संस्कृति

पाकिस्तान का शिव मंदिर जिसकी आधार शिला स्वयं श्री कृष्ण भगवान ने रखी थी और अपने हाथों से शिव लिंग बनाया था

पाकिस्तान, जो कभी अखंड भारत का हिस्सा हुआ करता था, वहां भारत के प्रागैतिहासिक युग से जुड़े कई मंदिर और स्मारक है जो आज क्षत-विक्षत हो चुके है। पाकिस्तान में महाभारत काल से जुड़ा एक मंदिर है जिसकी आधार शिला भगवान श्री कृष्ण ने रखी थी और मंदिर के शिव लिंग को उन्होंने अपने हाथों से बनाया था। इस पुरातन मंदिर का नाम है कटास राज शिव मंदिर। इस मंदिर का उल्लेख महाभारत में भी किया गया है। इस मंदिर के समीप जो तालाब है उसे अमर कुण्ड नाम से जाना जाता है।

कटास राज मंदिर पाकिस्तानी पंजाब के उत्तरी भाग में नमक कोह पर्वत शृंखला में स्थित है। इस मंदिर के समीप एक तालाब है। पुराण पुण्य कथाओं के अनुसार यह तालाब भगवान शिवजी के अश्रु बिंदुओं से बना है। शिवजी की अर्धांगिनी सती देवी अपने पिता दक्ष के यज्ञ कुंड में कूदकर प्राणॊं की आहुती देती है। जब यह बात शिवजी को पता चलती है वे दुखी और क्रॊधित हॊते हैं। दुखी शिवजी के आँखों से अश्रु टपकते हैं। उनमें से एक बिंदु कटास राज के तालाब में गिरता है जो अमृत कुण्ड बन जाता है और दूसरा अजमेर राजस्तान के पुष्कर राज तालाब में जा गिरता है। इसिलिए यह दोनों स्थल हिन्दुओं के लिए पवित्र और पूजनीय है।

महाभारत में इस मंदिर का उल्लेख है। द्वापरयुग में पांडव जब वनवास कर रहे थे तब उन्होंने इसी मंदिर में शरण लिया था। मान्यताओं के अनुसार यह वही कुण्ड है जहाँ पांडव प्यास लगने पर पानी की खोज में पहुंचे थे। इस कुण्ड पर यक्ष का अधिकार था और बिना यक्ष के अनुमति लिए इस कुण्ड से कॊई पानी नहीं पी सकता था। जो भी व्यक्ति इस कुण्ड से बिना अनुमती के पानी ग्रहण करता वह तुरंत ही मूर्छित हॊ जाता था। जब चारॊं पांडव एक एक करके इस कुण्ड से पानी ग्रहण करने जाते है तो यक्ष उनसे प्रश्न पूछते हैं लेकिन उसका उत्तर पांडव नहीं दे पाते और बिना उत्तर दिये ही तालाब से पानी ग्रहण करते हैं और मूर्छित हॊ जाते हैं।

अंततः युधिष्टिर भाइयों की खॊज करते हुए कुण्ड के पास पहुंचते हैं तब उनका सामना स्वयं यक्ष से हॊ जाता है। जब युधिष्टिर अपने भाईयों का जीवन दान मांगते हैं तब यक्ष उनसे कई प्रश्न पूछते हैं जिसका सही उत्तर देकर युधिष्टिर अपने भाइयों को स्वस्थ कराते हैं। इस तालाब में स्नान करने से मनुष्य के सारे पाप धुल जाते हैं और वो सर्व रॊग से मुक्त हो जाते है। कटासराज में भगवान शिव के अलावा राम मंदिर और अन्य देवी देवताओं के भी मंदिरॊं का समूह है जिन्हें सात घरा मंदिर परिसर कहा जाता है। पाकिस्तान में 300 से अधिक मंदिर हैं जो की आज शिथिल हॊ चुके हैं।

कटास राज के अमृत कुण्ड परिसर को पाकिस्तान सरकार ने एक सिमेंट फैक्ट्री कॊ देने की तयारी कर लिया था। लेकिन वर्ष 2005 में जब लाल कृष्ण आडवाणी जी पाकिस्तान गए थे तब उन्होंने इस मंदिर के जीर्णोद्धार करवाने का आग्रह पाकिस्तान सरकार से किया। तत्पश्चात पाकिस्तान सरकार की ओर से मंदिर के जीर्णोद्धार का काम शुरू किया गया है। इस मंदिर के परिसर में किये गये उतखनन से यह बात पता चला है की यह मंदिर करीब 6000 और 7000 BCE बीच में बनाया गया है। इस परिसर में मिले प्रागैतिहासिक वस्तुएं, पशु-पक्षियों के अस्थियों से ऐसा प्रतीत होता है कि यह हरप्पा के नागरिकता के काल के वस्तुएं हैं।

पुरातत्व विभाग के अनुसार यहां मिले वस्तुएं जैसे कुल्हाडी, ग्रानाइट से बनें चाकू, महिलाओं के टेराकोटा चूडियां और मिट्टी के बरतन लगभग उसी प्रकार है जो हरप्पा के उतखनन में पाये गयें हैं। हालांकि इन वस्तुओं की कार्बन डेटिंग करवाना अभी बाकी है। लेकिन इतना तो सत्य है कि इस मंदिर का भारत से बहुत पुराना और गहरा संबंध है। चौथी सदी में भारत आये चीन के बौद्ध भिक्षु फ़ाक्सियन और सातवीं सदी में आये क्सुएनक्सांग जैसे पर्यटकों ने भी अपने प्रवास कथन में कटास राज मंदिर का उल्लेख किया है। सिखों के गुरू श्री गुरु नानक साहिब भी इस मंदिर में शिवजी के दर्शन के लिए जाते थे। सिख साम्राट रणजीत सिंह भी कटास राज के अनन्य भक्त थे। इस मंदिर के पास तीसरी सदीं में बनाई गयी दस कमानों से घिरा हुआ अशॊक का 200 फीट लांबा स्थूप भी हुआ करता था।

भारत-पाक विभाजन काल तक इस मंदिर की बड़ी मान्याता रही । हर वर्ष करोड़ों शृद्धालू शिवरात्री के समय कटास राज मंदिर में शिव दर्शन और अमर कुण्ड में तीर्थ स्नान करने जाते थे। विभाजन ने ना केवल भूमी को बांट दिया अपितु हमारी सदियों पुरानी संस्कृती, सभ्यता, धरोहर और आस्था के स्थलों को भी बांट दिया है। दुख इस बात का है कि भारत में मुसलमानों के मस्जिद-दर्गा आज भी सुरक्षित है और पाकिस्तान में हिन्दुओं के लगभग सारे मंदिर तबाह हॊ चुके हैं। हिन्दु धर्म सहिष्णु है इस बात का निदर्शन यही है की हम किसी की आस्था में बाधा नहीं डालते हैं।

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