सैन्य सुरक्षा

चरखी दादरी विमान दुर्घटना ने समाज को जोड़ा था..जानिये कैसे

 

 

मस्जिद में खाकी निक्कर व भगवा पट्टी का सम्मान

विमान यात्रा सुखद तो है; पर उसकी दुर्घटनाएं बहुत दुखद होती हैं। ऐसा ही एक दुखद प्रसंग 12 नवम्बर, 1996 को घटित हुआ, जब हरियाणा में भिवानी के पास चरखी दादरी गांव के ऊपर दो विमान टकरा गये। इनमें से एक सऊदी अरब का तथा दूसरा कजाक एयरवेज का था। दोनों में आग लग गयी और वे ढाणी फोगाट, खेड़ी सनवाल तथा मालियावास गांवों के खेतों में आ गिरे। सऊदी विमान के कुल 312 लोगों में से 42 हिन्दू, 12 ईसाई तथा शेष सब मुसलमान थे। कजाक विमान में भी कुल 39 लोग थे। इस प्रकार देखते ही देखते 351 लोग काल के मुख में समा गये।

दुर्घटना के कुछ समय बाद ही भिवानी के जिला संघचालक श्री जीतराम जी के साथ सैकड़ों स्वयंसेवक घटनास्थल पर पहुंच गये। वहां के डा0 हेडगेवार चिकित्सालय के चिकित्सक भी आ गये। अंधेरे के कारण पैट्रोमैक्स तथा एक जेनरेटर का प्रबंध कर सबसे पहले जीवित लोगों को ढूंढा गया, तो दो लोग ऐसे मिल गये; पर अस्पताल जाते समय मार्ग में ही वे भी चल बसे।

एक स्थानीय किसान श्री चंद्रभान अपना टैक्टर ले आये। स्वयंसेवकों ने उसमें बुरी तरह जले हुए शवों को लादा। रात में ही एक बर्फ के कारखाने को चालू कराया और 169 शवों को प्रातः पांच बजे तक भिवानी के चिकित्सालय में पहुंचाया गया। स्वयंसेवकों ने तत्काल ही ‘विमान दुर्घटना पीड़ित सहायता समिति’ का गठन कर लिया। इसमें संघ के साथ ही विश्व हिन्दू परिषद, सेवा भारती, भारत विकास परिषद, भारतीय जनता पार्टी, विद्यार्थी परिषद, आर्य समाज तथा अन्य सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि रखे गये।

समिति ने तत्काल कफन तथा ताबूतों का प्रबंध किया। यह समाचार फैलते ही मृतकों के संबंधी, पत्रकार तथा पुलिस-प्रशासन वाले वहां आने लगे। अतः पूछताछ विभाग के साथ ही उनके लिए चाय, पानी, भोजन तथा वाहन आदि की व्यवस्था की गयी।

कुछ मृतकों के शव पुलिस की उपस्थिति में उनके परिजनों को सौंप दिये गये। जिनके बारे में ठीक जानकारी नहीं मिली, ऐसे 76 मुसलमान तथा तीन ईसाइयों को उनके धार्मिक विधान के अनुसार दफनाया गया। इसमें स्थानीय मौलवी, दिल्ली से आये मुमताज चावला तथा मुंबई से आये इस्लामिया समिति के प्रतिनिधियों ने भी सहयोग दिया।

तीन दिन बाद 15 नवम्बर को दादरी की मस्जिद में एक धन्यवाद सभा का आयोजन कर जिला संघचालक श्री जीतराम जी तथा भारत विकास परिषद के श्री ईश्वर जी को सम्मानित किया गया। अधिकांश समाचार पत्रों ने शीर्षक लगाया – मस्जिद में खाकी निक्कर व भगवा पट्टी का सम्मान।

घटनास्थल पर आये केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री इब्राहिम तथा पूर्व केन्द्रीय मंत्री जी.कुरियन ने कहा – आपकी जितनी प्रशंसा की जाए, वह कम है। मैं आपको धन्यवाद देता हूं। सीकर के जाफर अली और हाकिम खान ने कहा – इन खुदा के फरिश्तों को न जाने क्या-क्या कहा जाता है; पर आज भ्रम मिट गया। पुलिस अधीक्षक मोहम्मद शकील का कथन था – संकट के समय में सर्वाधिक सहयोग संघ वालों का रहा। मुझे उनसे यही आशा थी।

ऐसे ही उद्गार वहां आये सभी लोगों के थे। धन्यवाद सभा में श्री जीतराम जी ने कहा कि जो धन एवं सामग्री लोगों ने दी है, उसमें से जो कुछ भी बचा है, उसे आंध्र के तूफान-पीड़ितों की सहायता हेतु भेजा जा रहा है।


विशाल शर्मा

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