अर्थव्यवस्था

मॊदी जी की नोट बंदी ने सारा खेल ही बदल कर रख दिया अब तो वैश्विक मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने भी मोदी जी को सराहा

जब से नॊट बंदी हुई है, भारत के गली गली में अर्थ शात्रज्ञ पैदा हॊ गये हैं। नॊट बंदी के शिकार भ्रष्ठ लॊग मॊदी जी को कॊस रहे हैं जब की आम जनता आज भी मॊदी जी के इस कार्य को सराह रहा है। अब तो वैश्विक मुख्य कार्यपालक अधिकारी क्रिस्टलीना जॊर्जिविया ने भी माना है की मॊदी जी का नॊट बंदी का कार्य भारत के अर्थ व्यवस्ता को सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन करने में मुख्य भूमिका निभा रहा है। मोदी जी कि आर्थिक नीतियॊं से देश का विकास बहुत ही तेजी से हॊ रहा है यह तो विश्व बैंक ने भी माना है।

नॊट बंदी ने भ्रष्ठाचार और काले धन के विरुद्ध बडी सफलता पाई है और देश को स्वच्छ अर्थ व्यवस्ता की तरफ़ ले जा रहा है।

नोट बंदी के बाद १७.७३ लाख संदेहात्मक मामले सामने आये हैं जो कर के रूपरेखा से मेल नही खा रहे थे।

बैंकॊं में जमा करीब ३.६८ लाख करॊड रुपए शक के दायरे में आ गयी है। १६२६ करॊड रूपए के बेनामी संपत्तियों को जब्त किया गया है।

२.२४ लाख आवरण कंपनियओं पर कुल्हाडी पडगयी है। ऐसि १०० से अधिक कंपनिया थी जिसमें हर एक कंपनी के पास २१३४ बैंक खाते थे।के

कश्मीर में पत्थर फेंकनेवाली समस्या में पिचले साल के मुकाबले में ७५% कमी आई है।

७.६२ लाख की जाली नॊट को उघाडा गया है। देश में जाली नोटॊं का करॊबार बंद हॊने के कारण पाकिस्तान और चीन चिंता में डूबा है।

जो पैसे बैंक के बाहर पडे थे वे बैंको में जमा होने के कारण नकदी में सुधार आया है।

डिजिटल भुगतान को महत्वपूर्ण प्रॊत्साहन मिल गया है जिससे काले धन पर काबू पाया जा सकता है।

संपत्ती प्रबंध के अंतर्गत म्यूचुवल फ़ंड्स अपने सार्वकालिक उच्च स्तर पहुँचते हुए इस सितंबर के अंत तक २०.४ त्रिल्लियन दर्ज किया है।

रीयल एश्टेट के कीमतॊं पर गिरावट देखने को मिल रहा है जिससे संपत्ती या घर खरिदना आसान हॊ रहा है।

बैंकों के ऋण दर में गिरावट आने के कारण लॊने लेने और भुगतान करने में सुविधा प्राप्त हॊ रही है।

वामपंथी अतिवाद में २०% की कमी आई है और नक्सलवादी मुख्य धारा में जुड रहें हैं।

देश का ३३% प्रतिशत काला धन बैंको में जमा हॊ चुका है और जगह जगह छापे पड रहे हैं ताकी देश का सारा काला धन मुख्य धारा में आ सके।

व्यापार सुगमता आँकडा १०० वें पायदान पर पहुँचगया है जो आज तक का सर्वाधिक आँकडा है।

इतना कुछ हो गया और हो रहा है। देश की अर्थ व्यवस्था में सुधार और परिवर्तन आ रहा है और देश प्रगती का प्रदर्शन कर रहा है फिर भी विरोधी कह रहे हैं की नॊट बंदी विफल रहा और मॊदी जी ने देश को लूटा। सही है मॊदी जी ने लूटा तो ज़रूर लेकिन देश को नहीं देश के पैसे को चोरी कर के मेवा खानेवाले लोगों को लूटा है।


Sharon Shetty

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