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क्या है पैगंबर की पत्नी आयशा की दर्दनाक मौत का रहस्य ? जानने के लिए जरुर पढ़े !!!

हमारे यहां ऐसे कई लोग हैं जो हिन्दू धर्म के देवी देवताओं के बारे में तुच्छ वक्तव्य देते हैं। ऐसे लोगों को हमेशा शिवलिंग में अश्लीलता दिखती है, माँ दुर्गा वैष्या लगती, कृष्ण स्त्री लॊलुप लगते हैं लेकिन इनमें से कॊई यह बताने की हिमाकत नहीं करता कि इस्लाम के मसीहा पैंगबर की कितनी बीवियां थी और उनका जीवन कैसा था। क्यॊं की अगर पैंगबर को कुछ कहा गया तो दुनिया भर के मुल्ले गला फाड़ने लगेगें । सब जानते हैं की पैंगबर ने 25 साल की आयु में 40 साल की एक धनवान विधवा खदीजा से शादी की थी। सन 620 ईसवी में खदीजा का देहांत हो गया और इसके बाद मुहम्मद ने फिर सौदा नामक विधवा से शादी कर ली थी| उस समय सौदा 30 साल की और मुहम्मद 50 साल का था।

मुहम्मद के घर के पास अबूबकर का परिवार अबीसीनिया से मदीना आया हुआ था।अबूबकर की दो बेटियां थी जिसमें छोटी का नाम आयशा था जो सिर्फ़ 6 साल की थी। सन 623 में मुहम्मद की शादी आयशा से हुई और उस समय मुहमद की आयु 53 साल थी और अयेशा केवल 6 साल की थी। तीन साल बाद यानी 9 साल की उमर में आयशा मुहम्मद की बीवी के रूप में उसके साथ रहने लगी। मुहम्मद अपनी सारी बीवियॊं से ज्यादा आयशा को पसंद करता था इसीलिए उसने आयशा को “उम्मुल मोमनीन “यानी मुसलमानों की अम्मा का ख़िताब दे दिया।

माना जाता है कि मुहम्मद की सॊलह पत्नियां, दो गुलाम कनिकायें और चार महिला भक्त थीं। इनमें से ज़ैनाब नाम की एक लड़की मुहम्मद के गॊद लिये हुए बेटे ज़ायेद की पत्नी थी। मुहम्मद की सारी बीवियों में से सबसे ताकतवर बीवी थी आयशा। कहा जाता है की मुहम्मद अपनी सभी बीवियों के मुकाबले आयशा को ज्यादा प्यार करता था और उसकी हर गलती को नज़र अंदाज़ करता था। मुहम्मद के ऊपर आयशा का इतना पकड़ था की धीरे धीरे वह राजनीती भी करने लगी और बड़ी चतुराई से उसने अपने पिता अबूबकर को खलीफा भी बना दिया। एक बार जब आयशा “सफ़वान बिन मुत्तल “नामक जवान के साथ पकड़ी गयी तब लोगों ने कानून के अनुसार आयशा को चालीस कोड़े लगाने की मांग की लेकिन मुहम्मद ने कुरान की एक आयत सूरा -अहजाब 33 :53 लोगों को सूना कर कहा(बुखारी -जिल्द 5 किताब 59 हदीस 632) कि अल्लाह ने आयशा को निष्पाप माना है और उसे कोई सजा नहीं हो सकती है।

इस्लाम के शिया लोगों का यह आरोप है कि मुहम्मद कुदरती मौत नहीं मरा था बल्कि उसकी हत्या की गई थी। उनका मानना है कि मुहमद की हत्या में उनकी पत्नियां “हफसा “और “आयशा” का हाथ था। शिया लोगों के अनुसार मुहम्मद को एक साज़िश के चलते मारा गया था। मुहम्मद के मौत के बाद आयशा का प्रभाव ज्यादा बढ़ गया था। जब मुहम्मद की मौत हुई तब आयशा 19 साल की थी। आयशा ने अपने पिता को खलीफा बनाया जब की असल में अली को खलीफा होना चाहिये था। माना जाता है कि आयशा ने अपने पिता को अली के घर पर हमला करने को उकसाया था। इसी तरह आयशा ने 17 जुलाई सन 656 को अपने भाई “मुहम्मद बिन अबू बकर “से खलीफा “उस्मान बिन अफ्फान “की हत्या करवा दी थी।

कहते हैं कि आयशा एक महत्वाकांक्षी औरत थी और अपने रास्ते में आने वाले हर व्यक्ति को वह रास्ते से हटा दिया करती थी। इस कारण से आयशा के कई सारे दुश्मन पैदा हो गये उनमें से एक था मुआविया बिन अबू सुफ़यान जो चौथे खलीफा अली की हत्या हो जाने के बाद सन 661 में खलीफा बन गया था। उसने आयशा की हत्या करने की साज़िश रची और खाने के बहाने आयशा को अपने महल में बुला लिया। उस समय आयशा की आयु 64 के करीब मानी जाती है।

“मुशरफुल मोमिनीन शेखुल तरीकत ,हजरत ख्वाजा महबूब कासिम चिश्ती मुशरफी ने इतिहासकार “इब्ने खुल्दून”के पेज नंबर 616 पर लिखा है कि सन 678 में मुआविया ने एक दिन आयशा को अपने महल में खाने की दावत पर बुलाया। इसके पहले मुआविया ने महल के अंदर एक गहरा गड्ढा खुदवा रखा था और उस गड्ढे में सीधे खड़े हुए भाले और तलवारें गाड़ रखी थी। गड्ढे को लकड़ी के कमजोर पट्टे रख कर ढँक दिया था और उसके ऊपर कालीन बिछाकर आयशा की कुर्सी रखवा दी। जब आयशा महल आयी तब उसे उस कुर्सी पर बैठने को कहा जैसे ही आयशा कुर्सी पर बैठी वह सीधे गड्ढे में गिरी और उसमें लगे भाले तलवारों से उसका शरीर छलनी हो गया और घायल होकर तड़पने लगी। तब मुआविया ने तुरंत उसी समय गड्ढे को भरवा कर समतल करा दिया। इस तरह आयशा बड़ी ही दर्दनाक मौत मारी गयी। ज्यादा जानकारी के लिए दिये गये स्त्रोत को पढ़िये

Source
Encyclopedia of Islamic MythsThe Religion of PeaceWikipedia
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