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भारतीय वायुसेना को मिला महिला शक्ति का साथ; पहली बार 3 महिलाएं हवाई सरहदों की रखवाली को तयार

 

भारत में कन्या और महिला को एक तरफ तो शक्ति का प्रतीक माना जाता है, वहीं दूसरी और महिलाओ पे होने वाले भेदभाव और अत्याचारों की भी लम्बी कहानी है| भारत के कुछ हिस्सों में तो पुरुष-महिला अनुपात भी बहुत बुरी तरह से बिगड़ा हुआ है| इससे हमारा सामाजिक तानाबाना भी बिगड़ गया है|

प्रधानमंत्री मोदी ने भी प्रधानमंत्री का पद सँभालने के बाद इस समस्या पे काफी अच्छे और कड़े कदम उठाये| कन्याओ के लिए स्कूल में टॉयलेट जैसी मूलभूत सुविधा के लिए काफी बड़ा कदम भी उठाया गया| पिछले कुछ समय में स्थिति में बदलाव आता भी दिखा है और अब ऐसे क्षेत्रो में भी महिलाओ को एंट्री दी जा रही है जो पहले महिलाओ के लिए असंभव माने जाते थे|

आज हम आपको एक ऐसी प्रेरणादायक खबर सुनाने जा रहे हैं जिससे आपको बढ़ती हुई महिला शक्ति का अंदाजा होगा|सेना का क्षत्र शुरू से ही महिलाओ के लिए दुर्गम और कठिन माना जाता था लेकिन अब धीरे धीरे इन क्षेत्रो में भी महिलाओ का स्वागत किया जा रहा है|

जोधपुर में इंडियन एयरफोर्स की पहली तीन महिला फाइटर पायलट की पश्चिमी मोर्चे पर तैनाती कर दी गई है। इन्हें पाकिस्तान से सटे बॉर्डर के फॉरवर्ड एयरबेस पर मिग 21 बायसन से देश के आसमान की रखवाली करने का मौका मिला है। फाइटर स्ट्रीम में दो साल पहले बतौर फाइटर पायलट कमीशन प्राप्त कर चुकी फ्लाइंग ऑफिसर भावना कांत को हरियाणा के अंबाला, फ्लाइंग ऑफिसर अवनी चतुर्वेदी को राजस्थान के सूरतगढ़ और फ्लाइंग ऑफिसर मोहना सिंह को बाड़मेर के उतरलाई एयरबेस पर मिग 21 बायसन की स्क्वाड्रन में पोस्टिंग मिली।

– एयरफोर्स के प्रवक्ता विंग कमांडर अनुपम बैनर्जी का कहना है कि एयरफोर्स की तीनों महिला पायलट की कलाईकुंडा में अंतिम फेज की ट्रेनिंग पूरी होने के बाद फाइटर पायलट के रूप में ऑपरेशनल एयरबेस पर तैनाती की गई है।

– तीनों महिला पायलट की पहले फेज की ट्रेनिंग हैदराबाद के पास डूंडीगल में एयरफोर्स अकादमी में हुई है। यहां पिलाट्स ट्रेनर एयरक्राफ्ट पर 55 घंटे की उड़ान पूरी की।

– इसके बाद हाकिमपेठ में दूसरे फेज की ट्रेनिंग किरण विमान पर हुई। यहां 87 से 90 घंटे की उड़ान छह माह की अवधि में पूरी करने के बाद 18 जून 2016 को तीनों को फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में एयरफोर्स में कमीशन मिला था।

– तीसरे फेज की ट्रेनिंग के लिए इन्हें पूरे 40 पायलट के बैच के साथ कर्नाटक के बिदर एयरबेस पर भेजा गया। वहां से तीसरे फेज की पहली स्टेज के तौर पर हॉक्स ट्रेनर विमान उड़ाने की ट्रेनिंग मिली।

– इसके बाद तीसरे फेज की दूसरी स्टेज के लिए पश्चिम बंगाल के कलाईकुंडा में हॉक्स विमान पर प्रतिकूल मौसम और विपरीत हालात में विमान उड़ाने का प्रशिक्षण मिला। यहां करीब 150 घंटे तक एडवांस जेट ट्रेनर हॉक्स पर ट्रेनिंग दी गई। तीसरे फेज की ट्रेनिंग पूरी होने के बाद ये महिला पायलट 250 घंटे तक विमान उड़ाने का प्रशिक्षण ले चुकी हैं।

– अब इन्हें देश का पहला सुपरसोनिक विमान मिग 21 बायसन उड़ाने का मौका को-पायलट के रूप में मिलेगा।

– इनके साथ सीनियर पायलट इंस्ट्रक्टर के रूप में इन्हें लड़ाकू रोल की ट्रेनिंग देंगे, जिसमें दुश्मन के ठिकानों को तबाह करने से लेकर हवा में ही दुश्मन को ढेर करने, दिन के साथ रात में भी लड़ाकू विमान उड़ाने का प्रशिक्षण मिलेगा। फिर ये रात में हवाई सरहदों की रखवाली करेंगी।

अब पूरा विश्व नारी शक्ति को समझेगा और ये जान पायेगा क्यूँ हम भारत को माता और काली को कलयुग का विनाशक कहते है|

नारी शक्ति  जिंदाबाद !!!

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