राजनीति

जो राम के अस्तित्व को ही झुठला रहे थे उनका मुहुं काला; अमेरिका के वैज्ञानिकों ने कहा की राम सेतु मानव निर्मित है।

कांग्रेस, खासकर नेहरू परिवार शुरू से ही हिन्दू विरोधी रहा है। क्यों न हो आखिर मुघलों की संतान जो ठहरे । वो हिन्दूओं से हिन्दू देवी-देवताओं से और हिन्दू मान्यताओं से कैसे प्यार कर सकते हैं। करॊडॊं हिन्दुओं की दिल की धड़कन भगवान राम और श्री कृष्ण के अस्तित्व को झुठलाने की कॊशिश कांग्रेस बरसों से करती आ रही है। हिन्दू मंदिरों का पैसा मुसलमानों की हज यात्रा के लिए उपयॊग करते समय लज्जा नहीं आती कांग्रेस सरकार को लेकिन हिन्दू देवी-देवताओं के अस्तित्व को सच मानने में उन्हे लज्जा आती है!

मैडम जी तो घॊर हिन्दु विरोधी है। उनका एक ही मकसद है हिन्दुओं की बरबादी। हिन्दू मंदिर, हिन्दू धरॊहर, हिन्दु सभ्यता की बरबादी। उनका हिन्दु विरॊधी होने के सबूत बार बार सामने आता रहा है। हर साल घर में इफ़्तार मनानेवाली मैडम जी ने आज तक राम नवमी या कृष्ण जन्माष्टमी नहीं मनाई है। हिन्दू त्योहारॊं को मनाना तो छोड़िये उनकी सरकार ने तो न्यायलय में शपथ पत्र दायर किया था यह कहते हुए की राम कभी थे ही नहीं, उनका जन्म कभी हुआ ही नहीं! अपने हिन्दु विरॊधी होने का एक निदर्शन मैडम जी ने 2005 में दिया था।

2005 में यूपीए सरकार ने सेतुसमुद्रम परियोजना का ऐलान किया था। यूपीए सरकार सेतुसमुद्रम परियोजना के तहत तमिलनाडु को श्रीलंका से जोड़ने की योजना पर काम करना चाहती थी। इसके तहत रामसेतु के कुछ इलाके को गहरा कर समुद्री जहाजों के आने जाने लायक बनाने की यॊजना बनाई थी। इसके लिए सेतु की चट्टानों को तोड़ना जरूरी था। इस परियोजना से रामेश्वरम देश का सबसे बड़ा शिपिंग हार्बर बन जाता। यूपीए सरकार किसी भी सूरत में राम सेतू को तोड़ना चाहती थी।

2005 में यूपीए सरकार ने उच्चतम न्यायालय में दाखिल किए गए अपने हलफनामे में कहा था कि रामसेतु को खुद भगवान राम ने अपने एक जादुई बाण से तोड़ दिया था। इसके सबूत के तौर पर सरकार ने ‘कंबन रामायण’ और ‘पद्मपुराण’ को पेश किया था। सरकार ने रामसेतु के वर्तमान हिस्से के बारे में कहा कि यह हिस्सा मानव निर्मित न होकर भौगोलिक रूप से प्रकृति द्वारा निर्मित है। इसमें रामसेतु नाम की कोई चीज नहीं है। इस विषय पर पूरे देश में विवाद छिड गया तब यूपीए सरकार ने हलमनामे को वापस लेते हुए 29 फरवरी 2008 को उच्चतम न्यायालय में नया हलफनामा पेश कर कहा कि रामसेतु के मानव निर्मित अथवा प्राकृतिक बनावट सुनिश्चित करने के लिए कोई वैज्ञानिक विधि मौजूद नहीं है।

इससे पूर्व जब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने उच्चतम न्यायालय में दाखिल अपने हलफनामे में रामायण में उल्‍लिखित पौराणिक चरित्रों के अस्तित्व पर ही प्रश्न उठाए थे, करोड़ों हिन्दु इससे आहत हुए। राम केवल कपोल कल्पित पात्र नहीं अपितु भारत की पहचान है। करोड़ों हिन्दुओं के भगवान है।

रामायण की कहानी के अनुसार राम ने पहले समुद्र राजा से रास्ता मांगा था लेकिन तीन दिन तक यज्ञ के बावजूद समुद्र राजा ने उनकी बात नहीं सुनी तो उन्होंने अग्निबाण से समुद्र को सुखा देने के बारे में सोचा। समुद्र राजा वहाँ पहुंचे और कहा कि नल और नील के पास पुल बनाने की तकनीक है और वे दोनों लंका तक पुल बना सकते हैं।

नल और नील ने एक ऐसा पुल बनाया जिसके पत्थर पानी पर तैरते थे। रामेश्वर में अभी भी कुछ ऐसे पत्थर पूजे जाते हैं। कई हिन्दू ग्रंथों में इस पुल का उल्लेख मिलता है। माना जाता है कि सुनामी और अन्य समुद्री तूफानों के कारण ये पुल छिन्न-भिन्न हो गया है।

एएसआई के हलफनामे में उसके निदेशक (स्मारक) सी. दोरजी ने कहा था कि राहत की मांग कर रहे याचिकाकर्ता मूल रूप से वाल्मीकि रामायण, तुलसीदास रचित राम चरित्र मानस और पौराणिक ग्रंथों पर विश्वास कर रहे हैं, जो प्राचीन भारतीय साहित्य का महत्वपूर्ण अंग हैं, लेकिन इन्हें ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं कहा जा सकता और उनमें वर्णित चरित्रों तथा घटनाओं को भी प्रामाणिक सिद्ध नहीं किया जा सकता।

कांग्रेस अपने लाभ के लिए कितने नीचे गिर सकती है इसका यह अद्भुत उदाहरण है। जिन्होंने कभी राम के अस्तित्व कॊ झूठ कह कर शपत पत्र दायर किया था आज वे मंदिर-मंदिर घूम रहे हैं बेशर्मी की सारी सीमा पार कर देते हैं गांधी परिवार के लॊग। आज उनके झूठ की  पॊल खुल गयी  है। उनका मुहुं काला हो गया है। क्यों की स्वयं अमरीका के वैज्ञानिक यह दावा कर रहें है की राम सेतु मानव निर्मित है।

अमेरिका के साइंस चैनल ने शोध किया है जिसमें दावा किया गया है कि भारत और श्रीलंका के बीच जो पुल है वो मानव निर्मित ही है। साफ है कि इस शोध से एक बार फिर रामसेतु की अवधारणा को बल मिला है। हिन्दू मान्यताओं के मुताबिक भागवान राम ने माता सीता को लंका के राजा रावण की कैद से छुड़ाने के लिए इस पुल का निर्माण कराया था। आज भी हिन्दू मानते हैं की रामसेतु का निर्माण उनके प्रभु राम ने ही किया था जिस पर अब अमरिका ने भी मुहर लगा दी है। शोध के मुताबिक ये पुल करीब 7 हजार साल पुराना है और इसकी लंबाई करीब 30 मील है। निस्संदेह सनातन काल में ऐसे तकनीक भारत में उपलब्ध होगें जिससे पानी पर पुल बनाया जाता था।

राम सेतु मानव निर्मित है इस पर अमरीका के वैज्ञानिकों ने मुहर लगादी है। अब कहां मुहुं छुपाते फिरेगी कांग्रेस? क्या अब भी वह कहेगी की राम पैदा ही नहीं हुए थे? क्या अब भी वह अयॊध्या मॆं मस्जिद बनवाना चाहेगी? क्या मंदिर मंदिर घूम रहे कांग्रेस के लाडले अयॊध्या में राम मंदिर बनाने के पक्ष में बोलेंगे?

 

Tags

Related Articles