अभिमत

जानिए तसलीमा नसरीन का क्या कहना है कुरान- इस्लाम-आतंकवाद के संबंध के बारे में।

तसलीमा नसरीन को कौन नहीं जानता। अपनी बेबाक बॊल और लेख के लिए तसलीमा बहुत ही मशहूर है। अपने धर्म के आभासों की टिप्पणी करने के कारण तसलीमा को देश से निकाल दिया गया है और आज वो निर्वासितों का जीवन जी रही है। ऐसा ही होता है, जो सत्य कहता है उसे सज़ा दी जाती है उसे जान से मार दिया जाता है और जो झूठ फैलाता है उसे सम्मान और पुरस्कार प्राप्त होता है। यही दुनिया की रीत है।

तसलीमा नसरीन का जन्म 25 अगस्त 1962 में बांग्ला देश में हुआ था। तसलीमा 1970 के दशक में एक कवि के रूप में उभरीं और 1990 के दशक के आरम्भ में अत्यन्त प्रसिद्ध हो गयीं। वे अपने नारीवादी विचारों से युक्त लेखों तथा उपन्यासों एवं इस्लाम एवं अन्य नारीद्वेषी मजहबों की आलोचना के लिये जानी जाती हैं। इसी कारण से कठ्ठरपंथी मुसलमान तसलीमा से नफरत करते हैं और उनको जान से मारने की धमकी भी देते रहते हैं।

बांग्लादेश में उनके ऊपर फत्वा जारी किया है इसीलिए आज वे अन्य देशों में शरण लेकर निर्वासितों का जीवन जी रही है। स्त्री के स्वाभिमान और अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए तसलीमा नसरीन ने बहुत कुछ खोया है। अपना पूरा परिवार, दाम्पत्य और नौकरी सब दांव पर लगा दिया। सच बोलने का यही परिणाम होता है। तसलीमा कहती है कि कुरान, इस्लाम और आतंकवाद में सीधा संबंध है और जो धर्म निरपेक्ष लोग इस्लाम को शांतिप्रिय कहते है उन्होंने कभी कुरान को पढ़ा ही नहीं।

आतंकवादियों की पैरवी करनेवालों को और आतंक का कॊई धर्म नहीं ऐसा कहनेवालों के लिए तसलीमा कहती है कि “धर्म एक सच्‍चाई है, धार्मिक किताब सच्‍चाई है। धार्मिक किताब खुद ईश्‍वर ने लिखी तो जो कुछ भी उसमें लिखा है, उसे आंख बंद कर करना चाहिए। कोई सवाल नहीं, सिर्फ मान लीजिए। परिणाम के तौर पर, उन्‍होंने(आतंकवादी) शुरुआत से आखिरी तक किताब में जो कुछ भी लिखा है, उस पर भरोसा कर लिया। बिना उससे जुड़ी बातों को समझे , उन्‍होंने प्राचीन काल में लिखी गई किताब को समकालीन चश्‍मे से देखने की कोशिश नहीं की। अगर किताब ने कहा कि उसमें भरोसा ना रखने वालों को मार देना चाहिए, तो उन्‍होंने सिर्फ यही समझा कि भरोसा ना रखने वालों को मार देना चाहिए, उन्‍होंने किसी और मतलब को समझने की कोशिश नहीं की”।

तसलीमा आगे कहती है “धर्म द्वारा अंधे किए गए समाज में, जन्‍म से ही ब्रेनवॉशिंग शुरू हो जाती है। ये लोग जन्‍म से ही घरों में, स्‍कूलों में, कॉलेजों में, खेल के मैदान पर, ट्रेंस में, बसों में, टीवी पर, रेडिया पर, फिल्‍मों में और नाटकों में अपने धर्म की तारीफ सुनकर बड़े हुए हैं। उन्‍हें बताया गया है कि धर्म का पालन आपको स्‍वर्ग ले जाता है और अगर आप धर्म का पालन नहीं करते, आपको नर्क में भयंकर सजा भुगतनी पड़ती है। उन्‍हें बताया गया है कि उनकी धार्मिक किताब ही दुनिया भर की समस्‍याओं का हल है, धर्म ज्ञान है, धर्म विज्ञान है और धर्म शांति है। अगर आप किसी चीज के बारे में हर समय सुनते रहते हैं, तो यह आपके दिमाग का हिस्‍सा बन जाता है। बेस तैयार है, आप आसानी से उसपर विश्‍वास का महल बना सकते हैं। इंसान विज्ञान की लगातार रिसर्च और जटिल गणितीय समीकरणों के मुकाबले धर्म के आसान हलों को हमेशा चुनता आया है। धर्म, इसलिए सभी को आकर्षित करता है- अनपढ़ दैनिक मजदूरी करने वाले से लेकर विश्‍वविद्यालय के रिसर्चर्स तक। क्‍योंकि विज्ञान को समझना धर्म को समझने से आसान नहीं है”।

तसलीमा जी का मानना है कि धार्मिक किताबों का हवाला देकर बचपन से ही मुसलमानों को भ्रमित किया जाता है। वे कहती हैं की आतंकियों से भी खतर्नाक राजनेता होते हैं। उनकी अपने शब्दों में उनका कहना है कि ” असल में, राजनेता पाखंडी होते हैं। वे सुविधानुसार धर्म को कबूल करते हैं, संपूर्ण धर्म को नहीं। ऐसी सोच वाले मुस्लिम पाखंडी हैं। वास्‍तव में, वे आतंकी पाखंडी नहीं है। उन्‍हें जो भी कहने के लिए ब्रेनवॉश किया गया, वे किसी तोते की तरह बक जाते हैं। वे अपनी जिंदगी के बारे में नहीं सोचते। अगर किसी ने उन्‍हें बताया, समझाया है कि उन्‍हें जिहाद का इनाम मिलेगा, जन्‍नत में सबसे ऊंची जगह मिलेगी अगर वे गैर-मुस्लिमों को मारेंगे तो वो गैर-मुस्लिमों को मारेंगे”।

वास्तव में पूरे विश्व के सामने है। लेकिन ‘धर्म निरपेक्षता’ की दुहाई देकर आतंकियों की भी पैरवी करनेवालों की हमारे यहां कमी नहीं है। धर्म निरपेक्ष देश में ” भगवा आतंकवाद” का झूठ फैलाया जाता है लेकिन जो खुले आम “हरे रंग की धमकी” देकर देश की सामरस्य को बिगाड़ते हैं उन्हें शांतिदूत बता कर उनका सम्मान किया जाता है। सनातन काल से लेकर आज तक विश्व में ऐसा कोई निदर्शन नहीं है कि हिन्दूओं ने अपने धर्म ग्रंथॊं की दुहाई देकर अन्य धर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया हो। धर्म परिवर्तन के लिए हथियार उठाए हो। सनातन धर्म से सहिष्णु धर्म पूरे विश्व में और कॊई नहीं है। आज यही धर्म सहिष्णुता ही हमारे लिए खतरा बनती हुई प्रतीत हो रही है।

धर्म निरपेक्षता का चश्मा उतारकर हमें वास्तव को देखना होगा। धर्म की रक्षा करना भी धर्म है और यह कॊई अपराध नहीं है। धर्म निरपेक्षिता का राग आलापनेवालों को यह जान लेना चाहिए कि आतंकी उनको भी नहीं बक्शेंगे क्योंकि उनका एक ही मक्सद है काफिरों को मारना। दुनिया का सबसे बड़ा अभिशाप है आतंकवाद अब सच का सामना करना होगा और आतंकवाद को जड़  से मिटाना होगा।

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