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जिसका नाम सुनके आतंकवादी नींद में भी थर-थर काँपते हैं उसे अजित धोवल कहते हैं। भारत के असली ‘जेम्स बॉन्ड’; नाम तो सुना ही होगा…

एक ज़माना हुआ करता था, देश में आतंकवादी खुले आम घूमते थे। अपनी मन मरज़ी से ठाठ से जीवन व्यतीत करते थे। भारत में जहाँ तहाँ हमला करते थे, बम फॊडते थे, निर्दॊष लोगों को मौत के घाट उतारते थे। इनकी वकालत स्वयं काँग्रेस के महामहिम किया करते थे। इनकी फ़ांसी रुकवाने के लिए आधी रात में न्याय पालिका के दरवाज़े खोले जाते थे। आतंकवादी भारत को अपने बाप का माल समझकर आराम से रहा करते थे।

लेकिन वक्त बदल गया। सत्ता इन के आकाओं के हाथ से चली गई और मोदीजी के हाथ में आ गयी। अब इनकी उल्टी गिनती शुरू हुई। सारे आतंकवादियॊं की होश उड गए और अपने बिल में जाकर छुप गये। उनकी नींद तब उडगयी जब मोदीजी ने राष्ट्रीय सुरक्षा का ज़िमा अजित धॊवल के हाथों में सौंप दिया। आज आतंकवादी इनका नाम सुनकर थर-थर काँपते हैं। चूहॊं की तरह बिल में छुपे इन देश के गद्दारों को धोवल ढूँढ़ -ढूँढ़ कर बाहर निकाल रहे हैं और रगड रगड के धॊ रहें हैं।

‘अजित धोवल’, नाम ही काफी है। इन्हें भारत का ‘जेम्स बॉन्ड’ कहते हैं। 1988 अमरित्सर के स्वर्ण मंदिर में सिख प्रत्येकतवादियॊं की खलिस्तान आंदॊलन को विफल करने का श्रेय धॊवलजी को ही जाता है। वे एक ऑटॊ रिक्षा चालक के भेस में मंदिर के अंदर दाखिल होते हैं और प्रत्येकतावादियॊं को यह एहसास दिलाते हैं की वे पाकिस्तान की तरफ से खलिस्तान समझौते के ऊपर बातचीत करने के लिए आये हैं।

धॊवल जब अंदर गये तो देखा की मंदिर के अंदर २०० लोग मौजूद थे और सरकार द्वारा ली गयी एक गलत निर्णय आत्मघाती साबित हो सकता है। इसलिए उन्हॊंने उपाए किया की मंदिर के अंदर जानेवाली पानी के नल और बिजली की तार को ही काट दिया जाए ताकी बदन झुलसादेनेवाली गर्मी के कारण आतंकी घुटने टेक ने पर विवश हो जाए। 1999 कंदहार विमान अपहरण के समय में भी भारत सरकार को अजित धोवल जी की ही सहायता लेनी पडी थी।

किसी अंग्रेज़ी फिल्मों के जेम्स बॉन्ड हीरॊ की ही तरह काम करते हैं धोवलजी। देश की आंतरिक सुरक्षा हो या वैश्विक कूटनीती हो, धॊवल जी का मुकाबला कॊई और नहीं कर सकता। म्यानमार में घुस कर आतंकवदियॊं के छक्के छुडाना हो या फिर पाकिस्तान के अंदर जाकर सर्जिकल स्ट्राईक करना हो, तिर्किट में फसें भारत की नर्सों को सुरक्षित वापस लाना हो या सरहद पर घुसपैठ करनेवाले आतंकियों को जन्नत के हूरॊं तक पहुँचाना हो या फिर चीन की आँखों में आखें डाल उन्हे ढ़ॊकलाम से खदेडना हो कॊई भी काम धॊवलजी के लिए असंभव नहीं है।

अपने पूरे कार्यकाल में धोवल जी बांग्ला ,चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मन देश के भीतर जाकर उनके नाक के नीचे से गुप्त जानकारियाँ हासिल करते रहे। भारतीय पुलिस सेवा में भर्ती होने के केवल 6 वर्षॊं में पुलिस मॆडल पानेवाले पहले और इकलौते अफ्सर है धॊवलजी। भारत के प्रति इनके कार्यतत्परता के लिए इन्हें देश की दूसरी सबसे बडी उपाधी कीर्ती चक्र से सम्मानित किया गया है।

२००९ में धोवलजी ने विवेकानंदा इंटरनेशनल फ़ौंडेषन नामक विशेषज्ञ समूह बनाया है। देश की आतंरिक सुरक्षा के विषय में धोवलजी लेख लिखते हैं साथ ही साथ देश विदेश में व्याख्यान भी देते हैं। देश से बाहर विदेशी बैंको में जमा कराई जानेवाली कालेधन के विषय में एक रिपॊर्ट भी इन्होंने तयार किया है। कालेधन के खिलाफ़ लडने के लिए भाजपा द्वारा टास्क फोर्स भी बनाई गयी है। जब से भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी धॊवलजी ने संभाला है तब से आतंकवादियॊं की एक नहीं चल रही है।

भारत के अंदर के गद्दार और दुश्मन देश दोनों इस ‘फाँटम’ से परेशान है। भारत की पाकिस्तान के प्रती बचाव  की रणनीती को खारिज कर आक्रामक रणनीती अपनाकर दोनों तरफ से निचॊडने का मास्टर प्लान के वजह से सरहद पर घुसपैठ करनेवाले २०० से अधिक आतंकियों को उनके जन्नत के 72 हूरॊं के पास भॆज दिया गया है। आगे और आतांकवादी कतार में खडे हैं जल्द ही उन्हें भी जन्नत भेज दिया जाएगा।  इसका सारा श्रॆय धॊवल्जी को ही जाता है।

भारत के इस वीर पुत्र, देश के असली ‘जेम्स बॉन्ड’ को देशप्रेमियों का साष्ठांग दंडवत प्रणाम।


Shaanyora

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