राजनीति

पाकिस्तान को भारत की ऒर से दिए जाने वाले मेडिकल वीज़ा में आई गिरावट, ढ़ीठ पाक की अकल ठिकाने लगाने का यही सही तरीका|

एक बड़े राजनैतिक बदलाव की तरफ सूचना देता हुआ भारत का कदम सराहनीय है। भारत के अंदर सीमा पार से गॊली बारी करानेवाला, आतंकियों की घुसपैठ करवाकर भारत की अस्मिता को घायल करवानेवाला, कश्मीर को हमसे छीनने का  उद्देश्य रखनेवाला और भारत के माताओं की  बिंदी-चूड़िया उतरवाने वाला पाकिस्तान मानवीयता दिखाने के लायक ही नहीं हैं। जिस देश के पास इंसानियत और प्यार नाम की चीज़ ही न हो उस देश के प्रति मानवीयता दिखाना व्यर्थ है।

स्वयं श्री कृष्ण भगवान ने गीता में कहा था कि दान भी उसी को दो, जो दान प्राप्त करने के लायक हो। अपात्र मनुष्यों को दान करॊगे तो दान का पुण्य भी व्यर्थ ही जायेगा। कृष्ण की वाणी पाकिस्तान जैसे नापाक देश पर सटीक बैठती है। 1947 से ही पाकिस्तान भारत पर प्रत्यक्ष और परॊक्ष रूप से जंग छेड़ता हुआ आ रहा है। लेकिन भारत ने हमेशा ही पाकिस्तान की गलतियों को माफ किया और उसे खुले मन से गले लगाया था। अटल जी और मॊदी जी ने पाक के साथ संबंध सुधारने का प्रयत्न भी किया है।

लेकिन पाक एक घटिया देश है और उसे प्रेम की भाषा समझ नहीं आती है। पाकिस्तान को बार बार चेतावनी देने के बाद भी उसकी अकल ठिकाने नहीं आई है। हाल ही में उसने मर्यादा और मानवीयता की सारी हदें पार करदी जब कुलभूषण जाधव से मिलने गयी उनकी माँ और पत्नी के साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार किया। उन दोनों भारतीय नारियों का अपमान किया था और उनकी सुहाग की निशानी तक उतरवाई थी। कुलभूषण जाधव की पत्नी के जूते लेकर उसे वापस भी नहीं लौटाया था। पूरे देश में इस बात को लेकर गुस्सा उमड़ आया था और देश भर से मांग आ रही थी कि अब “पापि”स्तान से उसी की भाषा में बात किया जाये।

इस घटना के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी कहा था कि पाकिस्तान के इस रवैय्ये से वे बेहद आहत है और जनता भी सरकार से यही उम्मीद लगा रही थी कि इस अपमान का बदला भारत लेकर रहेगा। इसके कुछ ही दिन पश्चात खबर आयी थी की भारत ने पाकिस्तान से निज़ामुद्दीन उरुस में आने वाले 192 तीर्थयात्रियों को वीसा देने से इनकार कर दिया था। यह इतिहास में पहली बार हुआ था। इससे पहले पाकिस्तान की एहसान फरामोशी का बदला इस तरह नहीं लिया गया था।

हाल ही में सुनने में आया है कि भारत की तरफ़ से पाकिस्तान के मरीजों को दिये जानेवाले  मेडिकल वीज़ा में भी भारी कटौती की गयी है। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के सर्वे के अनुसार, साल 2015-16 में भारत ने 1,921 पाकिस्तानी मरीज़ों को वीज़ा दिया। बाकी देशॊं के मुकाबले यह आंकड़ा बेहद कम है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ मोहम्मद फ़ैसल ने हाल ही में दावा किया था कि कभी भारत हर महीने 500 पाकिस्तानी मरीज़ों को वीज़ा देता था लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। जो देश भारत की नारियों का सम्मान करना नहीं जानता उसके साथ इससे भी बत्तर व्यवहार करना चाहिए।

पाकिस्तानी मरीज़ों के लिए इलाज करवाने के लिए भारत पहली पसंद है। वे लिवर ट्रांसप्लांट, कैंसर और बच्चों के इलाज के लिए अमरीका और दूसरे यूरोपीय देशों के अनुरूप भारत आना ज्यादा पसंद करते हैं। एक तरफ़ तो पाक की सेना सरहद पर गोलियां बरसाकर हमारे जवानों को घायल करती है और दूसरी ओर अपने देश के मरीज़ों के लिए वीज़ा की भीख मांगती हैं। भिकारी देश विदेशों से चंदा मांगता है और उस पैसों से आतंकवादियों को पालकर भारत के अंदर घुसपैठ करवाता है। उन पैसों से अपने ही देश में एक अच्छा अस्पताल क्यों नहीं बनवाता पाकिस्तान? चप्पल खरीद ने की औकात नहीं मुहुं उठाकर चले आते हैं कश्मीर छीनने और उसके ऊपर भारत में इलाज करवाने के लिए वीज़ा भी चाहिए! बेशर्मी की भी हद होती है।

भारत की विदेश मंत्री सुषमा जी के ट्विटर अकांऊट पर हर दिन दर्जनों पाकिस्तानी लोग मेडिकल वीसा की मांग करते हुए दिखाई देते हैं। लेकिन भारत अब पाकिस्तान की तरफ कड़ा रुख अपनाता हुआ दिखाई दे रहा है। केंन्द्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजजू ने संसद में कहा है कि 2017 में कुल 34,445 वीसा पाकिस्तान को दिये गये हैं जब की यह आंकड़े 2016 के मुकाबले बहुत कम है जो करीब 52,525 थे। 2012 में भारत और पाक ने एक समझौता किया था जिसमें लोगों की सेवा के लिए वीसा उपलब्द करवाने का प्रबंधन है। इस समझौते को दर किनार करते हुए भारत ने यह बहुत बड़ा और अच्छा कदम उठाया है और पाक को दिये जानेवाली वीसा का कटौती किया है। मई 2017 में एक मीडिया रिपोर्ट आई थीं जिसमें कहा गया था भारत की ओर से पाकिस्तान को दिए जाने वाले मेडिकल वीज़ा पर बैन लग सकता है। लेकिन भारत ने इस रिपॊर्ट की पुष्टि  नहीं की  है। पाकिस्तान लातॊं का भूत है और उसे बातों से समझाया नहीं जा सकता है। नापाक देश के पास यह सुधरने का आखरी मौका है अब भी अगर पाकिस्तान नहीं सुधरा तो परिणाम बहुत गंभीर होगा।

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