राजनीति

मुस्लिम छात्र ने कृष्ण की वेश भूषा में किया गीता का पाठ; कट्टरपंथी इस्लामी ठेकेदारॊं ने जारी किया फतवा।

कहने को तो इस्लाम शांति का धर्म है, लेकिन कभी शांती देखी नहीं हमने। समझ में नहीं आता की वास्तव में इस्लाम में कट्टरपंथ है या फिर इस्लाम के आड़ में कट्टरपंथी मुल्ले अपना निजी द्वेष लोगों पर निकालते हैं। देश भर होड़ मची है की हिन्दू असहिष्णू हैं लेकिन बात बात पर फतवा जारी तो इस्लाम के कठ मुल्ले करते हैं। अब मेरठ की एक छात्रा जिसने कृष्ण की वेश भूष पहन कर गीता का पाठ किया था उस पर मुल्लों ने फतवा जारी कर दिया है। कहां मरगये अवार्ड वाप्सी और बुद्दीजीवी ब्रिगेडवाले? अब असहिष्णुता नहीं दिखती उनको? कहां गये लिबरल पत्रकार? यही है सेक्युलर देश जिसकी वो बात करते हैं, जहां बात बात पर धर्म के नाम पर फतवे जारी कर दिया जाता है। यही है संविधान का धर्म निरपेक्षता का सम्मान?

भगवान कृष्ण द्वारा कही गयी गीता का सार सार्वकालिक सत्य है और दुनिया के बड़े देशों के बड़े बड़े नायक गीता का पाठ करते हैं। जनवरी के पहले सप्ताह में मेरठ के सेठ बी.के.माहेश्वरी इंटर कॉलेज में स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक की याद में एक कार्यक्रम आयॊजित हुआ था जिसमें गीता पाठ की स्पर्धा आयॊजित की गयी थी। इस प्रतियॊगिता में उसी कॉलेज की एक छात्रा आलिया खान ने भी हिस्सा लिया था। उसने स्वयं कृष्ण की वेष भूषा धारण करके गीता का पाठ किया था। इस प्रतियॊगिता में उसने दूसरा स्थान प्राप्त किया था। स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जी ने आलिया को सम्मानित करते हुए एक प्रशस्ति पत्र और पच्चीस हजार रूपये प्रदान किये थे।

लेकिन मुस्लिम समाज ने उस बच्ची पर फतवा जारी कर दिया है। देवबन्द के आनलाइन फतवा विभाग के इंचार्ज अरशद मुफ्ती ने इसे इस्लाम विरोधी बताते हुए आलिया पर फतवा जारी किया है। यही है शांती के धर्म में विश्वास रखनेवाले ठेकेदारॊं की असलीयत। एक बच्ची के गीता पाठ करने से उनको आपत्ति है तो वे कैसे शांती दूत? आलिया ने फतवे पर अपना मत रखते हुए कहा है कि उसने प्रतियॊगिता में भाग लिया है ना कि धर्म बदला है। उसने फतवा जारी करनेवालों से विनम्रता से प्रार्थना किया है कि वह अभी बच्ची है और उसे राजनीति में न घसीटा जाये।

उसने फतवे का जवाब देते हुए कहा है की ‘मैंने कार्यक्रम में कृष्णा की वेश भूषा पहनी और गीता का पाठ किया। इस्लाम इतना कमजोर नहीं है कि सिर्फ गीता का पाठ करने और वेश भूषा पहनने से हमें धर्म से बर्खास्त कर दिया जायेगा। उन्होंने फतवा जारी किया है लेकिन मैं सबसे प्रार्थना करती हूं कि मुझे राजनीति में ना घसीटा जाए”। एक बच्ची में जितनी बुद्दिमत्ता और परिपक्वता है उतनी धर्म का पाठ पढ़ानेवाले लोगों में नहीं है। इस बच्ची से कुछ सीख लेना चाहिए इस्लाम के रक्षकों को।

इस्लाम के चंद ठेकेदारॊं ने इससे पहले यॊगा पर भी फतवा जारी किया था। यहां तक की वंदे मातरम कहना भी इनके अनुसार हराम है। इनके अनुसार भारत और हिन्दुओं की सभी चीज़ हराम है तो वो भारत में हिन्दुओं के बीच क्यों बैठे हैं? जब इतनी आपत्ति है तो चले क्यॊ नहीं जाते उस देश में जहां उन्हे अपनी मन- मर्जी से जीने दिया जायेगा। लेकिन नहीं जायेंगे क्यों की उन्हें पता है भारत जैसा धर्म सहिष्णु देश और कहीं नहीं है। जिस थाली में खाते हैं उसी थाली में छेद करने की आज़ादी तो केवल भारत में हैं। बाकी देशॊं में तो इनको भरे बाज़ार में गॊली मार देंगे। इसीलिए वे भारत में बैठकर भारत के विरॊध में ही फतवे जारी कर रहे हैं।

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