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एक आम आदमी के प्रधानमंत्री मोदी से कुछ अहम सवाल:क्या उसे इनके जवाब मिल पायेंगे?

 

अगर हम मोदी जी के द्वारा दिए गये दोनों साक्षात्कारों पर नज़र डाले तो हमें देखेंगे की दोनों में जो प्रशन पूछे गये वो इकोनॉमी, रोजगार, उपलब्धि, सामाजिक विभाजन , बोलने की स्वतंत्रता, न्यायपालिका, किसान और कृषि, दावोस, आतंकवाद, ट्रिपल तालक और राजनीति के इर्द गिर्द घूम रहे थे जिससे एक आम आदमी के मन के बहुत से सवाल अनसुने रह गया इसलिए वो इस माध्यम के जरिये मोदी जी से कुछ सवाल पूछना चाहता है और उम्मीद करता है की इनके जवाब उसे मिल जाए |

1. आपको क्या लगता है कि जवाहर लाल नेहरू तानाशाह या धर्मनिरपेक्ष राजनेता हैं?
प्रधान मंत्री – वह धर्मनिरपेक्ष राजनेता थे|

  1. जब वह राजनेता स्वतंत्रता के तीन सालों में सबसे फॅसिस्ट कानून “हिंदू नागरिक संहिता” ला सकता है तो हम सबसे अधिक धर्मनिरपेक्ष कानून “समान नागरिक संहिता” को लागू करने की उम्मीद कब कर सकते हैं?क्यूँ हिन्दू मुस्लिम में एक ही मुद्दों पर पक्षपात किया जाता है? क्या आपको नही लगता आधे गलत हो रहे कार्यों के पीछे यही वजह है और “समान नागरिक संहिता” बहुत हद तक इसका अंत करने में सहायक होगी|
  1. क्या आपको लगता है कि बढ़ती जनसंख्या राष्ट्र के लिए खतरा है? यदि हां, तो हम “राष्ट्रीय जनसंख्या नीति” को लागू करने की उम्मीद कब कर सकते हैं?
  1. क्या आपको लगता है कि सभी धर्मों में आर्थिक तौर पर समानता होनी चाहिए? यदि हां, तो कब हम उम्मीद कर सकते हैं कि हिंदू मंदिरों को अधिकारियों के चंगुल से बाहरकिया जाएगा? कब ये सम्भव हो पायेगा की हिन्दुओं द्वारा दिया हुआ दान और कार्यों पे नही खर्चा जाएगा? भगवान् जब एक है तो भगवान् के अलग अलग घरों में ये असमानता कब तक चलेगी?
  1. क्या आपको लगता है कि एनजीओ और मिशनरियों अपने अधिकृत कार्य कर रही है या फिर सरकार ने इन मिशनरियों को हिंदुओं को ईसाइयों में परिवर्तित करने की अनुमति दी है? यदि नहीं तो ये मिशनरी कैसे इस काम को अंजाम दे रही है? कब तक ये जबरदस्ती का धर्मांतरण हमारे समाज को बांटता रहेगा?क्या हम इस धर्मांतरण के विरुद्ध एक कड़ा कानून ला क्र इस पर रोक लगा सकते है?
  1. क्या आपको लगता है कि हमारी शिक्षा प्रणाली अच्छी है? क्या आपको लगता है कि भारत शोध और नवाचार में प्रतिभाशाली लोगों का उपयोग कर सकता है? क्या आपको लगता है कि बच्चों को अच्छी सामग्री पढ़ना के लिए दिया जा रहा है? क्या आपको लगता है कि हमारी शिक्षा प्रणाली को मार्केट डिमांड और रुचि आधारित अनुसंधान और नौकरी से जोड़ा जाना चाहिए जिनमे हम उत्कृष्टता चाहते हैं? यदि हां, तो “नयी शिक्षा नीति” कहां है और कब हम राईट तो एजुकेशन को हटा सकते है?
  1. क्या आपको लगता है कि हमारे अफसर बेहद प्रतिभाशाली है या आपको लगता है अब समय आगया है “विशेषज्ञ आधारित मंत्रालय” का जिसमे निजी विचारकों को भी शामिल किया जाना चाहिए? यदि हाँ तो कब हम इसको वास्तविक होते देख सकते है?
  1. लाखों मामले न्यायालयों में लंबित हैं, पुलिस की वित्तीय स्थिति खराब है और कोई उचित जवाबदेही व्यवस्था नहीं है और पुलिस राजनीतिक दबाव में काम करती है, इसलिए न्यायालय के मामले में उचित जांच नहीं हो पाती। फोरेंसिक और वैज्ञानिक जांच की कमी होती है। आप क्या सोचते हैं कि कब हम राष्ट्रीय पुलिस सुधार ला सकते हैं जो इन सभी मुद्दों को खत्म करने में हमारी सहायता करे?
  1. आप हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों के बारे में बात करते हैं, लेकिन क्या इसे अमली जामा पहनना आवश्यक नही है कश्मीरी पंडितों और 1984 के सिखो भी लोकतंत्र पर विश्वास करते थे, लेकिन वही लोकतंत्र और सरकार उन्हें बचाने में नाकाम रही। उनका भरोसा फिर से कब स्थापित हो पायेगा?
  1. क्या आपको लगता है की कश्मीर भारत में है? यदि हां, तो कब हम अनुच्छेद 370 के उन्मूलन की उम्मीद कर सकते हैं और कब हम उम्मीद कर सकते हैं कि भारत के लोग भारत के स्विट्ज़रलैंड में बिना किसी भय से जा सकते है और अपना सर गर्व से उंचा कर सकते है|

एक आम आदमी ने न सिर्फ प्रधानमंत्री जी से कुछ सवालों के जवाब की उम्मीद की है बल्कि देश के बहुत से अनछुए पहलुओं को छुआ है जिन पर ध्यान केन्द्रित करने की जरूरत है और इन पहलुओं को कैसे हल किया जा सकता है उस पर सुझाव भी दिए है|

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