राजनीति

पकड़ा गया कपिल सिब्बल का सुन्नि वक्फ़ बोर्ड का झूठ: कपिल सिब्बल वक्फ़ बॊर्ड की तरफ़ से लड़ रहे थे।

गुजरात चुनाव के चलते राहुल मंदिर-मंदिर घूम रहे है और हिन्दुओं को भ्रमित कर रहें है। इसी के चलते मोदीजी ने राहुल को आड़े  हाथों लेते हुए कहा था की उनके अपने ही पार्टी के बड़े नेता कपिल सिब्बल बाबरी मस्जिद की पैरवी करते हुए सुन्नि वक्फ़ बोर्ड की तरफ़ से लड़  रहे हैं। मोदी जी के आरोपों को दर किनार करते हुए कपिल सिब्बल ने कहा था की वे कभी सुन्नि वक्फ़ बोर्ड की तरफ़ से नहीं लड़े हैं और मोदी जी को अपने तथ्यों को परख कर बॊलना चाहिए। पीएम मोदी के हमलों का जवाब देते हुए सिब्ब्ल ने कहा, ‘हम भगवान पर भरोसा करते हैं, हमें आप पर भरोसा नहीं है मोदी जी| आप राम मंदिर नहीं बनाने जा रहे हैं, मंदिर तभी बनेगा जब ईश्वर की मर्जी होगी| इसका फैसला कोर्ट करेगा.’ उन्होंने कहा था कि ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ध्यान नहीं दिया कि मैंने सुप्रीम कोर्ट में कभी भी सुन्नी वक्फ बोर्ड का प्रतिनिधित्व नहीं किया. इसके बाद भी उन्होंने एक बयान के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को धन्यवाद दिया. पीएम से गुजारिश है कि वे आगे थोड़ा सावधान रहें.’

उधर सुन्नि वक्फ़ बोर्ड के सदस्य और बाबरी मस्जिद के पक्षकार हाजी महबूब ने कहा है कि ‘हां, कपिल सिब्बल हमारे वकील हैं, लेकिन वह एक राजनीतिक दल से भी जुड़े हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट में दिया गया उनका बयान गलत है। हम इस मसले का जल्द से जल्द समाधान चाहते हैं।’ उन्होंने यह भी कहा कि ‘मैं तो चाहता हूं कि यह मसला जल्द से जल्द हल हो जाए। सिब्बल ने किस अंदाज से कह दिया कि 2019 के बाद सुनवाई हो? यह मैं गलत समझता हूं। 25 साल गुजर गए, मैं नहीं चाहता हूं कि 1992 की तस्वीर फिर दोहराई जाए। वह कांग्रेस के नेता भी हैं, हमें पता नहीं था कि वह ऐसी बात कहेंगे।’

अगर कपिल उनके वकील नहीं थे तो हाजी महबूब ने ऐसा क्यों कहा? आज कपिल सिब्बल के सुन्नि वक्फ़ बोर्ड के वकील होने का सबूत मिल गया है। बॊर्ड के तरफ़ से पैरवी करने के स्लिप पर सिब्बल का नाम है जिस पर सुन्नि वक्फ़ बोर्ड के वकील शाहिद रिजवी ने हस्ताक्षर किए हैं। रिजवी ने अपने हस्ताक्षर होने के बावजूद भी यह मान लिया है की कपिल सिब्बल सुन्नि वक्फ़ बोर्ड की तरफ़ से लड़ रहे थे। सिब्बल के झूठ से परदा उठते ही काँग्रेस ने उन्हें गुजरात के चुनावों से दूर रहने को कहा है।

सिब्बल राम मंदिर के केस को 2019 तक लटकाए रखना चाहते थे क्यों की उनका मानना था की मंदिर बनाना भाजपा का चुनावी प्रणाली था। अगर 2019 से पहले अयोध्या में मंदिर बनगया तो इससे भाजपा को फायदा हो सकता है। इसी के चलते उन्होंने कॊर्ट में सुन्नि वक्फ़ बोर्ड की तरफ़ से यह बात आगे रख दिया था जिस पर बड़ा बवाल हो गया था। मोदीजी ने भी उनसे पूछा था की 2019 लोकसभा चुनाव और राम मंदिर का क्या संबंध है? सिब्बल ने इस बात से इन्कार किया था की वे सुन्नी वक्फ़ बॊर्ड की पैरवी कर रहे हैं लेकिन आज कपिल सिब्बल का झूठ रंगे हाथों पकड़ा गया है और राम मंदिर को लेकर काँग्रेस का अभिप्राय क्या है इस बात का भी खुलासा हुआ है।


Shaanyora

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