अर्थव्यवस्था

भारत माला परियोजना क्या है? कैसे ये भारत को पड़ोसी देशों के साथ व्यापार बड़ाने में मदद करेगी?

 

भारतमाला परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम(सीमावर्ती क्षेत्रों को जोड़ने, अंतर्राष्ट्रीय, बंदरगाह और तटीय कनेक्टिविटी में सुधार के बाद और प्रमुख आर्थिक और वाणिज्यिक केंद्रों को जोड़ने वाले राजमार्ग के गलियारों के विकास) के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी राजमार्ग निर्माण परियोजना है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 25 अक्टूबर को इसकी मंजूरी दी|इसके तहत 2022 तक 6.9 लाख करोड़ रुपये के निवेश से  83,000 किलोमीटर सड़कें विकसित करने और विस्तार करने का लक्ष्य है।

भारतमाला परियोजना में 9,000 किमी आर्थिक गलियारों, 6,000 किमी अंतर-गलियारे और फीडर मार्ग, 5,000 किलोमीटर राष्ट्रीय गलियारों में दक्षता सुधार, 2000 किलोमीटर की सीमा सड़कें और अंतर्राष्ट्रीय कनेक्टिविटी, 2,000 किलोमीटर तटीय सड़कों और बंदरगाह कनेक्टिविटी और 800 किलोमीटर की ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे शामिल हैं।

भारतमाला चरण -1 में उपरोक्त के इलावा 10,000 किलोमीटर की सड़कों को राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम के तहत  2017-18 से 2021-22 तक कार्यान्वित किया जाएगा, जिसके बाद इसका विस्तार 34,800 किलोमीटर तक ले जाया जाएगा कुल 5,35,000 करोड़ की लागत के साथ|

राष्ट्रीय गलियारे का विस्तार लगभग 5,000 किलोमीटर चरण -1 में 100,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर उठाया जाएगा। लगभग 26,200 किलोमीटर आर्थिक गलियारों, 8,000 किमी अंतर- गलियारों और लगभग 7,500 किलोमीटर फीडर गलियारों को इस परियोजना के अंतर्गत लिया गया है।

“इस प्रकार, भरतमाला के लिए समग्र परिव्यय और सभी मौजूदा योजनाओं को एक साथ जोड़कर 6,92,324 करोड़ रुपये पांच साल में खर्च होंगे|

भारतमाला परियोजना देश के पश्चिमी हिस्से गुजरात से पूर्वी छोर मिज़ोरम को जोड़ेगी| ये पहला प्रजेक्ट है जिसमे चीन के करीब लगी सरहद के पास सड़क को बनाया जायेगा| भारतमाला देश के 50 राष्ट्रीय गलियारों का निर्माण करेगी जो वर्तमान में छह है।सत्तर से 80 प्रतिशत माल ढुलाई राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ-साथ आगे बढ़ेगी जो मौजूदा 40 प्रतिशत है। यह कार्यक्रम वर्तमान में लगभग 300 जिलों की तुलना में राष्ट्रीय राजमार्गों के जरिए 550 जिलों को जोड़ने में मदद करेगा।

 

भारतमाला परियोजना निर्माण कार्य में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा करेगी।इस परियोजना का लक्ष्य है कि अगले पांच सालों में देश भर में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे|

कैसे ये भारत को पड़ोसी देशों के साथ व्यापार बड़ाने में मदद करेगी?

अपने पड़ोसी देशों नेपाल और बांग्लादेश के साथ व्यापार को बढ़ाने और सुगम बनाने के लिए भारत बड़े हाइवे कॉरिडोर्स को अंतरराष्ट्रीय ट्रेड पॉइंट्स से जोड़ेगा। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि पड़ोसियों के साथ व्यापार बेहतर करने के लिए इस प्रॉजेक्ट पर 25 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रॉजेक्ट के तहत 2 हजार किलोमीटर लंबे हाइवे बनाए जाएंगे जो नेपाल और बांग्लादेश के बॉर्डर तक पहुंचेंगे।

अंतरराष्ट्रीय ट्रेड पॉइंट्स से हाइवे कॉरिडोर्स को जोड़ने के लिए 2000 किलोमीटर लंबे हाइवे बनाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इसके जरिए नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार के साथ व्यापार को सुगम बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह प्रॉजेक्ट ‘भारतमाला परियोजना’ का हिस्सा होगा यानी उसी के अंतर्गत बनाया जाएगा।

प्रॉजेक्ट की फंडिंग के बारे में पूछे जाने पर गडकरी जी  ने बताया कि भारतमाला की कुल लागत, 5.35 करोड़ रुपये में से 2.37 करोड़ रुपये केंद्रीय रोड फंड से, 2.05 लाख करोड़ रुपये बाजार से उधार लेकर, 34 हजार करोड़ रुपये हाइवे प्रॉजेक्ट्स के मुद्रीकरण से और 60 हजार करोड़ रुपये बजट आवंटन से आएंगे।

गडकरी जी  ने बताया कि हाइवे कॉरिडोर्स को अंतरराष्ट्रीय ट्रेड पॉइंट्स से जोड़ने के अलावा कई और परियोजनाएं पूरी की जाएंगी जिनका उद्देश्य भारत की दक्षिण एशियाई और आसियान देशों के साथ इंटरनैशनल कनेक्टिविटी बेहतर करना होगा। उन्होंने बताया कि नेपाल के तराई इलाके में सड़क ढांचे को मजबूत करने का समझौता 2016 में हुआ था।

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