आध्यात्मिक

क्या वास्तव में ईसाइयॊं का वेटीकन सिटी भगवान शिव का मंदिर था?

क्या ‘क्रिश्चैनिटी’ का अर्थ ‘कृष्ण नीति’ है?

अगर इतिहास के पन्नों को खंगालेंगे तो ऐसे कई रहस्यों से परदा उठेगा जिसे सदियों से दबाए रखा है, जनता के नज़रों से छुपाए रखा है। विश्व को भारत की देन वेद- उपनिशद, यॊग -आयुर्वेद, नाट्य-संगीत, विज्ञान-तंत्रज्ञान सब ही सनातन धर्म की ही उपज है। पृथ्वी के ऊपर सनातन धर्म का जन्म सबसे पहले हुआ यह तो सभी जानते हैं। भारत के सनातन धर्म को नष्ठ करने के अनगिनत प्रयत्न विश्व के सभी देशों ने किया है। हमें भ्रमित कर हमें हमारे ही गौरवशाली इतिहास से दूर रखा गया है।

सनातन धर्म कभी किसी पर अपना श्रेष्ठता नहीं थॊपता और नाहीं धर्मातंरण के लिए जिहाद अपनाता है। दुनिया भर में आज सनातन धर्म के मूल का साक्ष्य मिल रहा है। विश्व के किसी भी कोने में जहाँ भी उत्खनन हो रहा है वहाँ भारत के देव-देवियों के अनादि काल के मूर्ती पाए जा रहे हैं। जिस तरह मुसल्मानों के काबा में शिवलिंग होने का दावा चल रहा है, उसी तरह ईसाइयॊं की वेटिकन सिटी भी सनातन काल में शिव मंदिर था ऐसा माना जा रहा है।

प्रसिद्द इतिहासकार पी.एन.ओक ने अपने शोध में यह दावा किया है की इस्लाम और ईसाई दोनों ही धर्म हिन्दू धर्म के यौगिक हैं। उनके अनुसार वेटिकन सिटी और काबा दोनों शिव मंदिर थे। अपने दावो को आधार देने के लिए पी.एन.ओक ने कई उदाहरण भी पेश किए हैं जिनमें से रोम का वेटिकन शहर प्रमुख है। ओक का कहना है कि वेटिकन शब्द की उत्पत्ति संस्क्रत के ‘वाटिका’ शब्द से हुई है। इतना ही नहीं उनका कहना है कि ईसाई धर्म यानि ‘क्रिश्चैनिटी’ को भी सनातन धर्म की ‘कृष्ण नीति’ और अब्राहम को ‘ब्रह्मा’ से ही लिया गया है। पी.एन.ओक का कहना है कि इस्लाम और ईसाई, दोनों ही धर्म वैदिक मान्यताओं के विरुपण से जन्में हैं। उनका कहना है की ईसाईयों का ‘आमेन’ शब्द का व्युत्पन्न संस्क्रत की ‘ऒम’ शब्द से हुई है।

अब तो नासा भी मानता है की ब्रह्मांड में  ‘ऒम’ शब्द की ही गूंज होती है। अगर वेटिकन सिटी को गौर से देखा जाये तो उसका आकार शिवलंग के आकार से मिलता है। शिव के माथे पर तीन रेखाएं (त्रिपुंडर) और एक बिन्दु होती हैं, ये रेखाएं शिवलिंग पर भी समान रूप से अंकित होती हैं। ध्यान से देखने पर आपको समझ आएगा कि जिन तीन रेखाओं और एक बिन्दू का जिक्र यहां कर रहे हैं वह पिआज़ा सेन पिएट्रो के रूप में वेटिकन शहर के डिजाइन में समाहित है। इसके अलावा रोम के वेटिकन शहर में खुदाई के दौरान एक शिवलिंग प्राप्त हुआ था जिसे ग्रिगोरीअन एट्रुस्कैन म्यूजियम में रखा गया है। कहा जाता है की वॆटिकन की पुस्ताकागार में ऐसी अनगिनत पुस्तकें हैं जो वॆटीकन के झूट का पर्दाफाश कर सकता है। इसी डर से उन पुस्तकों को अती संवेदनशील बताते हुए छुपाकर ताला लगाकर रख दिया गया है।

भगवान शिव को सृष्टि का नियामक भी कहा जाता है। शिवलिंग की पूजा अनादी काल से ही चलता आया है। भारत के वेद-विज्ञानी-ऋषी-मुनी ब्रह्मांड का भ्रमण करते थे। वे अपने भगवान शिव जी की पूजा किया करते थे। यही कारण हो सकता है की वेटीकन अनादी काल में एक शिव का मंदिर था जिसे ईसाईयों ने अपने धर्म के हित के लिए परिवर्तित कर सत्य को छुपाए रखा है। ऐसे और भी रहस्य हो सकते हैं जो क्रिश्चियानिटी और इस्लाम दुनिया से छुपाता हो। हो सकता है भविष्य में इतिहासर-संशोधनकर्ता इन छुपाए हुए रहस्यों से पर्दा हटाकर सत्य का उजागर करे। तब तक हम केवल आकलन ही कर सकते हैं की सनातन धर्म को नष्ठ करने का षड्यंत्र रचा गया है।


Source: https://pt.slideshare.net/viprayami/the-origin-of-vatican-its-hindu-origin/3


Shaanyora

Tags

Related Articles