राजनीति

आखिर इनकी गलती क्या थी की वे हिन्दू थे? क्यॊं ‘भगवा आतंकवाद’ के झूठे केस में इनको फंसाया गया?

2006 में एक निव्रुत्त सेनाधिकारी रमेश उपाध्याय और कर्नल पुरोहित ने ‘अभिनव भारत’ का गठन किया था। ‘अभिनव भारत’ का गठन आज़ादी से पहले की वीर सावरकर जी के अभिनव भारत संघठन से प्रेरित हॊकर किया गया था। ‘हिन्दू राष्ट्रवाद’ की बुनियाद पर इस संघठन का प्रारंभ हुआ था। 2007 में इस संघठन के पहले कुछ मीटिंग होतें हैं। 2008 में हिमानी सावरकर (सावरकर्जी की भतीजी और नाथूराम गोडसे की भाँजी) को अभिनव भारत का अध्यक्ष चुना जाता है। इस संघठन का मानना था की हिन्दू धर्म खतरे में है और धर्म की रक्षा करना कर्तव्य है। इससे पहले की यह संघठन मज़बूत होता और ‘हिन्दू राष्ट्रवाद’ को जगाता, इस संघठन के सदस्यॊं को 2006 के मालेंगांव बम धमाके के आरॊप में गिरफ़्तार किया गया।

यह कॊई संजोग नहीं था अपितु सॊचा समझा षडयंत्र था। अभिनव भारत के कई सदस्यॊं को गिरफ़्तार किया गया जिसमें स्वामी असीमानंद, कर्नल श्रीकांत पुरॊहित और साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को मुख्य आरॊपी बनाया गया। उस समय केंद्र में काँग्रेस की सरकार थी। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और कर्नल पुरॊहित को बम धमाके के केस में फंसाया गया और धोखे  से उन्हें गिरफ्तार किया गया। झूठे केस में फसकर नौ साल तक उन्हें मानसिक और दैहिक रूप से प्रताड़ित किया गया। देश में ‘भगवा आतंकवाद’ जैसे नए शब्द का आविष्कार किया गया। जब की देश में जितने भी आतंकवादी हमले हुए हैं उन सभी के तार पाकिस्तान से जुडे हैं और सारे आतंकी एक ही धर्म के पाए जाते हैं। आतंकवादियों को रिश्तेदार बताकर उनकी पैरवी काँग्रेस ही करता रहा है।

कर्नल पुरॊहित और साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के ऊपर आरॊप तो पूरी तरह से ‘राजकीय’ प्रेरित था। बिना किसी कठॊर साक्ष्य के उन्हें मालेगांव बम धमाके केस में जॊड दिया गया ताकी देश में ‘भगवा आतंकवाद’ हॊने का झूठ फैलाया जा सके। इतिहास गवाह है कि किस तरह देश के महानयाकों को गद्दार बताकर हिन्दु राष्ट्रवाद के विचार करनेवालों को आतंकवादी घॊषित किया गया है। वर्ष बीत गये लेकिन हालात नहीं बदले। आज भी हिन्दु हित के बारे में बात करनेवालों को झूठे केस में फँसाकर जेल भेज दिया जाता है। काँग्रेस और कम्यूनिष्ट शासित राज्यों में हिन्दुओं के ऊपर निरंतर मानसिक और दैहिक अत्याचार हो रहें है। अगर इसके खिलाफ आवाज़ उठाया जाए तो उन्हें जेल भेज दिया जाता है। अगर हिन्दुत्व के लिए कोई लडता है तो उसे अपराधी और आतंकवादी करार दिया जाता है। जब की देश-विदेश में आतंक मचानेवाले आतंकी जो की इस्लाम से संबंध रखते हैं उनके धर्म का तो पता ही नहीं चलता!

धोखे से साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को गिरफ़्तार कर जेल ले जाया गया उन्हें मारा पीटा गया। एक कमरे से दूसरे कमरे में फॆंका गया। जबरन अपराध कुबूल ने को दबाव किया गया। उनके भगवा वस्त्र उतार कर अलग वस्त्र पहनाए गये। ATS अधिकारी एक के बाद एक उन्हें मारते थे। जब भी मार पड़ती थी तो साध्वी गीता गाती थी। पुलिसवालों ने उनके चरित्र पर लांछन लगाए। एक महिला अपने ऊपर हुए प्रताड़न की बखान भी न कर सके उस हद तक साध्वीजी पर मानसिक और दैहिक प्रताड़न  किया गया है (सुदर्शन न्यूस में साध्वीजी का इंटरव्यू है )। एक आम व्यक्ति सह भी नहीं पाएगा इतना मारा पीटा गया और साध्वीजी को अश्लील बातें भी सुनवाई गई । लेकिन वे टूटी नहीं, उन्होंने अपने ठाकुर की प्रार्थना की और 9 साल तक सारे अन्याय और अत्याचार को सहती रही।

उधर कर्नल पुरॊहित को भी मानसिक और दैहिक प्रताड़न दिया गया। कर्नल के दोनों पैरॊं को रस्सी से बांध कर खींचा गया (उनके पत्नी द्वारा दिया गया इंटरव्यू यु ट्यूब में है)। कर्नल के घुटनों की सर्जरी हुई थी और उन्हॊंने ATS अधिकारियों से कहा भी की उनकी घुटनों की सर्जरी हुई है लेकिन फिर भी वे नहीं माने और उन्हें रस्सी से बांधा जिस वजह से कर्नल के घुटनों के अस्थि-बंध फिर से टूट गये। उनके दोनों हाथों को रस्सी से बांध कर उन्हे ऊपर लटकाया गया और बुरी तरह से मारा पीटा गया। कर्नल को बम विस्फोट में अपनी भूमिका को कुबूल ने के लिए कहा गया और उनको धमकाया गया की अगर वह ऐसा नहीं करेंगे तो उनकी मां, पत्नी और बहन को उनके सामने निर्वस्त्र किया जायेगा। देश की रखवाली करनेवाले जवान के साथ ऐसा दुर्व्यवहार। काँग्रेस तो अंग्रेज़ों और मुघलों से भी बत्तर है।

साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और कर्नल पुरॊहित के ऊपर मकॊका लगाकर उन्हें आतंकवादी घॊषित कर गिरफ़्तार किया गया। बिना चार्ज शीट दायर किए 9 साल तक उन्हें मानसिक और दैहिक रूप से प्राताड़ित किया गया। उन दोनों की एक ही गलती थी की वे हिन्दू थे और हिन्दू राष्ट्रवाद के प्रतिपादक थे। आज भी वे दोनों अपने देश की सेवा में लगे हुए हैं आज भी वे अपने देश से और धर्म से प्यार करते हैं। काँग्रेस ने मानवता की सारी हदें पार कर दी। आज साध्वी जी और कर्नल जी को ज़मानत मिल गयी है। NIA जांच से पता चला है की बम धमाकों में उनकी कॊई भूमिका थी ही नहीं। अब काँग्रेस क्या उसकी घटिया हरकत के लिए इन दोनों से माफी मांगेगी? क्या काँग्रेस इन दोनों के खॊए हुए 9 साल को वापस दे पाएगी? क्या उनके ऊपर हुए मानसिक और दैहिक प्रताड़न को वह कम कर पाएगी? कौन देगा इन दोनों को न्याय? कौन लौटाएगा इनके बीतॆ हुए दिन? है कॊई जवाब…

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