आध्यात्मिकसंस्कृति

मंत्र का क्या अभिप्राय है, मन्त्र हमारे जीवन में क्या मायने रखते है

 

मंत्र का अर्थ

मंत्र’ का अर्थ शास्त्रों में ‘मन: तारयति इति मंत्र:’ के रूप में बताया गया है, अर्थात मन को तारने वाली ध्वनि ही मंत्र है। वेदों में शब्दों के संयोजन से ऐसी ध्वनि उत्पन्न की गई है, जिससे मानव मात्र का मानसिक कल्याण हो|मन्त्र दो शब्दों से मिलकर बना हैं. “मन” तथा “त्र”, मन्त्र शब्द में मन का अर्थ हैं – मनन करना या ध्यानस्त होना और त्र वर्ण का अर्थ हैं – रक्षा करना|मंत्र एक सटीक ध्वनि उजागर करते हैं, एक आवृत्ति जो हमारे उप-चेतना को निर्देश देती है| मंत्र बहुत विशिष्ट परिणामों के लिए पड़े जाते हैं और बार-बार इन्हें दोहराया जाता है।

 मन्त्रों का हमारे मन पर प्रभाव

हजारों सालों से, योगियों ने मंत्र जप के महत्व पर बल दिया है| आधुनिक तंत्रिका विज्ञान अब शब्दों का प्रयोग कैसे किया जाता है और मन के कामकाज पर होने वाले उनके प्रभाव के बीच संबंधों को खोजना शुरू कर रही है। जब हम सुनते हैं, बोलते हैं, मंत्र या सोचते भी हैं, तो हमारे मस्तिष्क के सामने वाले भाग “प्रकाश” और तंत्रिका में आग प्रज्वल्लित होती है। ऑक्सीजन और रक्त के प्रवाह में वृद्धि होती है|

108 बार जप का महत्तव

ऋषियों ने प्रत्येक व्यवस्था बहुत विचारपूर्वक की है। माला में 108 दाने के सम्बंध में निम्न तथ्य विचारणीय हैं|पहली धारणा ये है प्रकृति-विज्ञान की दृष्टि से विश्व में प्रमुख रूप से कुल 27 नक्षत्रों को मान्यता दी गयी है। तथा प्रत्येक नक्षत्र के चार चरण ज्योतिष-शास्त्र में प्रसिद्ध हैं। 27 को चार-चरणों से गुणाकार करने पर 108 संख्या होती है।अतः 108 संख्या समस्त विश्व का प्रतिनिधित्व करने वाली सिद्ध होती है।ब्रह्मांड में सुमेरु की स्थिति सर्वोपरि मानी गयी है। अतः माला में सुमेरु का स्थान सर्वोपरि ही रखा जाता है तथा उसका उल्लंघन नहीं किया जाता। दूसरी धारणा ये है दिन-रात में मनुष्य-मात्र के श्वासों की संख्या 21 हजार 6 सौ वेद शास्त्रों में निश्चित की गयी है | इस हिसाब से दिन भर के श्वाँस 10800 हुए तथा रात भर के श्वाँसों की संख्या भी 10800 हुई।जप प्रमुख रूप से उपाँशु किया जाता है जिसका फल सामान्य रूप से सौ गुना बताया गया है।अतः प्रातः सायं संध्या में 108-108 जप करने से 108&100= 10800 हुआ।तीसरी धारणा ये है की ज्योतिष के अनुसार ब्रह्मांड को 12 भागों में विभाजित किया गया है। इन 12 भागों के नाम मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन हैं। इन 12 राशियों में नौ ग्रह सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु विचरण करते हैं। अतः ग्रहों की संख्या 9 का गुणा किया जाए राशियों की संख्या 12 में तो संख्या 108 प्राप्त हो जाती है। इसके साथ ही कुल 27 नक्षत्र होते हैं। हर नक्षत्र के 4 चरण होते हैं और 27 नक्षत्रों के कुल चरण 108 ही होते हैं। माला का एक-एक दाना नक्षत्र के एक-एक चरण का प्रतिनिधित्व करता है। इन्हीं कारणों से माला में 108 मोती होते हैं।माला के 108 मनके हमारे हृदय में स्थित 108 नाड़ियों के प्रतीक स्वरूप हैं|

मन्त्रों को अपनी जिंदगी में शामिल करें

मंत्र के साथ जुड़ा हुआ विश्वास, इच्छा-शक्ति और भावनाएं जितनी मजबूत हों वह बेहतर है। यह एक डायनेमो प्रभाव की तरह है, जितना अधिक आप लगातार मंत्र को दोहराते हैं उतना ही आप देवत्व की और आकर्षित होते है । मंत्रों के माध्यम से ऐसे बहुत से दोष बहुत हद तक नियंत्रित किए जा सकते हैं जो रत्नों तथा अन्य उपायों के द्वारा ठीक नहीं किए जा सकते।अगर आप अपनी जिंदगी में इन मन्त्रों को सही ढंग से उच्चारण करे तो आप के मन को परम शान्ति प्राप्त होती है और आपके दुःख दर्द सब दूर हो जाते है|मन्त्रों को अपने जीवन का एक जरूरी हिस्सा बनाए और एक शांतिपूर्वक जीवन व्यतीत करे।

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