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भाजपा को गुजरात में बहुमत

भारत के प्रधानमंत्री सिंचाई और सामाजिक विकास पर किताब पढ़ते हैं वो भी हवाई यात्रा के दौरान इससे समझ आती है ‘समय’ और ‘विकास’ की कितनी चिंता है, digitally with Physically रहते हैं, भाषण तो उनका पता ही है न कभी-कभी 3-3 भी कर लेते हैं. लेकिन अभी गुजरात का ‘विकास’ रुक कर ‘हार्दिक पटेल’ का विकास हो रहा है…

हार्दिक पटेल जो चाह रहे हैं वो 9वीं अनुसूची में संसोधन के बिना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है और यह केंद्र का विषय भी है. अगर संसोधन हो भी जाये तो संविधान की आधारभूत संरचना पर प्रहार होगी..

देखते रहिये, बस कुछ दिनों/सालों में ‘रोबोट’ का भी आगमन हो सकता है भारत की राजनीति में इसका उदहारण अभी कुछ ही दिन पहले न्यूजीलैंड है और “सोफ़िया” (रोबोट, सोफ़िया सऊदी अरब की नागरिक है). रोबोट के जरिये भी ज्यादा विकास किया जा सकता है डिजिटल इंडिया में, इससे जाति और आरक्षण की राजनीती को भी कम किया जा सकता है..

इंडिया टुडे और ऐक्सिस माई इंडिया ने मिलकर गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर जो सर्वेक्षण कराया है उसके अनुसार हिमाचल प्रदेश तथा गुजरात दोनों में भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलने वाली है.

182 सीट वाली गुजरात विधानसभा में भाजपा को 115 से 125 की बीच सीटें मिल रही हैं। कांग्रेस को अधिकतम 65 सीटें मिल सकती हैं। अगर हार्दिक कांग्रेस का समर्थन करते हैं तो उसकी कुछ सीटें बड़ सकती हैं। उपरोक्त रिपोर्ट उस समय आई थी जब देश में सेवा व वस्तु कर को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हुआ है।

वित्त मंत्री जेटली दावा कर रहे हैं कि पिछले तीन वर्षों में देश की बुनिदायी अर्थव्यवस्था काफी मजबूत हुई है और सरकार सारी चुनौतियों का सामना करने की क्षमता रखती है। कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी के जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स कहने पर जेटली का कहना है कि जिन लोगों को 2जी और कोलगेट की आदत पड़ गई है उन्हें यह सब कानून सही नहीं लगेगा। वित्त मंत्री के अनुसार पिछले तीन वर्षों में औसत महंगाई दर 5 प्रतिशत से नीचे रही है और 2016-17 में औसत 2 प्रतिशत से भी कम रही।

प्रदेश स्तर पर नजर दौड़ायें तो गुजरात में भाजपा सरकार की कारगुजारी से लोग अगर बहुत खुश न भी रहें तो संतुष्ट अवश्य दिखाई दे रहे हैं। पाटीदारों की समस्या व अन्य स्थानीय मुद्दों का प्रभाव एक सीमा तक ही है, इसी कारण गुजरात में भाजपा के प्रति लोगों का विश्वास अभी बना हुआ है।

– त्रिलोक सिंह: स्नातकोतर, राजनीती विज्ञान, किरोड़ी मल कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय.

 

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