अभिमतराजनीति

कैसे एक कर्मठ यॊगी ने भारत के ‘यॊग’ को गुफाओं और किताबों से निकाल कर विश्व पटल पर सम्मान दिला दिया।

26 दिसंबर 1965 में हरियाणा राज्य के महेन्द्रगढ़ जनपद स्थित अली सैयदपुर नामक गाँव में गुलाबो देवी एवं रामनिवास यादव के घर एक बालक का जन्म होता है। रामकृष्ण यादव नाम के इस साधारण बालक को देखकर उस समय किसी ने भी यह सॊचा न होगा कि एक दिन वह भारत की संस्कृती, सभ्यता, यॊग व आयुर्वेद के ज्ञान को विश्व भर में सम्मान दिलायेगा। रामकृष्ण यादव अपनी अल्प आयु में ही सन्यास लेकर ‘बाबा रामदेव’ बनजाते हैं। जिस यॊग को भारत ने ही तिरस्कार कर दिया था उस प्राचीन ज्ञान को आज दुनिया भर में पहुंचाने में बाबा रामदेव जी का यॊगदान सबसे बड़ा है।

आज भारत में ही नहीं अपितु दुनिया में ही ‘पतंजली’ नाम सूर्य की तरह प्रकाशमान हो चुका है। अपने स्वदेशी आंदॊलन के कारण बाबा जी ने आज पतंजली उत्पन्न से दुनिया की बड़ी बड़ी MNC कंपनियों को धूल चटादी है। 2016-17 वर्ष में पतंजली कंपनी की सालाना आय ₹10,216 (US$1.6 billion) करोड़ रह चुकी है। पतंजली ट्रस्ट के कारण करीब 200,000 से भी अधिक लॊगॊं को उद्यॊग प्राप्त हुआ है और हज़ारॊं किसानों के जीवन में खुशहाली आई है। पतंजली यॊग पीठ में गरीबों का निशुल्क इलाज किया जाता है। पतंजली की आय का बड़ा हिस्सा सामाजिक सेवा में उपयॊग होता है। कभी किसी ने सॊचा नहीं था की एक देसी कंपनी बड़ी बड़ी विदेशी कंपनियों को मात देकर अग्र स्थान पर पहुंच जायेगी।

बाबा रामदेव जी और आचार्य बालकृष्ण जी के अथक प्रायस और वर्षों की मेहनत का फल आज जाकर हमें मिल रहा है। इसमें बाबा जी और आचार्य जी का निजी लाभ नहीं है लेकिन देश को इससे बहुत लाभ हुआ है। इन दोनों सन्यासियों का सफर आसान नहीं था। बड़ी कठिनाइयों के चलते आज इन दोनों ने इस सफलता को प्राप्त किया है। भ्रष्टाचार और विदेशी कंपनियों के लड़ाई के चलते बाबा जी को अपने प्रिय साथी राजीव दीक्षित को भी खॊना पड़ा था। यूपीए सरकार के कार्यकाल में ही राजीव दीक्षित की रहस्य मयी रूप से मृत्यु हुई थी। बाबा जी और राजीव दीक्षित जी ने मिलकर ‘भारत स्वाभिमान’ आंदॊलन को परवान चड़ाया था जिसमें करोड़ों युवाओं ने इनका साथ दिया था।

बचपन में ही बाबा रामदेव जी पार्श्व वायु से पीड़ित थे। यॊग के कारण ही वे स्वस्थ हुए इसी कारण से उन्होंने यॊग को जन जन तक पहुंचाने का संकल्प ले लिया। बाबा जी ने केवल यॊग को ही नहीं अपितु आयुर्वेद को भी विश्व विख्यात करवाया। इस कार्य में उनका सहयॊग आचार्य बालकृष्ण दे रहे हैं। लगातार बढ़ रही बाबा जी की प्रसिद्धी से विदेशी कंपनीयां, भारत के कांग्रेस और कम्युनिस्ट दलों के निशाने में बाबा जी और उनका पतंजली यॊग पीठ आता रहा है।

बाबा जी ने 2011 में दिल्ली के रामलीला मैदान में उपवास सत्याग्रह करते हुए भ्रष्टाचार के विरुद्ध धरना दिया था। बाबा जी के करोड़ों  अनुयाइयों ने भी आंदॊलन में हिस्सा लिया था। आधी रात में जब सारे सत्याग्रही गहरे नींद में थे तब एका एक दिल्ली पुलिस निर्दोष जनता के ऊपर अश्रु वायु चला दिये और बूढ़े, बच्चे, महिला और साधू-संतॊ पर लाठी चार्ज करवा दिया। अचानक हुई इस घटना से लॊग भयभीत हुए और लाठी चार्ज के वजह से कई लोग घायल भी हुए। उस समय केंद्र में यूपीए सरकार थी और वह बाबा जी को गिरफ़्तार करने का प्रयास कर रही थी और आंदॊलन को विफल बनाने की साजिश भी रच रही थी। कांग्रेस और कम्युनिस्टों की आँखों में बाबा जी इतना खटकते हैं की वे हर हाल में बाबा जी को प्रताड़ित करते हैं और उनके कार्य में बाधा डालने का प्रयत्न करते रहते हैं।

वर्ष 2005 में दिव्य यॊग मंदिर के 113 कर्मचारियों ने वेतन को लेकर सत्याग्रह किया था जिसे बाद में ट्रस्ट द्वारा सुलझाया गया था। लेकिन कुछ कर्मचारियों ने यॊग पीठ में तोड़ फोड़ भी किया था तब आग में घी डालने कम्युनिस्ट पार्टी वहां पहुंची और इस मामले को अपने ‘हाथ’ में ले लिया। कम्युनिस्ट किस ‘मनशा’ से इस मसले में दखल दे रहें हैं यह आप स्वयं अंदाजा लगा लीजिये। इसके एक साल बाद 2006 में कम्युनिस्ट पार्टी की ही नेता ब्रिंदा कारत ने बाबा जी के यॊग पीठ में तयार की जानी वाली औषधियों पर आरॊप लगाया कि उसमें प्राणि जन्य वस्तुएं हैं। इन सारे संधर्भॊं में केंन्द्र में किसकी सरकार थी ज़रा याद कीजिए और इन आरॊपॊं की सच्चाई के बारे में निश्चय कीजिए।

लंबे समय की कड़ी मेहनत, संघर्ष और तपस्या के बाद बाबा जी को सफलता प्राप्त हुई है। 70 वर्षों से जड़े जमाई हुई विदेशी कंपनियों को मात देकर एक स्वदेशी कंपनी को खड़ा करना आम बात नहीं है। बाबा जी ने भारत को केवल विदेशी कंपनियों से मुक्ति  नहीं दिलवाई बल्कि विदेशी कंपनियों की पूजा करने की हमारी मानसिक गुलामी से भी हमें मुक्ति दिलवाई है। भारत के जन मानस के दिलों में आज स्वदेशी कल्पना को उजागर कर भारत माँ की सेवा करने के लिए हमें प्रेरित किया है। पंतंजली की सफलता एक प्रकार से हमारी सफलता है। हमारी देश के प्रति जागरूकता और प्रेम का प्रतीक है, हमारी एकता का प्रतीक है पतंजली। एक ज़माना था जब बड़ी बड़ी  कंपनियां हमारे आयूर्वेद का मज़ाक उड़ाती थी लेकिन आज वहीं कंपनियां आयूर्वेद का चोला पकड़ कर चल रही है। यह बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के प्रयास और हमारी एकता की वजह से संभव हॊ पाया है। इसी प्रकार संगठित रहिए, अफवाओं पर ध्यान मत दीजिए, क्योंकि हम सबको मिलकर ही भारत को विश्व गुरु बनाना है।

भगवाधारी इस कर्मठ योगी का मज़ाक बहुत लोगों ने उड़ाया है। उनकी खिल्ली उड़ाई है, उन्हें बदनाम करने की कोशिश की है। लेकिन बाबा जी ने हार नहीं मानी, वे डटे रहे। आज वे सारे लोग रॊ रहें होगें जिन्होंने एक समय में बाबा जी का मज़ाक उड़ाया था। बाबा जी हम सब के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। यॊग और आयुर्वेद की खोई हुई गरिमा और पहचान को वापस दिलवाने के लिए हम बाबा जी के आभारी हैं और शीष झुकाकर उन्हें प्रणाम करते हैं।

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