैठे होते है| ऐसा ही कुछ प्रवीण तोगड़िया के साथ हुआ जैसे ही विपक्ष ने महसूस किया कि विश्व हिंदु परिषद -आरएसएस शिविर में कुछ समस्या है तो वह कूद पड़े|कांग्रेस ने तोगड़िया जी का समर्थन किया और भाजपा की आलोचना की। ये लोग तब ये भी  भूल गए की यह उनकी अपनी पार्टी थी जो तोगड़िया को हिंदू आतंकवादी कहती थी और उन्हें 2002 में शांति भंग करने के लिए दोषी ठहराया था|वो कांग्रेस की सहयोगी, समाजवादी पार्टी ही थी जिसने सैकड़ों वीएचपी कार्यकर्ताओं को बाबरी मस्जिद विध्वंस के दौरान मार गिराया था|

लेकिन आश्चर्यजनक ये था की कई हिंदू समर्थकों ने तोगड़िया के कांग्रेस समर्थन का समर्थन किया |वो भी सिर्फ इसलिए क्यूंकि उन्हें प्रधान मंत्री मोदी से नफरत है। क्या वे ये भूल गये की कांग्रेस ने उनके साथ क्या किया था? क्या वे भूल गये की अल्पसंख्यक तुष्टीकरण के नाम पर देश को किसने नष्ट कर दिया है? मुझे तो ये सब कुछ देख के यही समझ आ रहा है की  हमारे लोग का आसानी से मस्तिष्क परिवर्तन किया जा सकता है|हार्दिक पटेल ऐसे समूहों का समर्थन करते हैं जिन्होंने भारत के खिलाफ नारे लगाये, वै उमर खालिद और जिग्नेश मेवानी जैसे लोगों का समर्थन करते है जो पीएफआई और एसडीपीआई जैसे आतंक एजेंसियों से धन प्राप्त कर रहे हैं|तो क्या जो लोग हार्दिक और कांग्रेस का समर्थन कर रहे है क्या वो लोग आतंकवादियों का समर्थन कर रहे है?क्या उन्होंने आतंकवादियों से हाथ मिला लिए है?

70 साल से, कांग्रेस अंग्रेजों के नक़्शे कदम पर चल रही है| विभाजन और शाषण नीति से वे बहुत लोगों को विभाजित करने में सफल हुई है| उन्होंने हिंदुओं के बीच दरार पैदा करदी है और वै दलितों को हिंदुओं से अलग करना चाहती है|वे कर्नाटक में लिंगायत को हिंदू समुदाय से अलग करना चाहती है|उन्होंने पाटीदारों को हिंदुओं से अलग करने की कोशिश की, महाराष्ट्र में दलितों को मराठों से अलग करने की कोशिश की|हरियाणा में जाटों को विभाजित किया| इससे अधिक उदाहरण हम और क्या दे! फिर भी यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग आज भी उनके जाल में फस जाते है|

इन लोगों को याद रखना चाहिए कि कोई विदेशी एजेंसी या विदेशी संस्था का इरादा भारत की मदद करने का नही है| क्या उन्हें लगता है कि हार्दिक पटेल या कांग्रेस जैसे लोग जो भारत को जाति और धर्म के नाम पर तोड़ने के लिए विदेशी धन लेते है वे भारतीय को एकजुट करने के लिए कुछ करेंगे|क्या वे मानते हैं कि वे तोगड़िया की मदद करेंगे और वे उनकी विचारधारा से सहमत है|ऐसा कुछ नही होगा ये लोग केवल अपना मतलब निकालने के लिए तोगड़िया का इस्तेमाल करेंगे और आखिर में उनके साथ विश्वासघात करेंगे जैसे उन्होंने कई लोगों के साथ किया है।

देश धीरे-धीरे प्रगति कर रहा है, बहुत लंबे समय के बाद देश अच्छे के लिए बदल रहा है| लोग देश से अब कुछ उम्मीद लगाये बैठे है और भारत विश्व स्तर पर सम्मान भी वापस प्राप्त कर रहा है। हमें अपने अहंकार और आपसी मतभेद के चलते उसे नष्ट नहीं करना चाहिए|अब ये उन बुद्धिमान लोगों को तय करने के लिए कि क्या वे एकजुट होकर देश की मदद करना चाहते है या विभाजित होकर भारत  विरोधियाँ के गिरोह की मदद करना चाहते है|

भारत को मेरी और से शुभकामनायें …..

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