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RSS और सेना बदल रहे है कश्मीर की फिज़ा: “कश्मीर में अपना बाहुबल स्थापित करता राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ”

कुछ समय पहले जब मोदी सरकार ने पीडीपी के साथ गठबंधन में कश्मीर में सरकार बनायी..तो लोगो को भृकुटियां तन गयी की क्यों मोदी ने ऐसे गठबंधन की नींव रखी है जिसमे उनके सर पर कांटो का ताज रखा जाना है… राजनीति की बाते और होने वाले घटनाक्रम कभी कभी हमे भी समझ में नही आते है जबकि इसके पीछे राजनेता और मैं कहूँ की मोदी जैसे प्रखर और मंझे हुए नेता ने क्या रणनीति बिछाई होगी ये जानकर आज हमें भी आश्चर्य होता है.. क्योंकि उस रणनीति के सुखद परिणाम आने शुरू हो रहे है…तो आइये बात करत है कि किस प्रकार आर एस एस कश्मीर में भगवा झंडे के मज़बूत आधार पर तिरंगे को फहराने की पुरजोर कोशिश कर रहा है और कामयाब भी हो रहा है।

जैसा की विदित है कि बीजेपी ने कश्मीर में पहली बार सत्ता का स्वाद चखा है भले ही ये पीडीपी के साथ गठबंधन व्यवस्था में हो पर उसने आपने कदम मज़बूती के साथ कश्मीर में रख दिए है,साथ ही साथ हिंदुत्व के प्रचार प्रसार के लिए विश्व प्रसिद्ध राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने भी कश्मीर की ओर अपना रुख किया…बीजेपी न RSS के साथ मिलकर हिंदुत्व की ज़मीन फिर से तैयार करना शुरू कर दिया है..व्व भी एक डीएम विपरीत माहौल जहाँ मुस्किम कट्टरपंथ और पाक समर्थित आतंकवाद दशको से अपनी जड़ें जमाये बैठे है।

बीजेपी ने अपने इस मिशन के लिए 2 प्रकार के प्रचारक/विस्तारक को कश्मीर में अपने काम पर लगा दिया है इन कार्यकर्ताओ को अल्प विस्तारक और दीर्घ विस्तारक में बांटा गया है जो संगठन और लोगो के बीच में एक संचार तंत्र की तरह काम कर रहे है।

बीजेपी के स्टेट जनरल सेक्रेटरी नरिंदर सिंह के अनुसार पार्टी ने 40 फूल टाइम कार्यकर्ताओ को जम्मू के हिन्दू बहुल क्षेत्रो में तथा 36 कार्यकर्ताओ को कश्मीर के मुस्लिम बहुल इलाकों में भेजा है।

पिछले 6 महीनों ने इन कार्यकर्ताओ केंद्र सरकार व् बीजेपी पार्टी के विभिन्न जन कल्याणकारी कार्यक्रमो को कश्मीर में जमीनी स्तर तक पहुंचाया है जिससे लोगो में सरकार के प्रति विश्वास दुबारा से जन्म ले रहा है..जो की एक सकारात्मक बदलाव दिखता है।

पार्टी ने लगभग 1650 अल्प विस्तारक कार्यकर्ताओ को ग्रास रुट लेवल पर कार्य करने के कश्मीर में उतार दिया है। इन सभी कार्यकर्ताओं जो अपने घर से दूर काश्मीर के विपरीत हालातो में काम कर रहे है इन सभी का 17 सितम्बर को एक कार्यक्रम में सम्मान किया गया।

बीजेपी की राज्य इकाई ने सभी कार्यक्रमो को एक छत्र करते हुए इसे पंडित दीन दयाल उपाध्याय जन शताब्दी समारोह का नाम दिया है,पार्टी पंडित दींन दयाल उपाध्याय का एक पूरे वर्ष का जन्मदिवस पूरे भारतवर्ष में समारोह मना रही है।

सूत्रों के अनुसार संघ के कश्मीर में इस प्रकार के कार्यक्रमो के प्रथम बैच में लगभग 8 पूर्ण कालिक कार्यकर्ता काम कर रहे है । जिन्हें जम्मू में लगभग 24 व् कश्मीर में 20 तक किया जाना है ,ये रणनीति 2019 के संसदीय चुनावो को ध्यान में रखते हुए बनायी जा रही है। इस रणनीति के तहत 2020 में होने वाले कश्मीर में विधानसभा चुनाव होने है और सभी 87 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में कम से कम एक फुल टाइम विस्तारक होना जरूरी है जो बीजेपी के सभी कार्यक्रमो,नीतियों की जानकारी लोगो तक पहुचाता रहे।

ऐसा पहली बार हो रहा है जब बीजेपी ने कश्मीर घाटी इतने व्यापक पैमाने पर जनसम्पर्क अभियान चलाया है… हालांकि बीजेपी ने एक विपरीत सोच वाली पार्टी पीडीपी के साथ गठबंधन किया और सरकार बनायी… जो ज़मी समय मुश्किलें भी पैदा कर देती है।

प्रधानमंत्री मोदी की अपार लोकप्रियता को देखते हुए 2014 में विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 25 विधानसभा सीट जीती थी,सभी सीट जम्मू जिसमे 10 जिले है से प्राप्त की थी,आने वाले दिनों में पार्टी 50,000 बूथ स्तर के कार्यकर्ताओ को शामिल करेगी,पार्टी ने 3 संसदीय सीटे जीती – जम्मू के दो और लदाख से 1 सीट जीती थी ,2014 में तो इतिहास रच दिया था । पर कश्मीर घाटी में एक रिक्तता अभी भी पार्टी को गम्भीरता से सोचने पर मजबूर कर देती है, जो को वास्तविकता भी है।

उसका कारण ये भी मुस्लिम कट्टरपंथ और आतंकवाद के चलते लोगो का सोचने का तरीका रातोरात बदलना मुश्किल होता है…. हालांकि भारतीय सेनाओ ने इस क्षेत्र में जबरदस्त कामयाबी पायी है..लगातार आतंक विरोधी ऑपरेशन्स में आतंकी लीडरो को मार गिराने, कश्मीरी लोगो को आतबक से दूर होने के लिए कॉउन्सेल्लिंग करना,उनके स्वास्थ्य शिक्षा आदि कार्यक्रमो से भी एक बड़ा अंतर पैदा किया जा रहा है ..जिसके लिए भारतीय सेनाओ ने बड़ा योगदान दिया ..जिसके लिए राष्ट्र उनके द्वारा प्रदान की गयी उत्कृष्ट सेवा का ऋणी है ।

जब एक सख्त जमीन तैयार हो जायेगी तब कश्मीरी पंडितों को वापस बसाने की चिरकालिक आवश्यकता पर काम होगा..

जय हिंद

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