संस्कृति

काबा में किसकी पूजा करते हैं मुसल्मान? कया ७८६ का मतलब ‘ओम’ है?

विश्व में किसी और मत-पंथ या धर्म का जन्म भी न हुआ था उससे सदियॊं पूर्व ही सनातन धर्म का परछम सारे भूमंडल में फैला हुआ था। विश्व के कॊने कॊने में हिन्दू देवी देवताओं की मूर्तियाँ और सनातन धर्म से जुडी हुई वस्तुवें उत्खनन में पाई जा रही है। ईसाई और मुसल्मान जॊ हिन्दुओं की मूर्ती पूजा का अवहेलना करते हैं वे स्वयं भी हिन्दूओं की देवताओं की ही पूजा करते हैं।

सभी जानते हैं की काबा में जिस पत्थर की परिक्रमा मुसल्मान करते हैं वह शिवलिंग है। गोलाकृती की यह लिंग को हिलाया ना जा सके इसलिये उसे दीवार के बाहरी छॊर पर स्थिर किया गया है। मुसल्मान उल्टी दिशा में इस लिंग की परिक्रमा हिन्दूओं की ही तरह सात बार करते हैं। लिंग के पथर को चांदी के पन्ने से ढका गया है। बीच में जॊ अंडाकृती है उसकॊ खुला छॊडा गया है। सिरियाई लोग इसे एक बार अपने युद्ध में विजयी हॊने के निशानी के तौर पर अपने साथ ले गये थे और २२ साल तक अपने पास रखा था।

मेक्का के काबा मंदिर में विक्रामादित्य के काल की सॊने का शिला लेख लटकायागया है [पृष्ठ ३१५-सयर-उल-ऒकुल-मखताब-ए-सुल्तानिया लैब्रेरी-तुर्किस्तान]। इस बात से यह निश्चित हॊता है की अरब देश विक्रामदित्य के काल में हिन्दुस्तान का ही प्रांत हुआ करता था। विक्रमादित्य के धर्म प्रचारकों ने अरब देशॊं में सनातन धर्म की नींव बहुत पहले ही रखी हुई थी यह इस शिला लेख से प्रतीत होता है। मुसल्मानॊं का सालाना पर्व ‘ओखज’ या ‘हज’ भी हिन्दु पद्धती के अनुसार ही होता है। आज भी शिव के प्रतीक यहाँ पाये जाते हैं जिसकी पूजा मुसल्मान करते हैं।

मुसल्मान जिस अर्ध चंद्रमा की पूजा करते है वह कुछ और नहीं बल्की शिव की जटा में जो चंद्रमा है वही है। इसीलिये उनकी द्वज में भी अर्ध चंद्राकृती हमें दिखाई देती है। काबा मॆं करीब ३६० मूर्तियां हैं। जिनमे से दॊ जॊ शनी और चंद्रमा की थी वॊ चक्रवात में नष्ट हॊ गये और तीसरा था अल्लाह की मूर्ती! इससे यह प्रतीत हॊता है कि मुसल्मान भी हिन्दू की ही तरह नवग्रह की पूजा करते थे।

और एक अचंबित करनेवाली सत्य है कि जिस ७८६ की वे पूजा करते हैं वह संस्कृत का ‘ओम’ शब्द है! संस्कृत में ऒम लिखकर अगर आईने के सामने पकडा जाये तो वह अरेबिक लिपी में ७८६ की तरह ही दिख्ता है। दूसरा हिन्दू विधान जॊ काबा में पाया जता है वो है ज़ाम ज़ाम का पानी जो लिंग के पास ही है। वो इसलिए कि शिव के जटा में गंगा निवास करती है। गंगा के बिना शिवजी अधूरे हैं। जिस प्रकार भारत में गंगा की मान्यता है उसि प्रकार काबा में ज़ाम ज़ाम की।

यह सारे तथ्य हैं जॊ इसी बात का अनुमान लगाते हैं कि काबा में शिवलिंग ही है। लेकिन गैर मुसल्मानॊं को काबा में जाने नहीं दिया जाता है। पूरे लिंग कॊ काले कपडे से ढक दिया गया है कि उसे कॊई देख ना पाये। कितना भी कॊई ढक ले लेकिन सत्य यही है कि सनातन हिन्दू धर्म ही सबसे पुरानी और न मिटनेवाली धर्म है। और हिन्दू देवी देवताओं की ही पूजा मुसल्मान और ईसाई लॊग करते हैं।


Source:https://ramanan50.wordpress.com/2013/12/02/shiva-linga-in-mecca-om-is-786/


Image Source:http://www.krishnapath.org/photographic-evidence-taj-mahal-a-vedic-temple/


Shaanyora

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