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सुप्रीम कोर्ट के चार जजों का खुलासा: उच्च न्यालय में सब ठीक नही

 

भारत के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जजों ने मीडिया को संबोधित किया| जे. चेलमेश्वर समेत सुप्रीम कोर्ट के तीन और जज जस्टिस गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस जोसफ भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद थे| प्रेस कांफ्रेंस में जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि “देश का लोकतंतर खतरे में है, प्रशाशन ठीक से काम नही कर रहा”|

उन्होंने बताया की इस बारे में हमने बहुत बार चीफ जस्टिस से बात करने की कोशिश भी की है|उनको चिठ्ठी भी लिखी है लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी,तक़रीबन दो महीनों से ये सब चल रहा था और अब हमारे पास कोई और रास्ता नही बचा था|

जजों ने कहा कि हम नहीं चाहते कि हम पर आने वाले समय में कोई आरोप लगे और हम यही चाहते है की देश न्यायपालिका पर भरोसा करे, हम बस देश का कर्ज अदा कर रहे हैं|

उन्होंने कहा कि अगर हमने देश के सामने ये बातें नहीं रखी और हम नहीं बोले तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा| उनके द्वारा दिए गये ख़त में उन्होंने इस बात को प्रस्तुत किया है की बड़ी दिक्कत और चिंता के साथ हमें ये कहना पड़ रहा है की हमें इस न्यायालय द्वारा पारित किए गए कुछ न्यायिक आदेशों को उजागर करना पड़ रहा है जिन्होंने  न्यायपालिका की व्यवस्था और हाई कोर्ट की स्वतंत्रता को प्रभावित करने के साथ ही सीजेआई के कार्यालय के प्रशासनिक कार्यों पर भी असर डाला  है।

निचे दिए गये लिंक से आप उनके द्वारा लिखे हुए ख़त को पड़ सकते है जिनमे मुख्य उन्होंने इन मुद्दों पर आपत्ति जताई है|

चार वरिष्ठ जजों का मानना है कि सभी महत्वपूर्ण मामलों को सीजीआई की अगुवाई वाली पीठ ने सुना है और अन्य वरिष्ठ न्यायाधीशों के  शीर्षकों को वितरित नहीं किया जाता है।

चार न्यायाधीशों ने यह भी कहा था कि ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जिन मामलों में देश के लिए दूरगामी परिणामो होंगे उनको मुख्य न्यायाधीश द्वारा चुनिंदा रूप से सौंपा गया – अपनी प्राथमिकता के आधार पर – और तर्कसंगतता के आधार पर नहीं। सीनियर  न्यायाधीशों ने कहा, इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

विशेष रूप से, चार न्यायाधीशों इस बात से नाराज थे  कि न्यायमूर्ति बी। एम। लोय की “रहस्यमय” मौत की जांच की मांग करने वाली एक जनहित याचिका अदालत  नं। 10 को  और सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ के अलावा पहली चार बेंच पर नहीं दी गयी है।

न्यायमूर्ति चेलेमेश्वर की अध्यक्षता वाली पीठ ने मेडिकल कॉलेज प्रवेश घोटाले को बेंच न:4  के  पास भेज दिया था जबकि पहले न्यायमूर्ति चेलेमेश्वर की अध्यक्षता में एक बेंच ने खुद के साथ साथ  पांच न्यायाधीशों की बैंच, सीजीआई, खुद, और जस्टिस गोगोई, लोकुर और जोसेफ को भेजा था।

चार न्यायाधीशों ने यह भी कहा कि सीजीआई के एक छोटे से बेंच का नेतृत्व करने और प्रक्रिया के ज्ञापन के साथ सौदा करना गलत था जब पहले पांच न्यायाधीशों की पीठ ने उसे पहले सुना था।

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कई सीनियर जजों ने इनके द्वारा उठाये गये इस कदम की कड़ी निंदा की है और इस बर्ताव को बेहद बचकाना बताया है|

सीनियर वकील उज्जवल निकम ने कहा ये सही कदम नही था|अब से आम आदमी न्यालय के न्याय के ऊपर शक की नज़रों से देखेंगा

 

प्रधानमंत्री जी ने तुरंत इस पर ध्यान केन्द्रित करते हुए कानून मंत्री रवि शंकर को बैठक के लिए बुलाया है|

ये न्यातंत्र के लिए अच्छी बात नही है|उन्हें अपने आपस के मतभेदों को सुलझाना चाहिए |इससे देश की जनता पर,आम नागरिक पर न्यातंत्र का बुरा प्रभाव पड़ता है और वे  न्यालय पर भरोसा नही कर  पायेगा और उस के मन में शक को उपज देगा|

 

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