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वो नीले, हरे, सफेद और भगवे की बात करेंगे पर तुम ‘तिरंगे’ पे अड़े रहना…..

भारत के राजनीति का अखाड़ा कुरुक्षेत्र की रण भूमी बन चुकी है। धर्म-अधर्म, सही-गलत, अच्छा-बुरा, देश प्रेमी और देश्द्रोहियों के बीच युद्द का आह्वान हुआ है। राजनेता पहले से ज्यादा आक्रामक हॊ चुके हैं। सत्ता के भूखे देशद्रॊही गिरॊह ने एक टोली बनाली है। जाति के नाम पर, रंग के नाम पर दंगे हो रहे हैं। भगवा में आतंक भरा जा रहा है और हरे में शांती दिखाया जा रहा है। सफेद को ललकारा जा रहा है और नीला घनचक्कर हो रहा है। जाति,धर्म, रंग के नाम पर वे तुमको ललकारते रहेंगे पर तुम बहकावे में मत आना। फूट डाल कर राज करने में उनको महारथ हासिल है तुम उनकी बातॊं में मत आना।

अब यह लड़ाई किसी पार्टी की नहीं, अब यह लड़ाई विचारों की नहीं, आपसी मत भेद की नहीं। अब यह लड़ाई देश की अस्मिता की है। राष्ट्र प्रेमियों और गद्दारों के बीच की है। गद्दार इस खेल में माहिर है, उनके पास वर्शॊं का अनुभव है। वे राष्ट्रवादियों को हराने की पूरी कॊशिश कर रहे हैं। दुश्मनों के साथ खाना खा रहे हैं राष्ट्रवादियों को हराने की यॊजना बना रहे हैं। अपनी पूरी ताकत लगा कर वे तख्ता पलट ने की फिराक में हैं।

वो आतंकियों के गुण गायेंगे तुम सेना का गुण गाते रहना। वो नारा लगायेंगे ” हर घर से अफज़ल निकलेगा” तुम कहना ” हर घर में घुसकर मारेंगे जिस घर से अफजल निकलेगा”। वो कहेंगे “भारत तेरे टुकड़े होगें” तुम कहना “सर कटॆंगे लेकिन भारत के टुकड़े नहीं हॊगें” वो कहेंगे ” भारत की बरबादी तक जंग रहेगी” तुम कहना ” भारत को बरबाद करनेवालों की बरबादी तक जंग रहेगी”। वो तुमको बहलायेंगे तुम नहीं मानोगे तो डरायेंगे, तुमको धमकाएंगे। पर तुम डटे रहना, आज़ादी  के उन वीरॊं को याद करना जिन्होंने प्राणों की आहुती देकर हमको गुलामी के ज़ंजीरॊं से मुक्त कराया था। अपने पूर्वजों के बलिदानों को व्यर्थ नहीं जाने देना।

जब वो जाति और धर्म का वास्ता देंगे तुम कहना कि ‘राष्ट्रवाद ही मेरा धर्म’ है। वो रंग बिरंगी चोला तुमको पहनाएंगे तुम तिरंगे को अपने गले से लगाना। वो ‘हिन्दुस्तान मुर्दाबाद’ कहेंगे लेकिन तुम ऊँचे सुर में ‘भारत माता की जय’ गाना। यह टकराव विचारॊ का या जाति का या धर्म का नहीं है। कॊई जाति-धर्म निशाने पर नहीं है, निशाने पर तो तुम्हारी माँ है। दाव पर सत्ता का ‘सिंहासन’ नहीं लगा है, दाव पर तुम्हारी माँ की इज्जत लगी है। मत भूलो गद्दारॊं के हाथ में जब सत्ता थी तो क्या किया था तुम्हारे माँ के साथ।

इतिहास को तनिक याद करॊ कैसे हारा था पृथ्विराज, कैसे डूबा था विजय नगर का सम्राज। याद करॊ कि किसने माँ के छाती को चीरा और किसने दिया उसे विभाजन का घाव। याद करॊ जो अधर्म के साथ खड़ा हुआ क्या हुआ उसके साथ। भूल जाओ कि तुम किस जाती के हो, तुम किस धर्म के हो। भुल जाओ कि तुम्हारा रंग क्या है और तुम्हारी भाषा क्या है। याद रखॊ तुम्हारी एक ही है पहचान ‘भारतीय’ है तुम्हारा नाम। महाभारत का शंखनाद गूँज उठा है हृदय में माँ भारती का नाम भरना और मुख पर वंदे मातरम का नारा लाना। वो नीले, हरे, सफेद और भगवे की बात करेंगे पर तुम तिरंगे पे अड़े रहना। अपनी एकता से तुमने अंग्रेज़ों को भगाया है आज एक बार फिर तुम्हारी माँ तुम्हे बुला रही है। सावधान, सतर्क और संगठित रहना। यह लड़ाई सिंहासन की नहीं माँ के सुरक्षा और अस्मिता की है याद रखना।

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