संस्कृति

हैरतअंगेज़ !! भारत में सांप्रदायिक कहा जाने वाला योग इस इस्लामिक देश में दिलो की धड़कन बन चुका है

भारत में हमेशा से ही हमारी प्राचीन मान्यताओं और व्यवस्थाओ पर कुठाराघात होता रहा है. चाहे हमारे त्यौहार हो, योग और आयुर्वेद जैसे पूरे विश्व में जाने माने वाली पद्दतियाँ हो, हमेशा हमारे ही देश के कुछ लोग इन सभी के खिलाफ षड्यंत्र चलाते रहते हैं. इन्हे नीचे दिखाते रहते है, इन्हे पिछड़ेपन का नाम देते रहते हैं. 2014 में नरेंद्र मोदी जी जब प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने योग को वापस से उसका खोया नाम और मुकाम दिलाने का प्रयत्न शुरू किया.

मोदी जी के आह्वान पर संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने की घोषणा की. उसी दिन से भारतीय सेक्युलरो के पेट में मरोड़ें उठने लगी और उन्होंने इसका पुरजोर विरोध किया. जिसको जहां मौका मिला उन्होने इसका विरोध किया और इस बहाने इसको एक सांप्रदायिक एंगल भी दिया. योग को इस्लाम विरोधी और मुस्लिम विरोधी बता कर प्रचारित किया.

आज हम आपको ऐसे देश के बारे में बताएँगे जिसका जन्म ही इस्लाम के नाम पे हुआ था, और वहां की 99 % आबादी मुस्लिम ही है, फिर भी आज उस देश में योग को लेकर एक जबरदस्त क्रेज बन गया है. जी हाँ हम बात कर रहे है पाकिस्तान की. हमारा पड़ौसी और एक सबसे कट्टर इस्लामिक देश.

पाकिस्तान में आज प्रोफेसर मोइज़ हुसैन योग के सबसे प्रणेता बन चुके हैं. उन्होंने मुंबई के योग इंस्टिट्यूट से योग की शिक्षा ग्रहण की और उसके बाद उन्होने कराची में “इंस्टिट्यूट ऑफ़ मंद साइंस एवं क्लासिकल योग” की स्थापना की. वो दिन है और आज का दिन है, वो लाखो लोगो को योग का प्रशिक्षण दे चुके हैं और अनगिनत लोगो की ज़िन्दगी योग के सहारे बदल चुके हैं.

शुरू में उन्हें काफी दिक्कत आई, क्यूंकि योग एक तो हिंदुत्व से जुड़ा हुआ है और भारत से सम्बंधित सभी चीज़ो को पाकिस्तान में संशय की दृष्टि से देखा जाता है. भारत के नृत्य और अन्य कला को सीखने पर पाकिस्तान में प्रतिबंध है. वहाँ के कॉलेज में भारतीय कलाओ पे कोर्स नही पढ़ाये जाते. अगर कोई अपने खर्चे पर भारत में सीखना चाहे तो उनको पाकिस्तानी सरकार वीसा नहीं देती थी.

ऐसा ही प्रोफेसर हुसैन के साथ भी हुआ, लेकिन धीरे धीरे स्थिति बदलती गयी. और अब तो स्थिति यह है की पाकिस्तान के लगभग हर शहर में कई योग क्लब बनाये जा चुके है. जहाँ रोजाना लाखो मुस्लिम योग की प्रैक्टिस करते है. प्रोफेसर हुसैन के अलावा पाकिस्तान के एक और योग टीचर है, शमशाद हैदर. शमशाद हैदर ने योग को पाकिस्तान के घर घर तक पहुँचाया, खासकर इलीट लोगो तक.

शमशाद हैदर पूरे पाकिस्तान में 50 से भी ज्यादा योग क्लब चलाते है. पिछले तीन सालो से हर साल अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पे हैदर लाखो लोगो को योग करवाते है. इसके अलावा योग के नाम पर हजारो फेसबुक पेजेज और ग्रुप्स भी बनाये गए है और इनके द्वारा युवा पीढ़ी को योग की तरफ आकर्षित किया जा रहा है. और अभी तक बहुत ही अच्छा रिस्पांस इन लोगो को मिला है.

इसके अलावा पाकिस्तान में स्कूली शिक्षा में भी योग को स्थान दिया गया है. इसके अलावा पाकिस्तानी सरकार के सरकारी चैनल्स पे भी योग का लाइव टेलीकास्ट किया जाता है. योग के वैज्ञानिक तथ्य और इसके फायदो पर  वहाँ चर्चा होती है. इसके अलावा पाकिस्तान के बड़े शहरो में एरियल योग, पावर योग जैसे कलाओ के लिए स्टूडियोज भी बन गए है.

पाकिस्तान में योग के इस बड़ते क्रेज का सबसे बड़ा कारण है वहाँ फैली इस्लामिक कट्टरता से बाहर निकलने की इच्छा. लोगो ने इसी कट्टरपन की वजह से इस्लाम के सबसे लिबरल तबके सूफिज्म के अंत को देखा है. आज यही लोग इस कट्टरपन से बाहर निकलने के लिए योग की शरण में आ रहे हैं.

वहीं दूसरी और भारत में इसका एकदम उलट हो रहा है. यहाँ योग को लेकर तमाम तरह की भ्रांतियां फैलाई जा रही है और इसको इस्लाम विरोधी बताया जा रहा है. कुछ मौलाना तो इसके खिलाफ फतवे भी निकाल चुके है. कमाल की बात है की जिस देश का जन्म ही इस्लामिक कट्टरपन की वजह से हुआ वो आज योग को गले लगा रहा है, वहीं हमारे देश में इसे नकारा जा रहा है.

 

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