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आज ही का दिन था जब बाबर और बाब्री की प्रेम की निशानी बाब्री मस्जिद को तोड़ दिया था हिन्दुत्व के शेरों ने।

25 साल बीत गये किन्तू आज भी राम अपने मंदिर की प्रतीक्षा में खड़े हैं...

इस घटना को घटित हुए 25 साल बीत गये। अयॊध्या के राम जनम भूमी में राम के मंदिर को तोड़ कर बाबर ने अपने समलैंगिक प्रेमी बाब्री के नाम पर इमारत बनवाया था। 25 साल पहले हिन्दुत्व के शेरों ने उस घिनौने प्रेम की निशानी बाब्री मस्जिद को तोड़ कर राम मंदिर बनाने की नींव रखी थी। 6 दिसंबर 1992 को विश्व हिंदू परिषद और बीजेपी ने विवादित स्थान पर एक रैली आयोजित की जिसमें तकरीबन डेढ़ लाख कारसेवक थे।

अयॊध्या में राम चबूतरा था जिसकी छत पर मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, आचार्य धर्मेंद्र, साध्वी ऋतंभरा समेत कई नेता मौजूद थे। राम चबूतरे के ग्राउंड फ्लोर पर लालकृष्ण आडवाणी एक बंद कमरे में मौजूद थे।  साध्वी ऋतंभरा और वीएचपी नेता लाउडस्पीकर पर नारे लगा रहे थे ‘एक धक्का और दो, बाबरी मस्जिद तोड़ दो’| कारसेवकों के वीरता के वजह से शाम तक एक एक करके बाबरी मस्जिद के तीनों गुंबद गिरते चले गए। करीब चार बजे बाबरी मस्जिद का नामो निशान मिट गया। । दूसरे दिन तक वहां एक अस्थायी मंदिर बन चुका था और राम -सीता की प्रतिमा स्थापित हो चुकी थी।

इस मामले में तुंरत जांच बिठाई गई और विध्वंस के लिए 68 लोगों को जिम्मेदार ठहराया गया जिनमें विश्व हिंदू परिषद और बीजेपी के भी कुछ लोग शामिल थे। बाबरी मस्जिद में जो भी तोड़-फोड़ हुई उसकी जांच के लिए लिब्रहान आयोग का गठन किया गया और उस गठन ने 17 साल बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बाब्री मस्जिद विध्वंस मामले में अपनी रिपोर्ट सौंपी। इस पूरे मामले में बीजेपी के कई नेताओं को भी कस्टडी में लिया गया। उन सभी नेताओं का कहना है की उन्होंने यह काम अपने धर्म के रक्षा के लिए किया है|

जिस जगह पर राम का जनम हुआ है उस जगह पर बाबर की समलैगिंक प्रेम की निशानी भला क्यों रहे? सेक्यूलरिस्म का चादर ऒढे हुए पाखंडी लॊग राम के अस्तित्व पर ही प्रश्न उठा रहे हैं। अपने ढकॊसले के लिए समर्थन देते हुए वे कहते हैं की मंदिर की जगह अस्पताल या स्कूल बनाई जाए। अस्पताल और स्कूल चर्च और मस्जिदों को भी तोड़ कर बनाया जा सकता है? उन्हें क्यॊं नहीं तोड़ते? हिन्दुओं के लिए एक न्याय और ईसाई और मुसलमानों के लिए एक न्याय। यही है सेक्यूलरिस्म? देश नये चर्च और मस्जिद बनवानेवालों से क्यॊं नहीं कहता की उस जगह पर अस्पताल या स्कूल बनाएं? हमेशा हिन्दुओं को ही प्रत्यर्पण क्यों करना पड़ता है?

शेर है वो कारसेवक जिन्होंने मस्जिद को तोड़ने का साहस दिखाया। अयॊध्या में मंदिर बनाने की जिम्मेद्दारी केवल एक पार्टी का है? क्या अन्य पार्टीयों की कोई ज़िम्मेदारी नहीं बनती? अपने चापुलूसी के चलते वे भूल गये की वे इसी देश के नागरिक है और राम के जन्म भूमी में ही उनका जनम हुआ है? अयॊध्या में राम मंदिर बनाने की जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक का है। यह राम की भूमी है उनका जन्म स्थान है। अयॊध्या में राम मंदिर तो बनना ही चाहिए। मस्जिद, स्कूल और अस्पताल तो कहीं भी बनाये जा सकते है।


Shaanyora

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