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पूर्व वायुसेना चीफ का सनसनीखेज खुलासा: मुम्बई आतंकी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक करने की थी पूरी तैयारी, परन्तु तत्कालीन यूपीए सरकार ने रोका

भारतीय वायुसेना 26/11 मुम्बई हमलों का बदला लेना चाहती थी, लेकिन कांग्रेस की UPA सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक करने से रोक दिया था।

अचंभित करने वाले खुलासे में एयर चीफ मार्शल (रिटायर्ड) फली होमी मेजर ने बताया कि भारतीय वायुसेना 2008 के दुखद मुम्बई आतंकी हमले का बदला लेने को तैयार थी, लेकिन तब की यूपीए सरकार ने आतंक फैलाने वाले पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए किसी भी तरह की सर्जिकल स्ट्राइक करने से रोक लगा दी थी।

भूतपूर्व वायुसेना चीफ ने टाइम्स नाउ के संपादक सृंजोय चौधुरी से इंटरव्यू में बताया कि भारतीय वायु सेना की 2008 में मुम्बई हमलों के बाद सर्जिकल स्ट्राइक करने की पूरी तैयारी थी। मुंबई हमलों के 9 साल बाद भूतपूर्व वायुसेना चीफ ने ये बताते हुए हलचल मचा दी है कि वायुसेना ने 2008 में ही, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी ट्रेनिंग शिविरों को नष्ट करने की योजना और पूरी सैन्य योग्यता हासिल कर ली थी लेकिन तब की यूपीए सरकार ने कभी जरूरी स्वीकृति नही दी।

टाइम्स नाउ से बातचीत में भूतपूर्व चीफ ने बताया कि मुम्बई हमलों के 2 दिन बाद भारतीय सेना की तीनों कमानों को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आवास पर बुलाया गया था, इस मीटिंग में रक्षा मंत्री ए के अंटोनी और रक्षा सचिव को भी बुलाया गया था। मीटिंग में जाने से पहले तीनो सेना प्रमुखों ने आपस मे ये बातचीत की थी कि अब मुम्बई हमलों के बाद क्या क्या किया जा सकता है और सरकार उनसे किन कदमो को उठाने को कह सकती है। बैठक में वायुसेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री जी को सूचित किया था कि पीओके स्थित आतंकी शिविरों को तबाह करने के लिए हथियार, लोजिस्टिक्स और लड़ाकू जहाज़ से लगाये जिस भी चीज की ज़रूरत है वो सब तैयार है। लेकिन उन्हें कभी ईस दिशा में आगे बढ़ने की स्वीकृति नही मिली।

भूतपूर्व चीफ मार्शल ने बताया कि 26/11 मुंबई हमलों के तरह की आतंकी घटनाओं के परिप्रेक्ष्य में सर्जिकल स्ट्राइक करने का मौका 24 घंटे के अंदर ही होता है। और इस तरह के छोटे किंतु महत्त्वपूर्ण एक्शन के बहुत ही रणनीतिक प्रभाव होते हैं। उस समय सर्जिकल स्ट्राइक एक ऐसा मौका था जिसे हमने खो दिया और इस मौके का हम फायदा नही उठा सके।

इस खुलासे से कांग्रेस के उन दावों की धज़्ज़ियाँ उड़ गई हैं जिनमे कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में भी सर्जिकल स्ट्राइक होने की बाते कही थी, लेकिन उन्हें चुनावी फायदा उठाने के लिए सार्वजनिक नही किया था जैसा की नरेंद्र मोदी जी ने किया था। इन दावों की इस खुलासे के बाद हवा निकल गयी है।

इस सनसनीखेज खुलासे से कुछ सवाल उठते है जो कि उस समय की तत्कालीन सरकार से पूछे जाने चाहिए।

• यूपीए की तत्कालीन सरकार ने मुंबई हमलों के बाद पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए हाथ आये इस मौके को क्यों जाने दिया??

• वायुसेना प्रमुख के सर्जिकल स्ट्राइक की पूरी तैयारी होने के आश्वासन के बाद भी तत्कालीन यूपीए सरकार ने वायुसेना के सुझाव को गंभीरता से क्यों नही लिया??

• क्या कांग्रेस भारत के लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रही थी जब इसने अपने कार्यकाल में भी सफल सर्जिकल स्ट्राइक करने के दावे किए थे??

इन खुलासों के बाद राजनीतिक हलकों में भूचाल सा आ गया है। भारतीय जनता पार्टी ने तत्कालीन यूपीए सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि कांग्रेस में पाकिस्तान पे एक्शन लेने का साहस नही था। उधर कांग्रेस के ही नेता मजीद मेनन ने भी इस खुलासे को कांग्रेस के लिए एक झटका बताया।

इन सब बातों का खुलासा पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी ने अपनी किताब “Neither a Hawk Nor a Dove” में भी किया है और ये भी बताया है कि भारत के सर्जिकल स्ट्राइक वाले ऑप्शन के बारे में अमेरिका को भी सूचना थी। लेकिन भारत ने इंटरनेशनल दबाव बढ़ने के डर और संभावित भारत-पाकिस्तान युद्ध को सोच कर ऐसा करने की हिम्मत नही दिखाई।

पिछले साल अक्टूबर में श्री शिवशंकर मेनन ने भी अपनी किताब “Choices: Inside the Making of India’s Foreign Policy” के रिलीज़ के समय कुछ ऐसी ही बातें बताई थी। आपको बताते चले कि मुम्बई हमलों के समय शिवशंकर मेनन विदेश सचिव थे जो कि बाद में तत्कालीन यूपीए सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी बने। मेनन ने तब बताया था कि सभी भारतीयों की भावनाएं मुम्बई हमलों से आहत थी और सब पाकिस्तान स्थित लश्करे तैयबा से इस घटना का बदला लेना चाह रहे थे। खुद मेनन भी चाह रहे थे कि सेना मुरीदके में लश्कर के ठिकानों पे हमला करे या फिर उनके पाक कब्जे वाले कश्मीर में स्थित आतंकी शिविरों को तबाह करें या फिर ISI के खिलाफ कोई कदम उठाए, क्यों कि भावनात्मक रूप से ये बहुत ही संतुष्टि प्रदान करने वाला कदम होता। मेनन ने तब कहा था कि 2008 में अगर सैन्य कार्यवाही की जाती तो ये लंबे समय तक याद रखी जाती और ये कार्यवाही भारत के सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस के अक्षम होने के कलंक को मिटाती जो पूरी दुनिया ने लाइव टीवी पर 3 दिनों तक देखा था।

हम सभी को याद है कि कैसे 26 नवंबर 2008 को मुम्बई में आतंकी घटना हुई थी जिसमे पाकिस्तान के लश्कर-ए-तैयबा के 10 दुर्दांत आतंकवादियो ने एक तरह से पूरे दक्षिण मुम्बई को बंधक बना रखा था। इस हमले में 166 लोगो की मौत हुई थी जिसमे 26 विदेशी नागरिक भी शामिल थे।

यहां बताते चले कि 2016 में उड़ी हमले के बाद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर पर की गई सर्जिकल स्ट्राइक पर विपक्षी दलों ने सवाल खड़े किये थे। कांग्रेस ने इस हमले के सबूत भी मांगे थे, लेकिन अब इस नए खुलासे के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाली तत्कालीन यूपीए सरकार पर ही सवाल खड़े हो रहे है।

उड़ी हमले के बाद भी सभी भारतीयों के मन मे पाकिस्तान से बदला लेने की तीव्र इच्छा थी जिसको हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी भलीभांति समझते थे। उन्होंने उड़ी हमलों के बाद अपने संदेश में स्पष्ट कहा था कि इस हमले का समय पर जवाब दिया जाएगा और अपने जवानों की शहादत बेकार नही जाएगी। और फिर 28-29 सिंतबर 2016 की रात में भारत ने पाक कब्जे वाले कश्मीर में स्थित आतंकी ठिकानों को सर्जिकल स्ट्राइक कर नष्ट कर डाला।

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