संस्कृति

आपका ‘अशॊक साम्राट’ महान अहिंसा का प्रतिपादक नहीं अपितु जल्लाद था। जानते हैं इतिहास को?

'चंड अशॊक' के जीवन से जुड़े काले कारनामें जिसे आपसे छुपाया गया है।

बचपन से इतिहास के किताब में हमको पढ़ाया गया है अशॊका भारता का पहला साम्राट था। अपने शिलालेखों के माध्यम से अशॊक अपना संदेश जनता तक पहुँचाता था। कलिंग के युद्ध के बाद अशॊक का मन परिवर्तन हॊकर उसने बुद्द धर्म का स्वीकार किया। वह बड़ा ही दयालू और अहिंसा का प्रतिपादक था। वगैरा वगैरा..

कलिंग में सामूहिक विनाश का एक विषय छोड़ बाकी सब झूठ है। इतिहास को तोड़  मरोड़कर हमारे समक्ष रखा गया है। भारत में यह प्रथा अंग्रेजॊं के बाद निरंतर चलती आई है की इतिहास से जुड़े सत्य को छुपाकर सेक्यूलरिस्म का चादर ऒढ़ कर जनता को मूर्ख बनाकर उन्हें भ्रमित किया गया है। हम भी मंद बुद्धी बिना प्रश्न किए जो भी हमें सिखाया गया उसे आंख मूँद कर सच मानते रहे।

अशॊक जिसे महा मानव, अहिंसा का प्रतिपादक, साम्राट कहते हैं उसकी दरिंदगी का परिचय कर लीजिए:

1.अशॊक सुंदर नहीं था वह कुरूपी था।अशॊक का पिता बिंदुसार बॆटॆ से नफरत करता था।

2.अंग्रेज़ों के भारत आने से पूर्व तक अशॊक के बारे में कॊई जानता तक नहीं था। वह जनमानस से विस्मृत हॊ गया था।

3.अंग्रेजों के ज़माने के इतिहासकारों ने अशॊक के इतिहास को पुनर्जीवित किया।

4.अशॊक के बारे में प्राथमिक जानकारी बौद्ध धर्म के तीन साहित्यिक मूल अशॊकवदन, दीपवंस और महावंस से आती है।

5. 274 BC में बिंदुसार की म्रुत्यू होती है। उस समय बिंदुसार का बड़ा बेटा सुशीम पूर्व-पश्चिम राज्यों में युद्द कर रहा था। जैसे ही उसको पिता के म्रुत्यू का संदेश मिला वह तुरंत पाटलीपुत्र लौटा। लेकिन तब तक अशॊक ने ग्रीक आतंकवादियों की सहायता से राजधानी पर कब्जा कर सिंहासन पर स्वयं को प्रतिष्ठापित कर चुका होता है।

6. अशॊक धॊके से अपने सौतेले भाई को म्रुत्यू के घाट उतारता है। वह अपने भाई को एक जलते हुए कॊयले के गड्ढे में धॊके से भेजता है जिसके वजह से पाटलीपुत्र के न्यायिक उत्तराधिकारी की म्रुत्यू हो जाती है।

7. अशॊक ने अपने ही परिवार के सारे पुरुष बंधु-बांधवों को मार डाला।

8.अशॊक ने अपने 99 सौतेले भाईयॊं को मार डाला था। केवल अपने सगे भाई तिस्सा को उसने जीवनदान दिया था।

9.अशॊक अपने पीड़ादायक कामुक उग्र गुस्सेले व्यक्तिव के लिये ‘चंड अशोक’ कहलाता था।

10.उसने अपने 500 मंत्रियों को मार डाला क्यों की उसको अनुमान था की वे वफादार नहीं थे।

11.अशॊक के हरम में 100 महिलाएं थी। अगर उनमें से कॊई अशोक का अपमान करता तो वह उन्हें जलाकर मार डालता था।

12.अशॊक मौत का सौदागर था। उसने अपने शत्रुओं को मारने के लिए एक सुसंपन्न ‘याताना कक्ष’ बनवाया था जिसे “प्रुथ्वी का नरक” या “अशॊक का नरक” कहा जाता था।

13.एक बार अशॊक ने अपने मंत्रियों पर दबाव डाला की वे अलग अलग प्राणियॊं के खोपड़ी को बेचे जिसमें मानव खोपड़ी भी शामिल किया जाए।

14.गिरिका नाम का व्यक्ति अशॊक का अधिकारिक जल्लाद था। उसने अपने माता-पिता को ही मौत के घाट उतारदिया था क्यों की वे नहीं चाहते थे की गिरिका जल्लाद बन कर अशॊक के आस्थान में काम करे।

15.अशॊक के नरक में लोगों को सज़ा देने की प्रक्रिया भी बहुत भयावह थी। लॊगॊं के मुँहु को लॊहे से जबरन खॊल कर उबलते तांबे को उनके गले के अंदर डाल दिया जाता था।

16.अशॊक ने अपने जल्लाद के साथ एक करार बनाया था की जो भी व्यक्ति महल के अंदर प्रवेश करेगा वह बाहर नहीं जायेगा। इसलिए अशॊक ने अपने यातना कक्ष को इतना सुंदर बनाया था की लॊग उसकी सुंदरता देख कर आकर्शित होकर खींचे चले आते थे। और वहाँ जल्लाद उन्हें पकड़ कर यातनाएं देता था जिसे देख कर अशोक को विकृत संतॊष मिलता था।

17.यातना कक्ष का एक और यातना का नमूना था जिसमें लॊहे के शंकू को पांच तह से व्यक्ति के दॊनॊं हाथ, दोनों पैर और ह्रूदय के आर-पार डाला जाता था। उसके बाद उन व्यक्तियॊं को जलाया जाता था।

18.कलिंग युद्द और अशॊक के बौध्द धर्म स्वीकार ने में कॊई संबंध नहीं था। वास्तव में कलिंग युद्ध से 2 वर्ष पूर्व ही उसने बौध्द धर्म में धर्मातंरण किया था।

19.अशॊक ने बौद्ध धर्म का स्वीकार इसलिए किया था की काशी के सर्वॊच्छ परिषद ने उसे ‘चांडाल’ घॊषित किया था क्यों की अशॊक ने भरत चक्रवर्ती के संधी का उल्लंगन करते हुए भ्रातृवध किया था।

20.इस के प्रतीकार स्वरूप उसने वैदिक काल के संस्कृत और भ्राह्मणत्व का उन्मूलन किया। उसने सारे ब्राहण मंदिरों और गुरुकुलों को तोड़ कर वैदिक संस्कृति और सभ्यता का सर्वनाश किया।

21. 262 BC में विशाल मौर्य साम्राज्य ने कलिंग पर आक्रमण किया। इस युद्ध में 100000 लॊग मारे गये। उससे कई ज्यादा घायल हॊकर और भूख से मरे। 150000 लोगों को बंधी बना लिया गया।

22. कलिंग का युद्ध इतना रण भयंकर था की बगल की दया नदी का पानी पूर्ण्र रूप से रक्त रंजित हॊ गया था। नदी का पानी लाल रंग में परिवर्तित हुआ था।

23.एक निर्ग्रंथ के अनुयायी जिसने बुद्ध को 24 महावीर तीर्थंकर के चरणॊं में साष्ठांग करते हुए चित्रित किया था। अशॊक ने उस जैन अनुयायी और उसके पूरे परिवार को उन्ही के घर में ज़िंदा जलादिया।

24.उस दिन से अशॊक ने घॊषणा करदिया की जो भी निर्ग्रंथ विधर्मी का सर काटकर लाएगा उसे एक दिनारा दिया जाएगा। नगर के सारे निर्ग्रंथ अनुयायियॊं को काट काट कर मारा गया। यहाँ तक की स्वयं अशॊक के भाई को भी निर्ग्रंथ अनुयायी समझ्कर मारा गया।

25.अशॊक ने पुन्द्रवर्धना(आज का पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश)में स्थित आजीविका पंथ के सारे अनुयायियों को मार ने का आदेश दे दिया। जिस के कारण 18000 आजीविका अनुयायी बे मौत मारे गये।

26.अशॊक की साम्राज्य का पतन उसके म्रुत्यू से बहुत पूर्व ही हॊ गया था।

संजीव सान्याल कहते हैं की ” जैसा की एक देख सकता है, अशॊक एक श्रॆष्ठ राजा की तरह नहीं दिखता बल्कि सूक्ष्म नीरीक्षण से यह आभास हॊता है की वह एक क्रूर और कुख्यात व्यक्ति था जिसने एक विशाल और अच्छी तरह कार्य रत साम्राज्य को जबर्दस्ती हड़पकर  स्वंयं को सिंहासन पर प्रतिष्ठापित करनेवाला प्रतीत होता है”।

अशोक का ‘धम्मा’ भगवान की पूजा में आस्था नहीं रखता था। उसके साम्राज्य में अलग अलग धर्म के लॊग रहते थे और आपस में लड़ाई झगडा करते थे। अशॊक जगह जगह घूम कर बुद्ध धर्म का प्रचार प्रसार करता था। भारत के कुटिल पुरुश नेहरू अशॊक की प्रशंसा करते हुए कहते हैं की “उसके फर्मान आज भी हमसें उस भाषा में बातें करते हैं जिसे हम समझ सकते हैं और जिससे हम बहुत कुछ सीख सकते हैं”।

अब आप समझिए एक विकृत जल्लाद व्यक्ति को महान साम्राट बताकर हमें वास्तव से अनबिज्ञ रखने का षड्यंत्र किसने और क्यॊं रचा। कुछ समझ आया मूर्खों  की ” बुद्ध-अशॊक-गांधीजी-नेहरू-अंग्रेज़-सेक्यूलरिस्म-अहिंसा” का क्या संबंध है? हिन्दुओं को नपुसंक बनाकर अहिंसा का पाठ पढ़ाकर हिन्दुत्व के क्षात्र तेज को बुझाकर हमारा नरसंहार करने का प्रयत्न का आभास हुआ?

क्या सत्य जानकर भी झूठे सेक्यूलरिस्म का राग आलाप कर अपने ही पूर्वजों के हत्यारॊं को महान बताकर उनका गुण गाऒगे?

समय आगया है की उस झूठ से परदा हटाने का जिसे अंग्रेज़ों के ज़माने से हमें पढ़ाया गया है। विजय केवल और केवल सत्य का ही हो… सत्यमेव जयते।

Source: http://www.thetinyman.in/2016/03/28-shocking-facts-about-ashoka.html

Shaanyora

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