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जानिये क्यों पूरी इस्लामिक दुनिया के देश इजराइल से थर थर कांपते हैं

 

ये बात अपने आप में बड़ा महत्व रखती है कि छोटा सा देश और उसका इतना वर्चस्व । कारण है इज़राइल अपने निर्माण काल के पहले क्षण से ही विवादों,झगड़ो और युद्धो में उलझ रहा है,इसे अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए अरब देशों के क्रूर हमलो का सामना करना पड़ा फलस्वरूप इज़राइल दिन प्रतिदिन “शक्तिशाली” बनता चला गया।

इज़राइल की भौगोलिक स्थिति देखी जाए तो हर तरफ से प्रतिकूल परिस्थितियां देखने को मिलेंगी एक तरफ अथाह समुद्र और दूसरी ओर मौजूद हर मुस्लिम पड़ोसी राष्ट्र इसे नष्ट करना चाहता है… इसी कारणवश इज़राइल को बड़े पैमाने पर अपने पड़ोसियों से युद्ध करने पड़े और दशको बीत जाने के बावजूद भी इज़राइल दैनिक रूप से इन युद्धो और झड़पो को लड़ रहा है।

द्वीतीय विश्व युद्ध के दौरान सप्लाई किये गए हथियारों और स्वतन्त्रता से पहले यहां के लड़ाकों द्वारा तैयार की गई आधारभूत रणनीतियों के कारण इज़राइल का शक्तिसम्पन्न हुआ,कालांतर में इज़राइल सेना ने युद्ध कला में उल्लेखनीय सफलता हासिल की। 1960 और 1970 में  अपनी विशिष्ट मांगो और अंतरराष्ट्रीय बहिष्कारो के कारण इज़राइल ने अपनी स्वयं की सैन्य तकनीको को विकसित करना शुरू किया साथ ही साथ सर्वश्रेष्ठ तकनीक को बढाने के प्रयास किये।

आज इज़राइल दुनिया भर में सबसे उन्नत टेक्नोलॉजी के हथियारों से सम्पन्न देश है इसकी सेना दुनिया की सबसे प्रभावशाली सेनाओ में से एक है।

आइये पता करते है की क्यो कोई भी देश इज़राइल से टक्कर लेने से हिचकिचाता है।

इसरायली सैनिक : देश ने सन 1948 से ही एक सुनिश्चित व सुगठित योजना के तहत अपने देश के मानव संसाधन को कद्दावर सेना में तब्दील करने के लिए सैन्य ट्रेनिंग का प्रावधान किया हुआ है । IDF ने भर्ती,ट्रेनिंग और प्रतिधारण(सैनिको को सेना से ही जुड़े रखने की नीतियां) के अत्याधुनिक सिस्टम विकसित किये है जो इसे दुनिया की सबसे सक्षम सेना में से एक बनाते है। एक इसरायली अवधारणा के अनुसार कोई भी देश अपनी सैन्य शक्ति और तकनीक का पूरी क्षमता का प्रयोग करने में तब तक सफल नही हो सकता जब तक उसको इस्तेमाल करने वाले स्मार्ट और समर्पित न हो…. 1948 के बाद से इजराइल के नागरिकों के लिए रक्षा सेवाओ में काम करना अनिवार्य है इस नीति के शानदार परिणाम भी देखने को मिले है।

मार्कवा टैंक – 1979 में इस युद्ध टैंक को सेना में शामिल किया गया.. इसके निर्माण के लिए अस्थिर विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता खत्म कर दी गयी थी, इज़राइल ने इसका निर्माण केंद्रीय यूरोप की जरूरतों की बजाय इजराइल की भौगोलिक आवश्यकताओं को देखते हुए किया जो वास्तव इस टैंक को औरो से अलग श्रेणी में रखता है । करीब 1600 विभिन्न प्रकार के टैंक सेना में अपनी सेवा दे रहे है और कई सौ और अभी तैयार किये जा रहे है।

ये टैंक अपनी गतिशीलता,सटीकता और विभिन्न प्रकार के रणक्षेत्रो में चलने के लिये प्रसिद्ध है हाल ही में गाज़ा युद्धों में IDF (इसरायली सेना ) ने मार्कवा टैंक का बेहतरीन उपयोग करते हुए फिलिस्तीनी चौकियों व अड्डो को तबाह किया तथा जवाबी हमले अपने सैनिकों को अभेध सुरक्षा प्रदान की। इज़राइल ने इस टैंक में और सुधार करते हुए इसे एक बेहतरीन हथियार में तब्दील कर दिया है।

F15 थंडर फाइटर जेट – इज़राइली सेना 1970 से f15 के विभिन्न प्रकार के संस्करण सेना में प्रयोग करती आ रही है और इसके दुनिया भर में इसके युद्ध मे प्रयोग करने की दक्षता में पूरी दुनिया मे श्रेष्ठता हासिल की है। इसरायली सेना ने हवाई हमलों में f15 लड़ाकू विमान के संचालन,सटीक हवाई हमले दक्षता हासिल की है ,साथ ही बेहतरीन मारक क्षमता वाली एयर फोर्स की F15I squadrans का निर्माण कर पूरे मिडिल ईस्ट को दहला रखा है जिसका श्रेय इजराइल अपने बेहतरीन F15 फाइटर पायलट को देता है।

जेरिको III नाभिकीय मिसाइल सिस्टम – जेरिको I बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम इसरायली सेना में 1970 में लाया गया था तदुपरांत जेरिको II और जेरिको III तक इसका विकास किया गया है। ये सिस्टम अभी तक सबसे उन्नत और शानदार बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम बन चुका है जिसकी रेंज में सिर्फ मिडिल ईस्ट के मुस्लिम देश ही नही अपितु यूरोप,एशिया और उत्तरी अमेरिका भी है।

ये  कहना अतिश्योक्ति न होगा कि यदि कोई कोई देश इज़राइल पर हमला करता है जेरिको सिस्टम उस देश को धूल के गुबार में बदलने में पूर्णतः सक्षम है ये बात इसके पड़ोसी देशों में देशत कायम करने के लिए पर्याप्त है।

ये सिस्टम जेरूशलम को पूरे क्षेत्र में नाभिकीय शक्ति सम्पन्न व श्रेष्ठ बनाता है,क्योंकि इजराइल के संभावित किसी भी दुश्मन देश के पास नाभिकिया मिसाइल या बम नही है और इजराइल किसी भी प्रकार के युद्ध मे इसका प्रयोग करने से हिचकने वाला भी नही है।

डॉल्फिन क्लास सबमरीन (पनडुब्बियां) – डीजल से चलने वाली इसरायली डॉलफिन क्लास पनडुब्बियाँ इसरायली शक्ति सम्पन्नता में अपना स्थायित्व दर्ज कर चुकी है। ये पनडुब्बियां इसरायली जल सीमाओ की निगरानी करने में माहिर है हालांकि डीजल इंजन की अपनी सीमाएं है फिर भी डॉलफिन पनडुब्बी विभीन प्रकार के सैन्य अभियानी का एक प्रभावी कठियार बनकर उभरी है

समुद्री गश्त,दुश्मन जहाजो को डुबोने या अन्य प्रकार के अभियानों में स्पेशल फोर्सेज को अप्रतिबंधित तटीय क्षेत्रों में वितरित करने में डॉलफिन इजराइल सेना का विशेष रूप से प्रतिनिधित्व करती है और इस क्षेत्र में ये समुद्र की सतह के नीचे सबसे घातक हथियार भी साबित हुई है।

 

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