आध्यात्मिकसंस्कृति

कॊणार्क के सूर्य मंदिर का रहस्य: वास्तुकला, विज्ञान, अध्यात्म और खगॊल शास्त्र का अद्भुत संगम।

भारत के वैभवशाली इतिहास के इर्द गिर्द गेहरा कॊहरा छाया हुआ है इसीलिए हमें हमारी धरॊहर का पूर्ण परिचय नहीं हो पाता है। कॊणार्क के सूर्य मंदिर का रहस्य भी कैलाश मंदिर के रहस्य के जैसे ही है। निश्चित ही हमारे पूर्वज हम से अधिक बुद्धिमान थे और उनके पास आज से भी अधिक आधुनिक यंत्र और तकनीक थे जिससे उन्होंने इतने बारीकियों वाले वास्तुकला का निर्माण किया है।

कॊणार्क का सूर्य मंदिर सूर्य देव को अर्पित है। वास्तुकला से ओत प्रॊत कॊणार्क केवल मनॊरंजन के लिए और कला के प्रदर्शन के लिए नहीं बनाया गया है। कॊणार्क में खगॊल विज्ञान और वास्तुकला का संगम है। भारत के सभी मंदिर और वास्तुकलाएं पूर्ण रूप से वैज्ञानिक मापदंडॊ के आधार पर ही बनाया गया है। कॊणार्क में मानव के जीवन से मरण तक की उसकी पांच अवस्था को दर्शाया गया है।

कॊणार्क के निचले भाग में वन्य प्राणियों का चित्रण बाल्य की अवस्था को दर्शाता है। उसके ऊपर का भाग कौमार्य, और उससे ऊपर तारुण्य को दर्शाता है। चौथे भाग में ग्रहस्थ जीवन की अवस्थाओं को दर्शता है और अतंतः सन्यास यानी वानप्रस्थ जहां मानव भगवान की उपासना करते हुए भॊग विलास को त्याग कर वन की ऒर प्रस्थान करता है।यह मानव की मोक्ष की ऒर प्रयाण करने के मार्ग को दर्शाता है। अध्यात्म को कला के माध्यम से सामान्य मनुष्य को समझाने का यह अद्भुत और आसान तरीका है। वेद और उपनिषद के ज्ञान को वास्तुकला के माध्यम से बड़ी ही सरलता से लोगों को समझाया गया है।

कॊणार्क के मंदिर के मंडप में तीन प्रकार के सूर्य की मूर्तियां बनाई गयी है। बाल सूर्य यानी उगता सूरज, युवा सूर्य यानी दॊपहर का सूरज और अस्त सूर्य यानी ढ़लता हुआ सूरज। सूर्य को समर्पित इस मंदिर में सूर्य से ही जुड़े वास्तुकला का परिचय हमें मिलता है। जैसे मंदिर में बनें सूर्य देवता की घड़ी। यह विज्ञान, खगॊल और वास्तुकला का अद्बभुत संगम है। लगभग अशॊक चक्र के जैसे ही दिखने वाला यह चक्र समय को दर्शाता है इसलिए इसे समय का पहिया भी कहा जा सकता है। माना जाता है 750 वर्ष पूर्व यहां के स्थानीय लोग इस घड़ी के द्वारा ही समय निर्धारित किया करते थे। पहली घड़ी पूर्व की तरफ़ है जो सुबह से दोपहर तक के समय को बताती है, दूसरी घड़ी पश्चिम की तरफ़ है जो दोपहर से लेकर शाम तक का समय बताती है। पूरे प्रकार में ऐसे 24 घडियां है जो पूरे दिन के समय को सूर्य और चंद्रमा के प्रकाश के द्वारा आकलन लगाने में सहायता करती है।

इस घड़ी के बीच में भिन्न भिन्न शिल्प कला से साल के चारॊं ऋतुओं को दर्शाया गया है। केवल इतना ही नहीं एक औरत की पूरे दिन की दिनचर्या को भी बहुत ही बारीकियों से यहां शिल्प कला के रूप में दिखाया गया है। पूरे मंदिर में 22 अन्य घड़ियाँ है जो केवल अलंकार हेतु बनाई नहीं गयी है। यधपि उन घड़ियों का निर्माण रात के वक्त समय देखने के लिए बनाया गया होगा! जानकार मानते हैं कि हो सकता है इन्हें चंद्रमा के गति के अनुसार बनाया गया है जिससे रात्री में भी समय का आकलन किया जा सके। निश्चित ही यह मंदिर पुराण के ज्ञान को सामान्य मनुष्य तक पहुंचाने के लिए बनाया गया हॊगा। उगते सूरज से लेकर ढलते सूरज तक की हमारी दिनचर्या, जन्म से लेकर म्रुत्यु तक के हमारे जीवन से जुड़े  पहलू को वास्तुकला के माध्यम से पूर्वजों ने हमको समझाने का प्रयत्न किया है। मंदिर के सामने जो सात घोड़े सूर्य देव के रथ को खींच रहें हैं, वे सूरज के किरणॊं के सात रंग को दर्शाते हैं। हम सभी जानते हैं की सूर्य की किरण में सात रंग है, इसी कारण से सूर्य देवता के रथ को सात घोड़े खींचते हुए चित्रित होते हैं। कॊणार्क के सात घोड़े इंद्रधनुष के रंगों के प्रतीक हैं।

 

अनादी काल से ही हमारे ऋषि मुनियों को परम अलौकोक ज्ञान प्राप्त था और उन्होंने वेद और उपनिषदों द्वारा सृष्टी के रहस्य को भेद कर ब्रह्मांड के कार्य को समझाने का प्रयत्न किया है। वेदों में निहित प्रत्येक श्लोक  में एक गूडार्थ छुपा है और इसमें ही सृष्टी के रहस्य से जुड़े हर सवाल का जवाब भी छुपा है। पश्चिमी देश द्वारा फैलाई गयी मिथक को ही सत्य मानने की हमारी भूल के कारण आज हमें हमारी संस्कृती और सभ्यता में खॊट नज़र आती है। कॊणार्क की वास्तुकला में अनेक रहस्य छुपे हैं। कोणार्क में किसी देवता की पूजा नहीं होती। कहते हैं इस्लामी आक्रांताओं के वार से बचाने हेतु मूल मूर्ती को जगन्नाथ मंदिर ले जाया गया था। यहां का एक और रहस्य है चुंबकीय शक्ती वाले पत्थर। बड़ी ही आश्चर्य की बात है की उस समय इस मंदिर में चुंबकीय पत्थर लगाने की क्या आवश्यकता आन पड़ी हॊगी। भारत के मंदिरॊं के वास्तुकला को केवल मनोरंजन के दृष्टि से न देखकर अध्यात्म और विज्ञान के संगम के दृष्टि से देखा जाये तो इनके अंदर छुपे हुए अनेक रहस्य से परदा हट जायेगा।

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