सैन्य सुरक्षा

सैन्य मुद्दो पर मचता बवंडर

थोड़ा अजीब है पर जरूरी भी । बांदीपोरा एनकाउंटर व् तवांग का वायुसेना हेलीकाप्टर हादसा

बांदीपोरा में थोड़ी देर पहले एक एनकाउंटर हुआ जिसमें 2 सेना के जवान शहीद हुए .. बड़ा ही ह्रदय विदारक दृश्य होगा। रक्त रंजित जवानो के शव या तो फौजी गाडी में रखे गए होंगे या किसी सुरक्षित स्थान पर रखे गए होंगे ।

1) सेना किसी भी प्रकार की गतिविधियों में शव ले जाने वाले ताबूत साथ लेकर नही चलती
2) इस प्रकार के ऑपरेशन में कैमरा निषेध होता है
3) कोई भी सैनिक या उनके कमांडर किसी भी प्रकार की स्थिति से निपटने के लिए तैयार होंगे पर किसी भी सैनिक की मृत्यु के लिए वो शायद की पहले से रेडी होकर गये होंगे
4) एनकाउंटर साइट या हादसे वाली जगह से शहीद की पार्थिव देह को बेस तक लाने में कठिनाई होगी क्योंकि जीवित सैनिक और शहीद सैनिक में बड़ा फर्क पैदा हो जाता है,हो सकता है कि स्ट्रेचर भी उपलब्ध न हो और ये केन प्रकारेण जवान को मेडिकल क्रियाविधि के लिए मिलिट्री हॉस्पिटल तक लाया जाना है। जो वास्तविक सैनिक है वो मेरी बात समझ रहे होंगे । ठीक ऐसा ही तवांग में वायुसेना का हेलीकाप्टर जब जलते हुए सैनिको के साथ एक घने जंगल मैं गिरा तो रेस्क्यू टीम के सामने भी यही स्थिति उत्पन्न हुई ..

अब इस दौरान कोई उन पार्थिव देह की फोटो सोशल मीडिया में प्रचारित कर दे और कहे की देखो मोदी सरकार में सैनिको का कितना भयानक अपमान हो रहा है.. तो एक बहुत ही नकारात्मक सन्देश समाज में जायेगा और यदि कोई भूतपूर्व लेफ्टिनेंट जनरल जो मोदी विरोधी हो का ट्वीट आग में घी का काम करेगा।

तो सेना के मुद्दे पर कुछ भी कहे पर पहले थोड़ा सा व्यवहारिक ज्ञान तो प्राप्त करे की हमारी सेना काम कैसे करती है… IMA, देहरादून की पासिंग आउट परेड का नजारा और युद्धक्षेत्र में बहुत फर्क है


Vishal Sharma

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