राजनीति

हार्दिक पटेल के तो पसीने छुड़ा दिए इंजिनियरिंग छात्र द्वारा आरक्षण पर दिए इस लाजवाब भाषण ने।

अक्षत गांधी ने आरक्षण पर दिया ऐसा बयान की हार्दिक को उसकी नानी याद आ गयी!

पुणे में आयॊजित 7वें भारतीय छात्र संघ के कार्यक्रम में इंजिनियरिंग के छात्र अक्षत गांधी ने मंच पर बैठे आरक्षण के पैरवी करनेवाले हार्दिक को ऐसी खरी खोटी सुनाई की उसको तो अपनी नानी याद आगयी हॊगी। हार्दिक को मुहुँ छुपाने के लिए भी जगह नहीं था। अक्षत ने कहा कि जिस देश में अपने आप को पिछड़ा हुआ सिद्द करने की होड़ लगी हो क्या वो देश आगे बड़ सकता है? ज़हन में यह बात बार बार आता है की जो देश तीन सौ साल बाद आज़ादी की सांस ले पाया आज सत्तर साल के आज़ादी के बाद भी इस देश की दशा इस कगार पर खड़ी है की देश का हर समुदाय आरक्षण की आवश्यकता महसूस कर रहा है।

अक्षत गांधी ने कहा की मात्र दस साल के लिए आरक्षण का प्रावधान संविधान में दिया गया था लेकिन राजन्नैतिक कारणॊं से उस अवधी को आगे बढाया गया। आज यह आरक्षण एक सियासी खिलौना बन चुका है। मंच पर बैठे पाटीदार आदोंलन के नायक हार्दिक पटेल का चेहरा देखने लायक था जब अक्षत आरक्षण की पॊल खॊल रहे थे। अक्षत ने कहा कि सियासी स्वार्थ के लिए जात-पात के हथियार से देश को बाटने वाले लोगों ने युवाओं को भी इस आरक्षण के लालच में घूस घोड़ी देकर भ्रमित करदिया है।

अक्षत ने बिना हार्दिक का नाम लेते हुए उसे आड़े हाथो लिया और कहा की आज उसके गुजरात में कॊई संपन्न जाति के लिए आरक्षण मांग रहा है। इस बात पर छात्रों ने जमकर ताली बजाई और सहमती जताई। अक्षत ने याद दिलाया की भगत सिंह 23 साल में देश के लिए शहीद हुए थे वो एक जट्ट सिख थे। अखंड भारत के निर्माता सरदार वल्लभ भाई खुद पटेल थे और यदि वे आरक्षण माँगने निकलगये होते तो आज भी ये देश अंग्रेजों का मोहताज होता। ताली बजाकर छात्रों ने अक्षत की बातों का खूब समर्थन किया। मंच पर बैठे महानुभाव हार्दिक के पसीने छूट रहे थे।

अक्षत ने कहा जिस देश का संविधान धर्म निरपेक्ष होने का दावा करता है उस देश में जातीवाद आरक्षण का बढ़ता हुआ माँग देश के संविधान के वैद्यता पर प्रश्न उठाता है। समानता के नाम पर आरक्षण की असमानता की बात आग में घी डालने का काम करता है जिस के ऊपर राजनैतिक रोटीयां सेखी जाती है। अक्षत ने कहा की आरक्षण आर्थिक आधार पर होना चाहिए ना की जाति के आधार पर क्योंकि गरीबी जाति देख कर नहीं आती। अक्षत ने बिना हाथ उठाए ही हार्दिक के मुख पर तमाचा मार दिया जिसे शायद ही वह पचा पाया हो।

हार्दिक को जान लेना चाहिए की देश का युवा क्या चाहता है और क्या सॊचता है। यह सिर्फ़ अक्षत की आवाज़ नहीं अपितु पूरे देश के  युवा की आवाज़ है। देश को आरक्षण के अभिशाप से निकाल ने के बजाए हार्दिक जैसे निकम्मे लोग उसे जातीवाद आरक्षण के दलदल में फंसाकर अपना राजनैतिक किस्मत चमकाने की कॊशिश में लगे हैं। एसे लोगों को देश से भगा देना चाहिए जो देश को जाति के आधार पर तोड़ने की बात करते हैं।


Shaanyora

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