आध्यात्मिकसंस्कृति

क्या रामायण और महाभारत काल्पनिक कथायें थीं या सत्य घटना पर अधारित महाकाव्य? आप ही तय कीजिए।

भारतवर्ष की विश्व को देन दो अद्भुत, अदम्य और अलौकिक महागाथा जिसे रामायण और महाभारत कहते हैं आज उसे हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढाया जा रहा है। किन्तु जिस देश में रामायण और महाभारत लिखी गयी है उस देश के कुच वामपन्थि और हिन्दु विरॊधी नीतीवाले अति बुद्दिवान जीवी जन राम और कृष्ण के अस्तित्व को ही झुट्ला रहे हैं।

उनके अनुसार राम और कृष्ण वास्तव में न हॊकर काल्पनिक व्यक्ति हैं। उनके जन्म का कॊयी प्रमाण नहीं है। रामायण और महाभारत में विद्यमान घटनाओं को वे झूठ बताते हैं। किन्तु यही लॊग जीसस और अल्लाह कॊ ऎतिहासिक व्यक्ती बताकर उनका जयकार करते हैं। अपनी राजनैतिक रोटी सेंकनॆ हेतु वे हमॆशा हिन्दु सभ्यता, संस्कृति और देवी-देवताओं का अपमान करतें हैं।

लेकिन तथ्य यही बताती है कि रामायण और महाभारत केवल काल्पनिक कथा न हॊकर वास्तव में घटी घट्नाओं के आधार पर लिखी गयी है। राम सेतु के बारे में रामायण में उल्लेख है जिसे आज हम उपग्रह के माध्यम से देख सकते हैं। सुन्दरकांड में चार दाँतॊंवाले हाथी का उल्लेख है जिसे हनुमान ने रावण के आस्थान में देखा था। इस हाथी कॊ आज के विज्ञानीयॊं ने ’गोम्फॊथिरिडे’ नामांकन किया है। जितने भी व्याख्यान रामायण मे आते हैं वे करीब ३००० ई सा या उससे भी ज्यादा पुरानी काल में घटित प्रमाणित हॊते है।

१९७५ के दौरान जब भारत सरकार के पुरातत्व संस्था ने अयॊध्या के मस्जिद के समीप उत्खनन किया तो १४ स्तंभ पाये जिनमॆं हिन्दू कलाकारियाँ पायी गयी। चक्रवर्तिन अशोक साम्राट ने लुम्बिनि में एक स्तंभ बनवाया था जिसमें राम और बुद्ध के वहाँ भेंट करने का उल्लेख किया गया है। साम्राट अशोक भी राम के अस्तित्व को मानता था। सिर्फ वामपंथी और तथाकथित बुद्धिजीवियों के चिल्लाने से सत्य असत्य नहीं बनता।

रामायण के अनुसार राम का जन्म चैत्र मास की शुक्ल पक्श की नवमी तिथी मे हुया था। उस दिन पुनर्वसु नक्षत्र था और कर्क लग्न था। प्लानेटॊरियं सॉफ्टवेर के अनुसार राम का जन्म १० जनवरी ५११४ ई सा पूर्व हुआ था। इसी सॉफ्टवेर के अनुसार क्रुष्ण का जन्म २० जुलाई ३२२८ हुआ था। यह दिनांक झूटे तो नहीं हो सकते क्यॊं की हम सभी जानते हैं कि राम का जन्म कृष्ण से पहले हुआ था। हाला कि यह सटीक दिनांक हो न हॊ किन्तु संभवता अन्य सॉफ्टवेर भी जन्म तिथी के समय के ग्रहगति के अनुसार केवल एकाद सदी का व्यत्यास बतायेगें।

रामायण की ही तरह महाभारत मे आनेवाले पात्र और जगह भी केवल काल्पनिक न हॊकर वास्तव में है। जिस द्वारका नगर का उल्लेख महाभारत मे है जो समुद्री प्रावाह मे डूब गया था उसे १९८३-१९९० तक के सागर तल के उत्खनन में पाया गया है। करीब ३५ अन्य नगर जिसका उल्लेख महाभारत में है उन्हॆ खॊजा गया है। हस्तिनापुर और इन्द्रप्रस्थ वास्तव में थे। उत्तर भारत में की गयी उत्खनन इस बात की पुष्टी करती हैं। इतिहासकारॊं के अनुसार कुरुक्षेत्र का युद्द ३१०२ के करीब लडा गया था। वहाँ पर पाप्त लोहे के बाणॊं को जब थरमोल्यूमिनन्स परीक्षा के लिये भेजा गया तो वे करीब ३१०० ई सा पूर्व के पाये गये! वहाँ के पत्थरॊं की जब परीक्षा करवायी गयी तो पाया की वे पत्थर सदियॊं पुराने विकिरण से त्रस्त थे।

महाभारत में ब्रम्हास्त्र का भी उल्लेख है जिसे आज के दिन हम परमाणु बंम के नाम से जानते हैं। आज हम जॊ भी वैज्ञानिक वस्तु को देखते हैं वे सभी रामायण और महाभारत में उल्लेखित है। २०१४ में इन्ही प्रदेशॊं में १५ फीट बडे एक कंकाल की खॊज आकस्मिक रूप से हुया था। जिसके शरीर मे सोने जैसे धातु पाये गये थे। किन्तु जब तक अधिकारी स्थल पर पहुँचे लोगो ने उसकी चोरी करली थी।

हमारे पास सारे तथ्य नहीं हैं किन्तु रामायण और महभारत मे उल्लेखित सारे प्रदेशॊं की उत्खनन किया जाये तो दूध का दूध और पानी का पानी हॊ जायेगा। जिस तरह का उल्लेख महाकाव्यॊं मे हुआ है और जिस तरह से उत्खनन में उस काल से जुडी वस्तुवें प्राप्त हॊ रही है इस से प्रमाणित हॊता है कि रामायण और महाभारत केवल काल्पनिक कथायें न हॊ कर वास्तव मे घटी है। अब क्या राम और कृष्ण को धरती पे आकर स्वयं ही बताना पडेगा की वे काल्पनिक व्यक्ति नहीं अपितु वास्तव में थे।


Sharon Shetty


Source:https://knowindia.yolasite.com/ancient-history/mythology-or-history-i-report-you-decide

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