अर्थव्यवस्था

भारत के उत्तर पूर्वी क्षेत्र के विकास का एक ही नाम – नरेंद्र मोदी !!

उत्तर पूर्व को लेकर पहले की सरकारों का क्या रवैया रहा है, उससे आप अच्छी तरह परिचित रहे हैं। नॉर्थ-ईस्ट में योजनाएं अटके नहीं, भटके नहीं इसलिए ही 1972 में नॉर्थ-ईस्ट काउंसिल का गठन किया गया था। लेकिन इस काउंसिल को भी गंभीरता से कम ही लिया गया| आज उत्तर पूर्व विकास के पथ पर है और इस विकास के पीछे एक ही इंसान है हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी|

जब से मोदी सरकार ने अपना कार्यकाल संभाला है उन्होंने  पूर्वोत्तर पे अपना ध्यान केन्द्रित किया है और पूर्वोत्तर के विकास के लिए  जिन कदमो को उठाने की जरूरत थी मोदी सरकार ने उस हर कदम को उठाया है जैसे की रेल संपर्क, सड़क, हवाई संपर्क और बिजली|पूर्वोत्तर के बजट में पिछले तीन वर्षों में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी की गयी है |

मोदी सरकार ने हर शेत्र में विकास करके पूर्वोत्तर को  नई अर्थव्यवस्था, नई ऊर्जा, नई सशक्तीकरण के केंद्र में परिवर्तित किया है|पूर्व उत्तर के विकास के लिए मोदी सरकार द्वारा उठाये गये कुछ क़दमों का विवरण

राजमार्ग और सड़क मार्ग

सड़क विकास के लिए मोदी सरकार द्वारा 40,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि निर्धारित की गई है।क्षेत्र के उपेक्षित सड़कों की देखभाल के लिए एक विशेष सड़क निगम अर्थात ‘पूर्वोत्तर सड़क विकास योजना’ का शुभारंभ भी किया गया है।

इंफाल के  क्षेत्र में  पहला ‘हिल एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम’ का संचालन किया गया है। यह कार्यक्रम विशेष रूप से इस क्षेत्र की भू-भौतिक विविधताओं को संबोधित करने के उद्देश्य से है तांकि प्रत्येक जिला / क्षेत्र के न्यायसंगत विकास को सुनिश्चित किया जा सके, जो आखिरकार पूर्वोत्तर राज्यों को देश के अन्य राज्यों के साथ समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होगा ।

राजमार्ग और सड़क मार्ग के लिए विशेष त्वरित मार्ग विकास कार्यक्रम की शुरुवात भी की गयी है जिसके तहत राज्य की राजधानियों को 2/4 लेनों से जोड़कर राष्ट्रीय राजमार्गों का  उन्नयन और एनईआर के 88 जिलों मुख्यालय के शहरों को  2-लेन सड़क कनेक्टिविटी प्रदान करने का उदेश्य है।

पिछले तीन वर्षों के दौरान, एनईसी ने 458.05 किलोमीटर की सड़क की लंबाई और 434.7 9 किलोमीटर फुटपाथ पूरा कर लिया है, जिनमें से अधिकांश सड़क परियोजनाओं में अंतरराज्यीय सडकें हैं।

कुछ दिन पहले ही प्रधान मंत्री मोदी जी ने मेघालय की राजधानी शिल्लोंग में शिल्लोंग से तुरा जाने वाली सड़क का उद्घाटन किया है और उत्तर पूर्व में केंद्र सरकार ने चार हजार किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों को मंजूरी भी दे दी है|

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  26 मई 2017  को देश को उसका सबसे लम्बा पुल और  उत्तर पूर्व को भूपेन हज़ारिका सेतु या ढोला-सदिया सेतु के रूप में एक एहम सौगात भी दी थी |  यह 9.15 किलोमीटर (5.69 मील) लम्बा सेतु लोहित नदी को पार करता है, जो ब्रह्मपुत्र नदी की एक मुख्य उपनदी है। इसका एक छोर अरुणाचल प्रदेश के ढोला कस्बे में और दूसरा छोर असम के तिनसुकिया ज़िले के सदिया क़स्बे में है। इस से अरुणाचल प्रदेश और असम के बीच के यातायात के समय में चार घंटे की कमी आएगी।

जलमार्ग

जलमार्ग में ब्रह्मपुत्र (राष्ट्रीय जलमार्ग -2) के अलावा, एनईआर में 19 अधिक जलमार्ग को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया है। इसके अलावा, बांग्लादेश के साथ अंतर्देशीय जलमार्ग के संपर्क के लिए, जैकिगंज-आशुगंज (320 किमी) हिस्से के साथ बराक (भारत में असम में 121 कि.मी.) का विकास किया गया है, जो ऊपरी असम को दूसरे तीन राज्यों से एनईआर में जोड़ देगा।

पॉवर

पॉवर के शेत्र में पिछले तीन वर्षों के दौरान एनईआर में एनईसी द्वारा चौदह (14) विद्युत परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 10 नए बिजली परियोजनाएं शुरू की गई हैं। कुल 16 जल विद्युत परियोजनाएं निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं।आज़ादी के 70 साल बाद भी चार करोड़ घरों में बिजली नही थी| ऐसे घरों में बिजली पहुँचाने के लिए सरकार ने सौभाग्य योजना की शुरुआत की| नये बिजली कनेक्शन के लिए सरकार ने कोई पैसा नही लिया| सरकार द्वारा मिज़ोरम की पहली बड़ी परियोजना तुइरियाल जल विद्युत् परियोजना की शुरुवात भी की गयी जिससे राज्य का आर्थिक सामाजिक विकास होगा और जिसके साथ मिज़ोरम पूर्वोत्तर का तीसरा राज्य बनगया है जिसके पास पर्याप्त मात्रा में पॉवर होगी|

रोज़गार

ब्रह्मपुत्र क्रैकर एंड पॉलिमर लिमिटेड ,न्यूमलगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड मोम इकाई, डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत पूर्वोत्तर बीपीओ संवर्धन योजना की मंजूरी और पर्यटन मंत्रालय द्वारा पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए थीमैटिक सर्किट ऐसी कई परियोजनाएं हैं जिन्होंने रोजगार को बढ़ावा दिया है।

कृषि और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग

कृषि और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देने के लिए  60,000 करोड़ रुपये की एक योजना, ‘सम्पाद’ का शुभारंभ किया। असम में कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) की स्थापना की गयी|भारत सरकार ने भारत की अष्टलक्ष्मी (आठ पूर्वोत्तर राज्यों) को अग्रेषित करने के लिए पांच रास्ते अपनाए हैं जिसमे राजमार्ग, रेलवे, जलमार्ग, वायुमार्ग और सूचना मार्ग (ऑप्टिक फाइबर नेटवर्क) शामिल हैं| एक बार जब ये पूर्वोत्तर में विकास लाएंगे और इसे नई अर्थव्यवस्था, नई ऊर्जा, नई सशक्तीकरण के केंद्र में परिवर्तित कर देगा, तो स्वत: भारत का विकास  होगा|

रेलवे

रेलवे के अंतर्गत सभी मीटर गेज पटरियों को इस साल के अंत तक व्यापक गेज में बदल दिया जाएगा और सभी पूर्वोत्तर राज्यों को अगले 2 सालों में व्यापक गेज से जोड़ा जाएगा।अरुणाचल प्रदेश और मेघालय अब रेल नक्शे पर हैं और त्रिपुरा में अगरतला भी व्यापक गेज के साथ जुड़ा हुआ है।रेलवेज पिछले साल ही मिज़ोरम पहुंची जब मिज़ोरम में भैरवी को असम के सिलचर से जोड़ा गया |सरकार  ने उत्तर पूर्व में 15 नई रेल लाइन प्रोजेक्ट्स जो 1385 किलोमीटर के दायरे में फैले हुए है जिस पर कुल 47000 करोड़ की लागत होगी उन को अनुमति भी दे दी है|

वायुमार्ग

वायुमार्ग के विकास के लिए उड़ान  योजना के तहत, क्षेत्रीय हवाई संपर्क के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र को  प्राथमिकता दी गयी  है।इस क्षेत्र में 92 नए मार्ग खोले जा रहे हैं। इसके अलावा, मणिपुर में मोरेह, असम के रुपसी और मेघालय के तुरा में 19 नए या अधोकेबल हवाई अड्डों को हवाई सेवाएं मिलेंगी।

हवाई अड्डों के उन्नयन के एक भाग के रूप में, गुवाहाटी हवाई अड्डे को एक अंतर-क्षेत्रीय केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जबकि अग्रवाल, डिब्रूगढ़ और इंफाल हवाई अड्डों को पूर्वोत्तर क्षेत्र में अंतर-क्षेत्रीय केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है।

 

मोदी सरकार उत्तर पूर्व राज्यों के विकास को लेकर काफी सजग है|महीने में दो बार कैबिनेट मंत्री उत्तर पूर्व का दौरा करते  है|पिछले तीन सालों में 150 बार कैबिनेट मंत्रिओं ने  उत्तर पूर्व का दौरा किया है | ये मोदी सरकार के प्रयास ही है जिसके कारण उत्तर पूर्व की योजनाओं में तेजी आई है और आज उत्तर पूर्व विकसित हो रहा है|

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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