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गुरुद्वारा बंगला साहिब के लंगर ने विश्व रिकॉर्ड बनाया: बंगला साहिब लंगर सेवा को लंडन का सम्मान मिला।

हिन्दुओं और सिखों के दरबार से कभी कोई जीव जंतू या मनुष्य भूखा नहीं जाता। हिन्दुओं के मंदिर तथा सिखों के गुरुद्वारॊं में साल के तीन सौं पैंसठ दिन अन्नदान यानी लंगर लगता है। बिना किसी जात-पात और भेद भाव के समाज का हर व्यक्ति निशुल्क अपना पेट भर कर प्रसन्न हो कर जा सकता है। सिखों के लंगर ने भारत में ही नहीं बल्कि लंडन में भी अपने कीर्ती को स्थापित कर दिया है। दिल्ली में स्थित गुरुद्वारा बंगला साहिब के लंगर ने नया विश्व रेकॉर्ड बनाया है।

गुरुद्वारा बंगला साहिब दिल्ली के सबसे महत्वपूर्ण गुरुद्वारों में से एक है। गुरुद्वारे की गुम्बद स्वर्ण मंडित है। यह नई दिल्ली के बाबा खड़गसिंह मार्ग पर गोल मार्किट, नई दिल्ली के निकट स्थित है। इस गुरुद्वारे में प्रतिदिन लगभग पंद्रह हज़ार भक्त आते हैं। हर दिन यहां पर चालीस हज़ार लोगों का लंगर लगता और साहिब के दरबार से कॊई भी भूखा नहीं लौटता। त्यॊहारॊं के दिन गुरुद्वारे में आनेवाले  लोगों की संख्या करीब एक लाख तक पहुंच जाती है।

प्रतिदिन लगनेवाले इस लंगर को अब लंडन का सम्मान मिल गया है। गुरुद्वारा साहिब के लंगर ने नया विश्व रेकॉर्ड बनाया है। गुरुद्वारा साहिब का लंगर लंडन वर्ल्ड बुक ऑफ़ रेकॉर्ड में शामिल किया गया है। इस गुरुद्वारे में 24 घंटे लंगर सेवा चलती है। औसतन रोजाना लगभग 40 हजार लोग लंगर छकते हैं। वहीं, रविवार व अन्य अवकाश और त्योहार के दिनों में गुरुद्वारे में भीड़ बढ़ने के साथ ही लंगर छकने वालों की संख्या भी बढ़ जाती है। गुरुद्वारा परिसर में चलने वाले चिकित्सालय में भी रोजाना 500 के करीब लोगों का निशुल्क उपचार होता है।

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजीत सिंह जी ने कहा कि बंगला साहिब लोगों के लिए आस्था का केंद्र है। लोगों की सहायता के लिए गुरुद्वारा हमेशा तैयार रहता है। राजधानी में पहुंचने वाले आंदोलनकारी भी गुरुद्वारा में पहुंचकर लंगर छकते हैं। बारा आम्टे का भारत जोड़ो आंदोलन, अन्ना आंदोलन से लेकर किसान आंदोलन में शामिल आंदोलनकारियों के लिए यह गुरुद्वारा सहारा बना है। यह गुरुद्वारा मूलतः एक बंगला था, जो जयपुर के महाराजा जयसिंह का था। सिखों के आठवें गुरु, गुरु हर किशन सिंह यहां अपने दिल्ली प्रवास के दौरान रहे थे।

उस समय, चेचक और हैजा की बीमारी से लोग पीड़ित थे और गुरु हर किशन सिंह ने बीमारी से पीड़ित लोगों की सहायता की। लोगों की शुश्रूशा की और उनकी सेवा शुद्ध जल पिलाकर की थी। इस कारण से जल्द ही उन्हें भी बीमारियों ने घेर लिया और 30 मार्च 1664 को उनकी मृत्यु हो गयी। इस घटना के बाद राजा जय सिंह ने एक छोटे पानी के तालाब का निर्माण करवाया था। कई वर्षॊं से इस गुरुद्वारे में लंगर लगता है जहां हज़ारॊं के तादात में आकर लोग भॊजन ग्रहण करते हैं। बंगला साहिब को गुरुद्वारे की आवरण में स्वच्छता के लिए भी पुरस्कार मिल चुका है।

धन्य है सिख और हिन्दू धर्म के तीर्थ स्थल जहां बिना किसी से एक पैसा लिए, बिना जात-पात और अमीर-गरीब के भेद किये हर दिन हज़ारों लोगों को अन्नदान दिया जाता है। ऐसे धर्म में जन्म लेना हमारा सौभाग्य है। बंगला साहिब के दरबार पर नत मस्तक हॊकर हम प्रणाम करते हैं।

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